तालिबान की जीत के साथ भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तानी लॉन्च पैड में बढ़ी हलचल, खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर

सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सूत्र ने कहा कि इस बात के संकेत मिले हैं कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को धकेलने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अफगानिस्तान पर तालिबान के पूर्ण रूप से कब्जा करने के तुरंत बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन भी हरकत में आ गए हैं। इस बीच, खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी लॉन्च पैड पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

देश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "इस बात के संकेत मिले हैं कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों ने तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को धकेलने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।"

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में सीमा के पास स्थित लॉन्च पैड में गतिविधियां तेज हो गई हैं, जो घुसपैठ की योजना में वृद्धि का संकेत देता है। इस साल फरवरी में युद्धविराम की घोषणा के बाद इन लॉन्च पैड्स को छोड़ दिया गया था। इनपुट के अनुसार, लगभग 300 आतंकवादियों ने फिर से नियंत्रण रेखा के पार शिविरों पर कब्जा कर लिया है। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने कहा, "हम भी अलर्ट पर हैं और तैयार हैं।"

सुरक्षा एजेंसियों के पास यह भी इनपुट है कि ये आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि भारतीय सुरक्षा बल वहां आतंकवादियों को बेअसर कर रहे हैं और उनके नापाक मंसूबों को निष्क्रिय किया जा रहा है और आतंकियों को कड़ा जवाब दिया जा रहा है।


सूत्र ने आगे कहा, "जिस तरह से अल कायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन तालिबान के नेताओं को बधाई दे रहे हैं, उससे पाक स्थित आतंकी कैडर का मनोबल बढ़ा है।" सूत्र ने आगे कहा कि मल्टी-एजेंसी सेंटर द्वारा एकत्र किए गए इनपुट के साथ विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्राप्त इनपुट की पुष्टि की गई है।

ये आतंकी संगठन अफगानिस्तान में तालिबान की जीत से प्रोत्साहित हैं और सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों ने जम्मू-कश्मीर में कुछ वर्गों को भी प्रभावित किया है। जम्मू-कश्मीर में स्थानीय युवाओं की आतंकवादी रैंक में भर्ती सुरक्षा बलों के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि पिछले साल की तुलना में आतंकी समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या काफी कम है, लेकिन अफगानिस्तान की घटनाएं परिदृश्य को बदल सकती हैं।

एक अधिकारी के अनुसार, अब तक केवल 87 युवा जम्मू-कश्मीर में आतंकी समूहों में शामिल हुए हैं, जिनकी संख्या पिछले साल 137 थी। जम्मू-कश्मीर में काउंटर टेरर ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घाटी के लगभग 70 युवा लापता हो गए हैं और उन्हें आशंका है कि वे आतंकी संगठनों में शामिल हो सकते हैं।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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