मध्य प्रदेश में कोरोना की स्थिति हुई भयावह, पूर्ण लॉकडाउन की तरफ तेजी से बढ़ रहे हालात

राज्य में आज एक दिन में मरीजों की संख्या चार हजार पार कर गई। सबसे बुरी स्थिति जबलपुर, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन के हैं। 12 जिले ऐसे हैं जहां हर रविवार को पूर्णबंदी रहेगी। इसके अलावा जहां ज्यादा जरुरत है वहां दो दिन की पूर्ण बंदी भी की जा सकती है।

फाइल फोटः IANS
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नवजीवन डेस्क

मध्य प्रदेश में कोरोना की स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है, सरकार से लेकर कई जिलों का प्रशासन चिंतित है, अस्पतालों में मरीजों को वह सुविधाएं आसानी से नहीं मिल पा रही हैं, जिनकी जरुरत है। यही कारण है कि राज्य के 12 जिलों में रविवार की पूर्णबंदी को यथावत रखा गया है तो कई अन्य जिलों में भी पूर्णबंदी की तैयारी है। इतना ही नहीं कई जिलों में तो सप्ताह में दो दिन की पूर्णबंदी हो सकती है।

राज्य में बुधवार को एक दिन में मरीजों की संख्या चार हजार को पार कर गई। सबसे बुरे हालात इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन के हैं। राज्य में 12 जिले ऐसे हैं जहां हर रविवार को पूर्णबंदी रहेगी। इसके साथ ही सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि जहां ज्यादा जरुरत है वहां एक दिन नहीं दो दिन की पूर्णबंदी की जा सकती है।

राज्य सरकार द्वारा जनजागृति अभियान भी चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों में जागृति लाने के मकसद से 24 घंटे का स्वास्थ्य आग्रह किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के संबंध में जन-जागृति के लिए आरंभ किए गए 'स्वास्थ्य आग्रह' अभियान को मिले जनसमर्थन से मैं अभिभूत हूं। यह युद्ध समाज के सहयोग के बिना नहीं लड़ा जा सकता। राज्य शासन हरसंभव व्यवस्थाएं कर रहा है, पर समाज का सहयोग आवश्यक है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन अंतिम उपाय है। देश-दुनिया सहित मध्य प्रदेश में भी कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राज्य सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है, नियंत्रण के हरसंभव प्रयास जारी हैं। जिलों के आपदा प्रबंधन समूह स्थानीय परिस्थितियों के संबंध में चौकस हैं। आवश्यकता होने पर स्थिति पर नियंत्रण के लिए अंतिम विकल्प के रूप में लॉकडाउन लगाने या बढ़ाने के संबंध में विचार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हम सभी को मिलकर जनता तक ये संदेश पहुंचाना है और स्वयं भी इसका पालन करना है कि 'मास्क नहीं तो बात नहीं', 'मास्क नहीं तो सामान नहीं' और 'मास्क नहीं तो आना-जाना नहीं'। मुख्यमंत्री चौहान ने स्वास्थ्य सेवाओं में की जा रही बढ़ोत्तरी का जिक्र करते हुए कहा, कोविड मरीजों के लिए उपलब्ध बिस्तरों की संख्या को 24 हजार से बढ़ाकर 36 हजार की जायेगी। कोविड मरीजों के निशुल्क इलाज के लिए उपलब्ध बिस्तरों की संख्या को बढ़ाकर 15 हजार किया जायेगा।

राज्य के कई हिस्सों में कोविड के उपचार में मददगार रेमिडीसिवर इंजेक्शन आसानी से सुलभ नहीं हो पाने पर शासकीय स्तर पर रेमिडीसिवर इंजेक्शन खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। गरीब और मध्यम वर्ग को यह इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य के कई हिस्सों में मास्क, ऑक्सीजन, दवाएं आदि की कालाबाजारी और अनावश्यक मूल्य वृद्धि की शिकायतों पर सरकार ने कहा है कि इसको रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। होम आइसोलेटेड मरीज घर के बाहर न निकलें और प्रोटोकाल का पालन करें, इसकी सख्त व्यवस्था बनाई जाएगी।

एक तरफ जहां सरकार कोरोना से निपटने के इंतजाम बेहतर होने का दावा कर रही है, वहीं विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने उपचार सुविधाएं न होने का हवाला देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सरकार की लापरवाही की वजह से कोरोना काल में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है, जिस वजह से मरीजों की मौत हो रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2020 में घोषणा की थी कि होशंगाबाद जिले के बाबई में छह महीने के अंदर 200 टन का ऑक्सीजन प्लांट बनाया जाएगा, जो प्रदेश की ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए पर्याप्त होता है, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार की घोर लापरवाही रही और छह महीने में ऑक्सीजन प्लांट कागजों से बाहर नहीं निकल पाया, आज अगर वह ऑक्सीजन प्लांट चालू हो गया होता तो मध्य प्रदेश ऑक्सीजन की कमी नहीं होती, प्रदेश में लगातार ऑक्सीजन की कमी हो रही है इसके लिए पूरी तरह राज्य की भाजपा सरकार की लापरवाही जिम्मेदार है।

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