'FCRA संबंधी JPC में हितधारकों से सार्थक परामर्श नहीं हो रहा', वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा पत्र

वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि अगर विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराया जाता है तो यह उस उद्देश्य को विफल कर देगा जिसके लिए सदन ने विधेयक को जेपीसी के पास भेजा था और इससे महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

FCRA संबंधी JPC में हितधारकों से सार्थक परामर्श नहीं हो रहा, वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा पत्र
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  • एफसीआरए को लेकर कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा

  • संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में हितधारकों से कोई सार्थक परामर्श नहीं करने का आरोप

  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला से हस्तक्षेप का आग्रह

कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने बृहस्पतिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए) पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में हितधारकों से कोई सार्थक परामर्श नहीं हो रहा है और आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार द्वारा विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने की मंशा दिखाई पड़ती है।

उन्होंने इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष बिरला से हस्तक्षेप का आग्रह किया।

वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि अगर विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराया जाता है तो यह उस उद्देश्य को विफल कर देगा जिसके लिए सदन ने विधेयक को जेपीसी के पास भेजा था और इससे महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

उन्होंने कहा कि विधेयक 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसके प्रावधानों को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी।

पत्र में कहा गया है कि प्रस्तावित प्रावधान गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), अल्पसंख्यक संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों, अनाथालयों और धर्मार्थ संस्थाओं को प्रभावित कर सकते हैं।


कांग्रेस नेता ने कहा कि विधेयक में विदेशी अंशदान प्राप्त करने पर रोक का दायरा ‘‘किसी भी व्यक्ति’’ तक बढ़ाने तथा पंजीकरण रद्द या नवीनीकृत नहीं होने की स्थिति में किसी संगठन की धनराशि और संपत्तियां सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को हस्तांतरित करने जैसे प्रस्तावों को लेकर चिंता है।

उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 12 अगस्त, 2026 को लोकसभा ने विधेयक को 31 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा था और इस कदम का उद्देश्य व्यापक विचार-विमर्श और गहन जांच सुनिश्चित करना था।

वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि समिति सभी प्रभावित हितधारको, एनजीओ, धर्मार्थ संस्थाओं, धार्मिक निकायों, स्वैच्छिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और राज्य सरकारों से विचार एवं सुझाव प्राप्त करे।

उन्होंने तीन मांगें भी रखीं। इनमें समिति द्वारा सार्वजनिक सूचना के माध्यम से लिखित ज्ञापन आमंत्रित करना और सभी प्रभावित पक्षों से मौखिक साक्ष्य लेना शामिल है।

उन्होंने समिति को इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय देने तथा जरूरत पड़ने पर उसकी रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा बढ़ाने का भी आग्रह किया।

वेणुगोपाल ने कहा कि समिति के सदस्यों को विधेयक के प्रत्येक प्रावधान पर विस्तार से विचार करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए और समिति की व्यापक जांच पूरी होने से पहले विधेयक को सदन में नहीं लिया जाना चाहिए।

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