ब्रेक्जिट का असर ब्रिटेन वासियों पर शुरू, यूरोप में नौकरी मिलना मुश्किल, अधिकारों पर कटौती की तलवार

अभी तक ब्रिटिश नागरिकों को यूरोप में कहीं भी रहने, पढ़ाई करने और काम करने की अनुमति है। जानकारों का अनुमान है कि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटिश नागरिकों के यूरोप में यह अधिकार नहीं रह जाएंगे और उनके मुक्त आवागमन की आज जैसी सुविधा नहीं रहेगी, जिसका असर नौकरी पर पड़ेगा, जिसके उदाहरण मिलने भी लगे हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) से निकलने (ब्रेक्जिट) की ‘संक्रमण अवधि’ इसी साल दिसंबर में पूरी हो रही है। ऐसे में यूरोप में ब्रिटेन के लोगों के लिए रोजगार के अवसर पर असर पड़ना शुरू हो गया है। इस वजह से अभी से ही यूरोपीय देशों में ब्रिटिश नागरिकों को नौकरी के साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना बहुत कम हो गया है।

अभी तक ब्रिटिश नागरिकों को यूरोप में कहीं भी रहने, पढ़ाई करने और काम करने की अनुमति है। यूरोपीय संघ के नियोक्ताओं का अनुमान है कि ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटिश नागरिकों के यूरोप में यह अधिकार नहीं रह जाएंगे और उनके मुक्त आवागमन की आज जैसी सुविधा नहीं रहेगी।

ब्रिटेन के सांसदों को बताया गया है कि ब्रेक्जिट के बाद मुक्त आवागमन के अधिकार के नहीं होने के कारण यूरोप के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले ब्रिटिश लोगों को नौकरी के लिए साक्षात्कार से वंचित किया जा रहा है। यूरोप में रहने वाले 12 लाख ब्रिटिश नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था 'ब्रिटिश इन यूरोप' ने कहा कि विदेशों में रहने वाले कई लोगों के लिए यह समस्या अभी से एक वास्तविकता बन चुकी है।

इस संस्था की फ्रांस में रहने वाली सदस्य कलबा मेडोज ने ईयू की फ्यूचर रिलेशनशिप सेलेक्ट कमेटी को बताया, "हम देख रहे हैं कि लोगों को नौकरियों के इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया जा रहा है, क्योंकि इन नौकरियों के लिए पूरे ईयू में यात्रा करने की आजादी की जरूरत होती है। हम संक्रमण अवधि के अंत में भी नहीं पहुंचे हैं और अभी से लोगों के जीवन और आजीविका के प्रभावित होने के उदाहरण मिलने लगे हैं, और यह केवल बढ़ेगा। कई नौकरियां एकल बाजार के कारण मुक्त आवागमन से जुड़ी होती हैं।"

संस्था के स्पेन में रहने वाले एक अन्य सदस्य माइकल हैरिस ने सांसदों से कहा, "स्पेन में बहुत से सेवानिवृत्त लोग हैं, जिन्हें कहीं जाने और काम करने की जरूरत नहीं है, वे प्रभावित नहीं होंगे। लेकिन, स्पेन में लगभग 60 फीसदी ब्रिटिश नागरिक काम करने वाली उम्र या इससे कम उम्र के हैं। ईयू में युवा ब्रिटिश नागरिक ऐसे लोग हैं, जो कहीं जाकर अध्ययन करने और काम करने के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं।"

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भविष्य के रिश्ते के बारे में हमेशा कहा है कि वे आव्रजन मुद्दों पर ध्यान देंगे। लेकिन, ब्रिटेन में राजनीतिक दबाव के कारण बोरिस जॉनसन सरकार ने मुक्त आवागमन को जारी नहीं रखने का फैसला किया है। किसी भी पक्ष के समझौता मसौदे में मुक्त आवागन के अधिकारों के प्रावधान शामिल नहीं हैं। ब्रिटेन के मसौदा आव्रजन बिल में ऐसी नीतियों के लिए कोई प्रावधान ही नहीं है। अब इसका सीधा असर यूरोप में रहने और नौकरी करने वाले लाखों ब्रिटिश नागरिकों पर पड़ेगा।

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