TMC नेता और बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी की मौत, पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला शव
बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव TMC कार्यालय में मिला। पुलिस कथित सुसाइड नोट और मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी का शव रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मिला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शव पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। उनके आवास के पास स्थित इस कार्यालय से एक पृष्ठ का कथित सुसाइड नोट भी बरामद होने की बात सामने आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मौत की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा है?
सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित सुसाइड नोट में लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। इसमें आशीष बनर्जी ने राजनीति में आने पर अफसोस जताने की बात भी कही है। कथित पत्र में उन्होंने दावा किया कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी लिखा कि पार्टी के भीतर होने वाले कुछ ‘‘गलत कार्यों’’ को वह स्वीकार नहीं कर पाते थे, लेकिन उनका विरोध भी नहीं कर सके।
कथित सुसाइड नोट में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (TRDA) का भी उल्लेख है। इसमें दावा किया गया है कि प्राधिकरण की निविदाओं से जुड़े फैसलों, चेक जारी करने, योजनाओं को मंजूरी देने या अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। पत्र में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि उन्हें बदनाम और अपमानित करने की कोशिश की गई और उन्हें लगता था कि राजनीति में आना उनकी भूल थी।
2001 से लगातार रामपुरहाट सीट का प्रतिनिधित्व
आशीष बनर्जी छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े रहे थे और उन्होंने शिक्षक के तौर पर भी काम किया था। वह 2001 से 2026 तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व करते रहे। अपने राजनीतिक जीवन में वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार में स्कूली शिक्षा और कृषि समेत कई विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। कथित सुसाइड नोट में उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में नहीं आने की सलाह देने और अपने विद्यार्थियों से मिले स्नेह को याद करने की बात भी कही है।
चुनाव हारने के बाद राजनीति में कम सक्रिय थे
आशीष बनर्जी ने 2026 का विधानसभा चुनाव रामपुरहाट सीट से TMC के टिकट पर लड़ा था, लेकिन बीजेपी के ध्रुव साहा से 24 हजार से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में हार के बाद वह राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं थे। इससे पहले बीरभूम की राजनीति में वह एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे थे। तृणमूल कांग्रेस के नेता अनुब्रत मंडल के जिलाध्यक्ष रहने के दौरान भी आशीष बनर्जी जिले में पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।
इस साल विधानसभा चुनाव में 15 साल के TMC शासन के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। राज्य की बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बीच TMC के कई पूर्व नेताओं और विधायकों को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आशीष बनर्जी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उन्होंने आत्महत्या की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कथित सुसाइड नोट और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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