बिना ‘बड़ों’ के शामिल हुए, नीट पेपर लीक होना नहीं आसान
सवाल उठता है कि आखिर परीक्षाओं के पेपर बार-बार लीक क्यों हो रहे हैं?

सीबीआई द्वारा 13 मई को राजस्थान के रामगढ़ से भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला सचिव दिनेश बिलवाल और उनके भाई मंगिलाल बिलवाल की गिरफ्तारी ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इन दोनों पर नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक में कथित तौर पर शामिल होने का आरोप है। राजस्थान में विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि ये दोनों भाई एक बड़े नेटवर्क में बिचौलिये के तौर पर काम कर रहे थे, जिसमें प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं। इस विवाद के कारण 3 मई को हुई नीट परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है।
देश भर के 5,432 केन्द्रों पर आयोजित इस प्रतिष्ठित और सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। नीट-यूजी देश के मेडिकल कॉलेजों में 1.3 लाख मेडिकल सीटों पर दाखिले का जरिया है, और इस परीक्षा का आयोजन करने वाली ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ को केवल फीस से ही 1,300 करोड़ रुपये की कमाई होती है।
जांचकर्ताओं को शक है कि प्रश्न पत्र 15 लाख रुपये में बेचा गया था। राजस्थान का स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) उन रिपोर्टों की जांच कर रहा है, जिनमें कहा गया है कि एक हाथ से लिखा हुआ ‘गेस पेपर’ वाट्सएप ग्रुप्स के जरिये छात्रों में बांटा गया था। एसओजी के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 100 से ज्यादा सवाल असल टेस्ट पेपर में आए थे। आरोप है कि यह दस्तावेज टेस्ट से 15 दिन पहले ही छात्रों के बीच बांटा जा रहा था।
जांच में इस कथित ‘गेस पेपर’ का संबंध राजस्थान के चुरू के एक एमबीबीएस छात्र से जुड़ा है, जो फिलहाल केरल में पढ़ाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि उसने 1 मई को यह दस्तावेज अपने पिता को भेजा था, जो सीकर में ‘पेइंग गेस्ट’ आवास चलाते हैं। पिता ने इन सवालों को अपने राजनीतिक संपर्कों और छात्रों को ‘बेच’ दिया। इसके बाद यह दस्तावेज कोचिंग नेटवर्क और मैसेजिंग ऐप्स के जरिये बड़े पैमाने पर फैला दिया गया।
हालिया प्रकरण ने एक बार फिर सीकर के तेजी से बढ़ते कोचिंग हब को चर्चा में ला दिया है। करियर्स 360 के संस्थापक महेश्वर पेरी ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि सीकर एक ऐसे बड़े नेटवर्क का केन्द्र है, जो ऐसे कामों के लिए बदनाम है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में नीट में सफलता की दर राष्ट्रीय औसत से छह गुना ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीकर में छात्रों को परीक्षा से एक दिन पहले ‘मॉक टेस्ट’ के लिए बुलाया गया और उन्हें इन्हीं खास सवालों पर कोचिंग दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में भी ऐसे ही आरोप सामने आए थे, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।
शिक्षाविदों का कहना है कि नेताओं, कोचिंग सेंटरों और नौकरशाही के नेटवर्क के बीच गहरा गठजोड़ है। एक शिक्षाविद ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि लीक हुआ प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही बड़े पैमाने पर फैला दिया गया था और इसने ‘सोशल मीडिया पर हंगामा’ मचा रखा था।
क्या यह अजीब नहीं कि इसके बाद भी एनटीए को इसका पता नहीं चल पाया? एनटीए महानिदेशक डॉ. अभिषेक सिंह, जो खुद एक आईटी विशेषज्ञ हैं और जिन्हें अभी दो महीने पहले ही प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया था, ने एजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि जैसे ही इस बात के सबूत मिले कि कुछ प्रश्न 3 मई से पहले ऑनलाइन शेयर किए जा रहे एक पीडीएफ से मेल खा रहे हैं, परीक्षा को तुरंत रद्द कर दिया गया।
सिंह ने कहा, ‘केन्द्रीय एजेंसियों से हमें पता चला कि कुछ सवाल एक पीडीएफ से मेल खाते थे, जो परीक्षा से पहले ही सर्कुलेट हो रहा था। इसी आधार पर, हमने अपनी ‘जीरो-एरर, जीरो-टॉलरेंस’ नीति के सिद्धांत के तहत परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।’
जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या नीट का असली पेपर सीधे नासिक की उस प्रिंटिंग फैसिलिटी से लीक हुआ, जहां इस साल के पेपर प्रिंट किए गए थे? यह पेपर लीक के पिछले मामलों से अलग है जो आमतौर पर ट्रांसपोर्टेशन या डिस्ट्रीब्यूशन के दौरान होते थे।
सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक डीआईजी शांतनु सेन (सेवानिवृत्त) ने कहा, ‘पेपर लीक ज्यादातर उस जगह से होता है जहां पेपर सेट किया जाता है या फिर उस जगह से जहां उसे प्रिंट किया जाता है। अपनी 33 साल की सेवा के दौरान, हमने यूपीएससी के एक पेपर लीक मामले की जांच की। हमने उस मामले को 15 दिनों के भीतर सुलझा लिया था। उस लीक के लिए प्रिंटिंग प्रेस का सुपरिटेंडेंट ही जिम्मेदार था। हालांकि, पिछले सात सालों में बड़ी परीक्षाओं के 70 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं।’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी बार-बार पेपर लीक होने के मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘दस सालों में 89 बार पेपर लीक हुए हैं और 48 बार दोबारा परीक्षा हुई। हर बार वही वादे किए जाते हैं, और उसके बाद वही गहरी चुप्पी छा जाती है।’ राहुल ने इस बात पर भी चिंता जताई कि एनटीए के पूर्व महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह, जिन्हें नीट 2024 में बड़ी गड़बड़ियों के बाद पद से हटा दिया गया था, अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं।
इस बात पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि एनटीए, जिसे केन्द्र सरकार से कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती, वह छात्रों से फीस के तौर पर जमा की गई रकम से अपने प्रशासनिक खर्चों को कैसे पूरा करता है। राज्यसभा की एक समिति की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि एनटीए ने हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की। 31 जुलाई 2024 को राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री सुकांत मजूमदार ने एनटीए की स्थापना (2018) से लेकर अब तक की आय और व्यय का वर्ष-वार ब्योरा पेश किया, जिसमें पिछले छह वर्षों में 488 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया गया है।
3 मई को परीक्षा देने वाले 20 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए, परीक्षा का रद्द होना बहुत बड़ा सदमा है, खासकर यह देखते हुए कि उन्होंने इसके लिए महीनों तैयारी की थी। जो छात्र वंचित समुदायों से आते हैं, उनके लिए यह अनुभव और भी तकलीफदेह है, क्योंकि उनके परिवारों ने महंगी कोचिंग और ट्यूशन के लिए बड़ी कुर्बानियां दीं।

12 मई को परीक्षा रद्द करने की घोषणा करते हुए एनटीए ने बताया कि परीक्षा दोबारा ली जाएगी, जिसके लिए छात्रों को न तो नए सिरे से रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और न ही कोई परीक्षा शुल्क देना होगा। छात्रों द्वारा जमा किया गया परीक्षा शुल्क उन्हें वापस कर दिया जाएगा।
विडंबना है कि एनटीए का दावा है कि यह परीक्षा ‘पूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल’ के तहत आयोजित की जाती है, जिसमें प्रश्न पत्रों की जीपीएस-ट्रैकिंग, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, एआई की मदद से सीसीटीवी मॉनीटरिंग और 5 जी जैमर लगाना शामिल है। इस साल परीक्षा देने वाले दिल्ली के छात्र निखिल मल्होत्रा सवाल करते है, ‘अगर सुरक्षा इतनी ही पुख्ता है, तो फिर लीक कैसे हुआ?’
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