वोट के अधिकार को छीनने पर उतारू मोदी सरकार अब जीने के अधिकार को भी खत्म करना चाहती हैः खड़गे
खड़गे ने कहा कि सत्ता में रहकर इन दिनों धरना दे रही बीजेपी और मोदी जी को बेतुकी भाषणबाजी से समय मिले तो 2014 से पहले ‘बहुत हुई महंगाई की मार’ वाला बीजेपी का विज्ञापन भी दोबारा देख लें। उन्होंने कहा कि अच्छे दिन की उम्मीद में जनता ने 12 साल गंवा दिए हैं।

खड़गे ने कहा कि सरकार को आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए
सरकार रोजगार के अवसर बढ़ाए और महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाए
वोट के अधिकार को छीनने पर उतारू मोदी सरकार अब जीवन जीने के अधिकार को भी खत्म करना चाहती है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बढ़ती महंगाई, कर्ज और घटती आमदनी को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए और रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘वोट के अधिकार को छीनने पर उतारू मोदी सरकार अब जीवन जीने के अधिकार को भी खत्म करना चाहती है।’’
कमरतोड़ महंगाई लोगों की कमाई प्रभावित कर रही है
खड़गे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि त्योहारों के बीच ‘‘कमरतोड़ महंगाई’’ लोगों की कमाई को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कुछ आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि खाद्य महंगाई 2.13 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई है, घरेलू कर्ज 36.7 प्रतिशत बढ़ा है और घरेलू वित्तीय बचत में चार प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत और थोक महंगाई 11.39 प्रतिशत होने का भी दावा किया।
अच्छे दिन की उम्मीद में जनता ने 12 साल गंवा दिए
कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘सत्ता में रहकर इन दिनों धरना दे रही बीजेपी और मोदी जी को बेतुकी भाषणबाजी से कभी समय मिले तो 2014 से पहले ‘बहुत हुई महंगाई की मार’ वाला बीजेपी का विज्ञापन भी दोबारा देख लें।’’ उन्होंने दावा किया कि ‘‘अच्छे दिन’’ की उम्मीद में जनता ने 12 साल गंवा दिए हैं।
इससे पहले, पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि केंद्र सरकार महंगाई की वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को ‘‘तोड़-मरोड़कर’’ पेश कर रही है और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का सबसे अधिक खामियाजा युवाओं तथा मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ती महंगाई, बढ़ता कर्ज, घटती कमाई, मोदी सरकार में मध्यम वर्ग के हिस्से आई सिर्फ तबाही।’’
युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित
रमेश ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति और रोजगार के घटते अवसरों से युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, कंपनियां पहले की तुलना में कम भर्तियां कर रही हैं और कई लोगों की वर्षों पुरानी नौकरियां भी जा रही हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि महंगाई की तुलना में आमदनी और बचत घट रही है, जबकि परिवारों पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वेतन या तो ठहरा हुआ है या महंगाई को ध्यान में रखने पर लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति कम हुई है। रमेश ने दावा किया कि एक ओर अमीरों की संपत्ति और कॉरपोरेट मुनाफा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति को नहीं छिपा सकते
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विषम आर्थिक परिस्थितियों में परिवार अपनी बचत खर्च करके गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का हवाला देकर जमीनी वास्तविकता को नकार रही है। उन्होंने कहा, ‘‘जीडीपी के आंकड़े कभी यह नहीं बताते कि विकास का लाभ किसे मिल रहा है और आम आदमी की जिंदगी कितनी बेहतर हो रही है।’’
रमेश ने दावा किया कि जब आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों के पास सिमटता जाए तथा आम परिवार महंगाई, कर्ज और घटती बचत के दबाव में हों, तो जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति को नहीं छिपा सकते। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का दावा तभी सार्थक है जब उसका लाभ आम आदमी तक पहुंचे। रमेश ने यह भी कहा, ‘‘हमारी स्पष्ट मांग है कि सरकार आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करे, रोजगार के अवसर बढ़ाए और महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाए।’’
