नोटबंदी के दो सालः चिदंबरम का जेटली पर हमला, याद दिलाई दो साल पहले कही उनकी ही बातें 

पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम और वित्तमंत्री अरुण जेटली

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने नोटबंदी को दो साल के मौके पर मोदी सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली को आड़े हाथ लिया है। जेटली के बयान की आलोचना करते हुए चिदंबरम ने कहा कि जेटली को याद दिलाया जाना चाहिए कि उन्होंने नोटबंदी के बारे में पहले क्या कहा था।

नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “जेटली को याद दिलाया जाना चाहिए कि उन्होंने नोटबंदी के बारे में पहले क्या कहा था और अटॉर्नी जनरल ने इस विषय पर हाई कोर्ट में क्या बात कही थी। वित्त मंत्री कहते हैं कि नोटबंदी का मकसद मुद्रा की जब्ती नहीं था। क्या कोई उनको याद दिलाएगा कि उन्होंने मीडिया से क्या कहा था।” चिदंबरम ने कहा कि नोटबंदी के जरिए तीन से चार लाख करोड़ रुपये हासिल करने का सपना था, (लेकिन) बैंक काउंटरों पर मनी लॉन्ड्रिंग के कारण यह खयाली सपना साबित हुआ।”

चिदंबरम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि नोटबंदी से फेक मनी खत्म नहीं हुई बल्कि जाली नोट बनाने वालों ने 2,000 और 5,00 रुपये के नए नोटों की भी फेक करंसी तैयार कर ली। नोटबंदी के समय बाहर किए गए सभी 99.3% नोट वापस आरबीआई के पास आ गए। चिदंबरम ने कहा कि वास्तव में सभी अमान्य नोटों को बैंक काउंटर पर एक्सचेंज किया गया। उन्होंने नोटबंदी को सरकार की ओर से लॉन्च की गई मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम बताया।

इस दौरान चिदंबरम ने कहा कि साढ़े चार साल पहले पीएम मोदी ने विकास, नौकरियों और ग्रोथ की बात की थी। उन्होंने इनमें से कुछ भी हासिल नहीं किया। ऐसे में अब वे हिंदुत्व, विशाल मंदिर, भव्य मूर्तियों की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से फेल रही है।

इससे पहले नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि इससे औपचारिक अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ और कर आधार भी बढ़ा। नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ पर एक फेसबुक पोस्ट में जेटली ने लिखा कि एनडीए सरकार के पहले चार साल में आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या बढ़कर 6.86 करोड़ हो गई जबकि मई 2014 यह संख्या 3.8 करोड़ थी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी जिसके तहत, उन दिनों चल रहे 500 रुपये और एक हजार रुपये के नोट तत्काल प्रभाव से चलन से बाहर हो गए थे। नोटबंदी की वजह से 100 से ज्यादा लोगों की भी मौत हुई थी।

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