ज्ञानवापी पर असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर का आया बयान, बताया- अदालत में कब तक पेश की जाएगी सर्वे रिपोर्ट

असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह के बयान से साफ हो गया है कि सर्वे रिपोर्ट को कोर्ट से में पेश करने में 2 से 3 दिन तक समय और लग सकता है। इधर, सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष द्वारा सर्वे को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई होनी है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में हिंदू पक्ष द्वारा शिवलिंग मिलने के दावे के बाद सर्वे की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को लेकर असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह का बयान आया है। उन्होंने बताया कि कब तक सर्वे की रिपोर्ट नचली अदालत में पेश की जा सकती है। ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे रिपोर्ट पर असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने कहा, “हमारी रिपोर्ट 50 फीसदी तक तैयार हो गई है। रिपोर्ट पूरी तैयार नहीं है, इसलिए आज कोर्ट में प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे। हम कोर्ट में एप्लिकेशन देकर समय की मांग करेंगे। 2-3 दिन का समय मांगेंगे।”

असिस्टेंट कोर्ट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह के बयान से साफ हो गया है कि सर्वे रिपोर्ट को निचली अदालत से में पेश करने में दो से तीन दिन तक समय और लग सकता है। इधर, सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष द्वारा सर्वे को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई होनी है। याचिका में सर्वे पर रोक लगाने की मांग की गई है। ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने का आदेश दिया तो सर्वे अधर में लटक सकता है।

वहीं, ज्ञानवापी सर्वे पर न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष सहायक आयुक्त एडवोकेट विशाल सिंह ने कहा, “मैंने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी है। समय के अंतर्गत रिपोर्ट को कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। अगर देरी होती है तो देखा जाएगा।”

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी स्थल के वीडियोग्राफी सर्वे के आदेश को मस्जिद कमिटी ने चुनौती देते हुए कहा है कि ज्ञानवापी की वीडियोग्राफी कराने का आदेश 1991 के पूजास्थल कानून के प्रावधानों के खिलाफ है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच इस पर आज सुनवाई कर सकती है।

क्या है पूजास्थल कानून?

1991 में बने पूजास्थल कानून (विशेष प्रावधान) के मुताबिक, पूजा स्थलों की जो स्थिति 15 अगस्त 1947 को थी, वही कायम रहेगी। सिर्फ अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले को ही इस कानून से छूट दी गई है। कानून क के अनुसार, अयोध्या मामले के अलावा किसी अन्य पूजास्थल का धार्मिक स्वरूप बदलने की मांग करते हुए कोर्ट में मामला नहीं चलाया जा सकता। हालांकि इस कानून की वैधानिकता को चुनौती सुप्रीम कोर्ट में पहले ही दी जा चुकी है, जिस पर सुनवाई होनी है।

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Published: 17 May 2022, 10:09 AM