लद्दाख से लापता आईईएस अधिकारी का अब तक नहीं चला पता, परिवार का आरोप सरकार नहीं दिखा रही दिलचस्पी

जम्मू-कश्मीर के स्थानीय अधिकारियों ने बताया है कि सुबहान अली 22 जून को सड़क दुर्घटना में अपनी जिप्सी समेत खाई में गिर गए थे। उनके साथ पंजाब के पलविन्दर सिंह भी थे। कुछ दिनों बाद जिप्सी तो खाई से बरामद कर ली गई, लेकिन सुबहान और पलविन्दर का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।

फोटोः अफरोज आलम साहिल
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अफरोज आलम साहिल

लद्दाख से गायब हुए अपने आईईएस अधिकारी को भारत सरकार अभी तक ढूंढ़ नहीं पाई है। परिवार का आरोप है कि जम्मू-कश्मीर के कुछ स्थानीय अधिकारियों ने अपने स्तर पर तलाश करने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन भारत सरकार इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।

पिछले 22 जून से आईईएस (भारतीय इंजीनियरिंग सेवा) अधिकारी सुबहान अली लद्दाख से लापता हैं। जम्मू-कश्मीर के स्थानीय अधिकारियों द्वारा इनके परिवार को बताया गया है कि सुबहान 22 जून को एक सड़क दुर्घटना में अपनी जिप्सी समेत खाई में गिर गए थे। उनके साथ पंजाब के पलविन्दर सिंह भी थे। उस वक़्त जिप्सी पलविन्दर ही चला रहे थे। कुछ दिनों बाद जिप्सी तो खाई से बरामद कर ली गई, लेकिन सुबहान और पलविन्दर अभी तक लापता हैं। इनका अब तक कहीं से कोई सुराग नहीं मिला है।

सुबहान अली के बड़े भाई शहबान अली नवजीवन के साथ बातचीत में बताते हैं कि “सुबहान हर रोज शाम में वीडियो कॉल के जरिये घर वालों से बात करता था, लेकिन 22 जून की शाम उसका कॉल नहीं आया। हमें थोड़ी उसकी चिंता हुई तो उसके एक अधिकारी को कॉल किया। उन्होंने किसी और अधिकारी का नंबर दिया, लेकिन उस अधिकारी ने ये कहते हुए बात नहीं की कि हम अपने अधिकारियों की कोई जानकारी शेयर नहीं कर सकते।”

वो आगे बताते हुए कहते हैं, “अगले दिन भी हम परेशान रहे। न सुबहान का कॉल लगा और न ही किसी से कोई जानकारी हासिल हुई। अगली सुबह सुबहान के एक अधिकारी का मोबाईल पर मैसेज आया, जिसमें लिखा था- ‘पॉजीटिव थिंकिंग ये नहीं होती कि जो हो वो अच्छा हो, बल्कि ये भी सोचना चाहिए कि जो हुआ है वो भी अच्छे के लिए हुआ है’…।” ये कहते ही शहबान रो पड़ते हैं।

आगे क्या हुआ पूछने पर अपनी आंखों के आंसू पोछने की कोशिश करते हुए वह बताते हैं, “मैं अपने बहनोई और अपने कजिन के साथ लद्दाख गया। वहां हमें काफी अच्छे से ट्रीट किया गया, साथ ही ये मजबूरी भी बताई गई कि करीब पांच हजार फीट इस गहरे खाई में किसी को ढ़ूंढ़ पाना काफी मुश्किल है। नीचे नदी का पानी काफी ठंडा है, शायद लाश उसके अंदर जम गई होगी। 15-20 दिनों बाद जब बॉडी डिकम्पोज होगी तो वो ऊपर नजर आने लगेगी।” ये कहते हुए शहबान फिर से रो पड़ते हैं।

बता दें कि सुबहान अली उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में कौवापुर कस्बे के जयनगरा गांव के निवासी हैं। उनके पिता रमजान अली कपड़ा सिलने का काम करते हैं। काफी मुश्किलों से अपने दोनों बेटों को पढ़ाया। बड़े बेटे शाहबान इन दिनों दिल्ली के जामिया नगर इलाके में आईएएस मेंटोर नामक कोचिंग चलाते हैं। वहीं, दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया और आईआईटी दिल्ली के छात्र रहे सुबहान ने साल 2018 में यूपीएससी के सिविल इंजीनियरिंग ट्रेड में 24वीं रैंक हासिल की थी।

इसके बाद अप्रैल 2020 में उनकी तैनाती रक्षा मंत्रालय में सिविल इंजीनियर पद पर लेह में कर दी गई। वहां सुबहान भारत-चीन सीमा पर मीना मार्ग से द्रास तक सड़क निर्माण का निरीक्षण कार्य देख रहे थे। लेकिन ये काम फिलहाल बंद होने की वजह से इनकी ड्यूटी कारगिल क्षेत्र में बने लद्दाख के क्वारंटाइन सेंटर में लगा दी गई थी, जहां बाहर से आए करीब 700 मजदूरों को क्वारंटाइन किया गया था।

बताया जाता है कि 22 जून को सुबहान भारत-चीन सीमा पर सड़क का निरीक्षण करने गए थे। निरीक्षण के दौरान उनकी जिप्सी अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई। जिप्सी को तो सेना के जवानों ने खोज निकाला है, लेकिन सुबहान और ड्राईवर पलविन्दर सिंह का पता अभी तक नहीं चल सका है।

इस घटना के बाद सुबहान के परिजनों का बुरा हाल है। परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सुबहान 23 जून को वहां से अपने घर उत्तर प्रदेश के लिए निकलने वाले थे। क्योंकि 27 जुलाई को सुबहान की शादी तय थी। इसके पहले इनकी शादी की तारीख अप्रैल में रखी गई थी, लेकिन लॉकडाउन की वजह उस तारीख को आगे बढ़ा दिया गया था।

फिलहाल शाहबान अली अपने भाई की वर्दी के साथ शुक्रवार को लद्दाख से वापस दिल्ली लौट आए हैं। आज सुबह वो अपने घर के लिए निकले हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद अभी भी उनका भाई जिंदा है और वो वापस जरूर लौटेगा। नहीं तो भारत सरकार का रक्षा मंत्रालय उनके भाई की लाश उनके परिवार वालों को सौंपे।

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