इस सरकार के गलत कामों पर जो लोग खामोश हैं, इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगाः प्रकाश राज

अभिनेता प्रकाश राज का कहना है कि आज फासीवाद अपने चरम पर है और सत्ता पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए सत्ता में बैठे लोग बुरी तरह से हताश हैं। उन्होंने कहा कि फासीवादी ताकतों का मुखौटा उतर रहा है और लोगों के सामने उनकी असलियत जाहिर हो रही है।

फोटोः सोशल मीडिया
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भाषा सिंह

अभिनेता प्रकाश राज दक्षिण भारत की फिल्मों समेत हिंदी फिल्मों का जाना-पहचाना नाम हैं। अपने अभिनय से उन्होंने बॉलीवुड समेत कई भाषाओं की फिल्मों में अपनी खास पहचान बनाई है। अभिनय के साथ ही प्रकाश राज सामाजिक मुद्दों और मानवाधिकार जैसे विषयों को लेकर भी शुरू से मुखर रहे हैं। लेकिन अपनी दोस्त और निर्भीक पत्रकार गौरी लंकेश की पिछले साल हुई हत्या के बाद से उन्होंने फासीवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। इसी कड़ी में बीते दिनों दिल्ली में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा पर आयोजित एक राष्ट्रीय सेमीनार में उन्होंने हिस्सा लिया।नवजीवन के लिए भाषा सिंह ने उनसे बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश:

देश के वर्तमान हालात को आप किस तरह देखते हैं और इसमें खुद को आप कहां खड़ा पाते हैं?

मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे लिए आज आवाज उठाना बहुत जरूरी है। आज के दौर में जब फासीवाद अपने चरम पर है और वे लोग अपने विभिन्न एजेंडों के साथ सत्ता पर अपनी पकड़ को बरकरार रखने के लिए बुरी तरह हताश हैं, ऐसे में मैं उन्हें हारते हुए देख रहा हूं, उनकी असलियत जाहिर होते हुए देख रहा हूं, मुझे लगता है कि उनका मुखौटा उतर रहा है और लोग उन्हें पहचान रहे हैं। मैं ये कहना चाहता हूं कि मैं लोगों को बदहाली में देख रहा हूं। डेमोक्रेटिक स्पेस तेजी से कम होता जा रहा है। एक नागरिक के रूप में मैं इसे लेकर परेशान हूं, मुझे चिंता है और इसे बदलने के लिए मैं अपनी आवाज उठा रहा हूं।


क्या आपकी चुनावी राजनीति में दिलचस्पी है, इस बारे में बहुत सारी बाते सुनने में आ रही हैं?

मैं वही रहना चाहता हूं जो मैं हूं। मैं एक निर्भीक नागरिक बनना चाहता हूं। मैं खुद को इस परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में देखता हूं। मुझे इस बात का पूरा यकीन है कि इन लोगों को सत्ता से बाहर करने के लिए मुझे चुनावी व्यवस्था में आने की जरूरत नहीं है। मेरा मानना है कि कई सारे बहुतअहम लोग हैं और मुझे लगता है कि ये लोग सत्ता से बाहर जा रहे हैं। यह सरकार अपनी जमीन खो रही है।

हॉलीवुड के अभिनेता राजनीतिज्ञों के खिलाफ बहुत मजबूत राजनीतिक स्टैंड ले रहे हैं, खासतौर पर वे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ बहुत मुखर हैं। लेकिन हमें यहां इस तरह की आवाजें देखने को नहीं मिलती हैं, क्यों?

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने संवेदनशील हैं और समाज को लेकर आपकी चिंताएं कितनी गहरी हैं, जिनके आधार पर आप एक कलाकार बने हैं। बाकी सभी की तुलना में मैं थियेटर और साहित्य की पृष्ठभूमि से आया हूं। मैं कर्नाटक के कुछ विशिष्ट आंदोलनों से निकला हूं। इन सबसे ऊपर एक कलाकार होने के नाते मेरा विवेक कहता है कि जब भी आवाजों को कुचलने वाली शक्तियां सामने आएं, मुझे आवाज उठानी चाहिए।

बॉलीवुड में कई कारण हैं, जिनकी वजह से वे चुप हैं। मैं उनकी मजबूरी समझ सकता हूं। वास्तविकता से जुड़ने के लिए वे पर्याप्त संवेदनशील नहीं हैं या उन्हें नहीं किया गया है। जब अधिकांश सितारे आवाज नहीं उठाते हैं तब हमें मानना चाहिए कि वे एक मिथक में जी रहे हैं। जिन्होंने आज आवाज नहीं उठाई है, उन्हें उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी जब परिवर्तन होगा। तब लोग उनसे पूछेंगे कि उन्होंने तब आवाज क्यों नहीं उठाई। इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा। जो लोग बोल सकते हैं, उन्हें बोलना चाहिए। वक्त इसके पीछे की वजह को सबके सामने लाएगा। कुछ गड़े मुर्दे बाहर आएंगे और कहेंगे कि इसमें उन सबके अपने निहित स्वार्थ थे।


आपके जीवन का वह मोड़ क्या था या ये पूछा जा सकता है कि आपका मिथक कब टूटा...?

मैं विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से बात कर रहा था, लेकिन गौरी लंकेश की हत्या ने मुझे वास्तव में परेशान कर दिया। हम पिछले 35 सालों से दोस्त थे। गौरी के पिता हमारे शिक्षक थे। जब मौत आपके दरवाजे पर आ गई हो तो आप यह नहीं कह सकते कि सब कुछ ठीक है। और जब मैंने बोला, मैंने सवाल करने शुरू किये, तो मुझ पर किस तरह का हमला हुआ, वह अद्भुत था। तब मुझे ये एहसास हुआ कि अब तक मैं एक अभिनेता के मिथक में जी रहा था और सोचता था कि प्रशंसक हैं, लोग मुझे पसंद करते हैं, चाहते हैं। तब मैंने सोचा ही नहीं कि वहां कोई बड़ी समस्या है। मैंने उसे आते हुए देखा और मुझे खुद को जवाब देना पड़ा। और मैं वह अभी भी कर रहा हूं। यह मेरे लिए महत्वपूर्ण है, बहुत महत्वपूर्ण है।

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