RBI मॉनिटरी पॉलिसी: सस्ती ईएमआई के लिए आम लोगों को करना होगा इंतजार , ब्याज दरों में नहीं हुआ कोई बदलाव

रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष यानी 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी 10.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना का प्रसार बढ़ने के बावजूद इकोनॉमी में सुधार हो रहा है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक खत्म हो गई जिसके बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस बैठक के नतीजों की घोषणा की। भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसकी वजह से लोन की ईएमआई पर और राहत नहीं मिलेगी। आपको बत दें, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 4 फीसदी पर बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि MPC की तीन दिन की बैठक 5 अप्रैल को शुरू हुई थी। रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष यानी 2021-22 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी 10.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना का प्रसार बढ़ने के बावजूद इकोनॉमी में सुधार हो रहा है। हालांकि हाल में जिस तरह से मामले बढ़े हैं, उससे थोड़ी अन‍िश्चिचतता बढ़ी है, लेकिन भारत चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि फरवरी में खुदरा महंगाई 5 फीसदी की ऊंचाई पर रहने के बावजूद यह रिजर्व बैंक के सुविधाजनक सीमा के दायरे में है।

रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर बरकरार रखा है। बैंक रेट भी 4.25 फीसदी पर यथावत है। आपको रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को रिजर्व बैंक से उधार मिलता है, जबकि रिवर्स रेपो दर वह रेट होती है, जिस पर रिजर्व बैंक अपने पास बैंकों द्वारा पैसा जमा करने पर बैंकों को ब्याज देता है। इसके अलावा इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक रुख को 'उदार' बनाए रखा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी में 10.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। आपको बता दें, पिछली बैठक में भी जीडीपी में 10.5 फीसदी की तेजी का ही अनुमान लगाया गया था। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 22.6 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 8.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 5.4 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.2 फीसदी।

शक्तिकांत दास ने कहा मुद्रास्फीति पर दास ने कहा कि, वित्त वर्ष 2022 में सीपीआई 5.1 फीसदी रह सकती है। पहली और दूसरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 5.20 फीसदी रह सकती है। चौथी तिमाही में यह पांच फीसदी हो सकती है।

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