मणिपुर के उखरुल में दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या, जातीय तनाव फिर भड़कने की आशंका

कुकी-जो काउंसिल ने उखरुल में हुई हत्या की घटना में कुकी-जो समुदाय की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। परिषद ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी भी कुकी-जो व्यक्ति या समूह का कोई हाथ नहीं है और इस संबंध में फैलाई जा रही खबरें निराधार हैं।

मणिपुर के उखरुल में दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या, जातीय तनाव फिर भड़कने की आशंका
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नवजीवन डेस्क

मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच शनिवार को उखरुल जिले में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने गोलीबारी कर दो नागा नागरिकों की हत्या कर दी। नागा समूह ने घटना के लिए कूकी उग्रवादियों को जिम्मेदार बताया है। वहीं कूकी-जो संगठनों ने समुदाय की संलिप्तता से इनकार किया है। इस घटना को लेकर राज्य में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है।

यह घटना इम्फाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच- 2) पर उस समय हुई जब वाहन उखरुल की ओर जा रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतकों की पहचान चीनाओशांग शोखवुंगनाओ (45) और यारुइंगम वाशुम (42) के रूप में हुई है। शोखवुंगनाओ ताशर गांव के निवासी थे और वे नागा रेजिमेंट से सेवानिवृत्त सेना कर्मी रूइचुमहाओ शोखवुंगनाओ के पुत्र थे, जबकि वाशुम खरासोम गांव के निवासी थुइमी वाशुम के पुत्र थे। घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए हैं और हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।


तांगखुल नागा लॉन्ग की वर्किंग कमेटी ने इस हमले पर कड़ा आक्रोश जताते हुए आरोप लगाया कि यह हमला कूकी उग्रवादियों ने किया है, जो फिलहाल सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौते के तहत हैं। संगठन के अनुसार, यह घटना याओलेन कूकी गांव के पास हुई और दोनों पीड़ितों की मौके पर ही मौत हो गई। संगठन ने कहा कि यह हमला तब हुआ जब महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों समेत यात्री इम्फाल से उखरुल जा रहे थे। काफिले में शामिल छह वाहनों को निशाना बनाया गया और हमलावरों ने स्नाइपर सहित आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। तांगखुल नागा लॉन्ग ने राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी निष्क्रियता के कारण उग्रवादियों के हौसले बढ़े हैं।

यह घटना मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के उखरुल दौरे के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने हाईवे पर सुरक्षा और रोड ओपनिंग पेट्रोल की व्यवस्था का आश्वासन दिया था। संगठन ने इस हमले के बाद सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं और याओलेन तथा आसपास के कूकी बहुल इलाकों में तत्काल तलाशी अभियान चलाने की मांग की है।


वहीं, कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने उखरुल जिले के टीएम कासोम गांव में हुई हत्या की घटना में कुकी-जो समुदाय की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। शनिवार को जारी एक बयान में केजेडसी ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कुकी उग्रवादियों की भूमिका का आरोप लगाया जा रहा है, जो पूरी तरह निराधार है। परिषद ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी भी कुकी-जो व्यक्ति या समूह का कोई हाथ नहीं है। केजेडसी के अनुसार, जमीनी जानकारी के आधार पर यह घटना कुछ गुटों के बीच चल रहे तनाव से जुड़ी प्रतीत होती है, न कि किसी कुकी-जो संगठन की कार्रवाई है।

बयान में कहा गया, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिना उचित सत्यापन और ठोस सबूत के कुकी-जो समुदाय पर आरोप लगा दिए जाते हैं।” परिषद ने यह भी कहा कि मणिपुर में जब भी मैतेई समुदाय या नागा समुदाय से जुड़ी कोई घटना होती है, तो अक्सर कुकी-जो समुदाय को गलत तरीके से दोषी ठहराया जाता है। इससे न केवल तथ्यों का विकृतिकरण होता है, बल्कि समुदाय की छवि भी खराब होती है। केजेडसी ने सोशल मीडिया यूजर्स, मीडिया संस्थानों, नागरिक संगठनों और प्रशासन से अपील की है कि किसी भी समुदाय पर आरोप लगाने या खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पूरी जांच करें और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें। परिषद ने दोहराया कि इस घटना में कुकी-जो समुदाय की कोई भूमिका नहीं है और सभी संबंधित पक्षों से अफवाहें फैलाने से बचने की अपील की है।