कांग्रेस ने इंदौर में मौतों की SC स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग की, कहा- बीजेपी सरकार का संवेदनहीन चेहरा उजागर

कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा। प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि इस घटना से बीजेपी सरकार का ‘‘कुरुप, क्रूर और पूरी तरह से संवेदनहीन चेहरा’’ उजागर हो गया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों को लेकर बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश सरकार से जवाब मांगा और बीजेपी शासन को जवाबदेह ठहराने के लिए उच्चतम न्यायालय स्तर की स्वतंत्र जांच की मांग की।

कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि इस घटना से बीजेपी सरकार का ‘‘कुरुप, क्रूर और पूरी तरह से संवेदनहीन चेहरा’’ उजागर हो गया है।

उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार की घोर लापरवाही, अक्षमता और घोर उदासीनता के कारण इंदौर में छह माह के एक शिशु सहित 18 निर्दोष लोगों की जान चली गई।

पवन खेड़ा ने कहा कि 40,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और कई लोग अभी भी आईसीयू में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह वही इंदौर शहर है जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार ‘‘सबसे स्वच्छ शहर’’ का खिताब हासिल किया है।


उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी, जो लगातार 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा लगाती रहती है, अपने सबसे बुनियादी कर्तव्य यानी सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में विफल रही है। तत्परता, करुणा या जवाबदेही दिखाने के बजाय, बीजेपी सरकार ने चौंकाने वाला अहंकार प्रदर्शित किया है।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 'फोकट का सवाल मत पूछो' जैसी अपमानजनक टिप्पणी करके पत्रकारों का अपमान किया और मुआवजे के लिए इंतजार करते शोक संतप्त परिवारों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।’’

सरकार द्वारा प्रति पीड़ित मात्र 2 लाख रुपये की मामूली राशि दिए जाने पर खेड़ा ने कहा कि यह नगण्य राशि मानव जीवन की अहमियत का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘परिवारों को बीजेपी के घोर अहंकार, अक्षमता और घोर उदासीनता के कारण जीवन भर दुख सहना पड़ेगा।’’

खेड़ा ने कहा, ‘‘हम मांग करते हैं कि इस लापरवाही की तत्काल जांच की जाए और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा इसके लिए आदेश दिया जाए। साथ ही, भाजपा सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए उच्चतम न्यायालय स्तर की स्वतंत्र जांच कराई जाए। केवल इसी तरह के हस्तक्षेप से इस भयावह विफलता के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।’’


कांग्रेस नेता ने कहा कि यह त्रासदी दशकों से चली आ रही व्यवस्थागत विफलता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के बावजूद, बीजेपी सरकार स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करने में बार-बार विफल रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब बीजेपी सरकार विफल रही है, क्योंकि 2003 और 2008 में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने मध्यप्रदेश सरकार को शहरी जलापूर्ति और पर्यावरण सुधार परियोजना के लिए क्रमशः 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर और 7.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ऋण दिया था, जिसमें भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर शहर शामिल थे।

इस परियोजना का उद्देश्य पंपिंग स्टेशनों का आधुनिकीकरण व मरम्मत करना, जल मीटरिंग प्रणाली स्थापित करना, सीवेज नेटवर्क बिछाना और जल शोधन संयंत्रों का निर्माण करना था। एडीबी के रिकॉर्ड के अनुसार, इस निधि का लक्ष्य लाखों नागरिकों के लिए जल उपलब्धता, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करना था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद पिछले दो दशकों में मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार इन दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रही है।


कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि तिमाही जल गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया गया, निगरानी रिपोर्ट कभी तैयार या प्रस्तुत नहीं की गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अधूरी या बदहाल छोड़ दी गईं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के साथ आपराधिक विश्वासघात और अंतरराष्ट्रीय ऋण शर्तों का घोर उल्लंघन है। छह माह के शिशु सहित 18 निर्दोष लोगों का खून भाजपा के अहंकार और कुप्रबंधन की वजह से बहा है।’’

उन्होंने पूछा, ‘‘बीजेपी की लापरवाही के कारण हुई इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? मासूम बच्चों और शिशुओं की जान जाते देख मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री अपनी चुप्पी को कैसे उचित ठहरा सकते हैं।’’

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