'फॉर्म-6 में बदलाव पूरी तरह अवैध', जयराम बोले- सुप्रीम कोर्ट को तत्काल संज्ञान लेकर ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किया गया बदलाव “पूरी तरह अवैध” है और निर्वाचन आयोग के पास इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर सवाल, जयराम बोले- सुप्रीम कोर्ट को तत्काल संज्ञान लेकर ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए
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  • जयराम का आरोप- फॉर्म-6 में किया गया बदलाव “पूरी तरह अवैध” है।

  • उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के पास इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

  • 'फॉर्म-6 में संशोधन करने की शक्ति निर्वाचन आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास'

  • जयराम बोले- सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।

कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद के बीच शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए।

जयराम रमेश का निर्वाचन आयोग पर आरोप

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया।

रमेश ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में किया गया बदलाव “पूरी तरह अवैध” है और निर्वाचन आयोग के पास इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि जुलाई, 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदलाव किया गया और उसमें एक नया अनिवार्य खंड जोड़ा गया, जिसमें आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में शामिल थे या नहीं।


कांग्रेस नेता का ज्ञानेश कुमार पर हमला 

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह प्रावधान खासकर पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए बाधा पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-6 में संशोधन करने की शक्ति निर्वाचन आयोग के बजाय केंद्र सरकार के पास है और ऐसा बदलाव संबंधित नियमों में संशोधन के बिना नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस सांसद ने ‘पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960’ का हवाला देते हुए दावा किया कि फॉर्म में बदलाव के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन और संसद को इसकी सूचना दिया जाना जरूरी था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने इस बदलाव को “अवैध और अनधिकृत” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदाता बनने वाले लोग बिना परेशानी के अपना पंजीकरण करा सकें।

रमेश ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में संवैधानिक परंपराओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन हुआ है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करनी चाहिए।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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