पीएम मोदी के पत्र पर उदित राज का सवाल- महिला आरक्षण को लेकर सभी दलों की बैठक क्यों नहीं बुलाई?
उदित राज ने कहा कि यह तो मूर्ख बनाने वाली बात है। अगर सभी पार्टियों का सहयोग लेना होता तो ऑल पार्टी मीटिंग बुलानी चाहिए थी। एक तरफ सभी पार्टियों और जनता को भ्रमित किया जा रहा है, दूसरी तरफ काम अपनी मर्जी से किया जा रहा है। इसमें विरोधाभास है।

महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से बुलाया गया है। तीन दिवसीय इस सत्र को लेकर पीएम मोदी ने सभी विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर सहयोग की बात की है। पीएम मोदी के पत्र को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने तंज कसा है। उन्होंने पीएम के पत्र पर सवाल किया है कि जब सभी पार्टियों से सहयोग की बात हो रही है, तो ऑल पार्टी मीटिंग क्यों नहीं बुलाई गई।
महिला आरक्षण विधेयक पर सोनिया गांधी के लेख पर उदित राज ने कहा कि उन्होंने जरूरी सवाल उठाए हैं। बिल तो पहले ही पास हो चुका है, फिर अब यह सब क्यों किया जा रहा है। उदित राज ने कहा कि चुनाव के बीच में, जब तमिलनाडु और बंगाल के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, यह काम पहले भी किया जा सकता था, लेकिन पहले करना नहीं चाहते थे। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना परिसीमन के सीटें नहीं बढ़ाई जा सकतीं। कोई आनुपातिक प्रतिनिधित्व पर भी तैयार नहीं है।
सोनिया गांधी की बात का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने बहुत अच्छी बात कही है कि डिलिमिटेशन केवल अंकगणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से होना चाहिए। अंकगणितीय का मतलब है कि जहां आबादी ज्यादा बढ़ गई है, उन पिछड़े राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण किया और शिक्षा पर ध्यान दिया, उन्हें सजा क्यों मिले?
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल के लिए केवल बीजेपी को श्रेय नहीं दिया जाना चाहिए। सभी पार्टियों का इसमें रोल है। साथ ही ओबीसी के लिए भी आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब संसद में यह बिल पहली बार आया था, तब शरद यादव और लालू प्रसाद यादव जैसे नेता इसी मुद्दे पर अड़े थे कि ओबीसी को बहुत नुकसान होगा। यह भी एक दृष्टिकोण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी सांसदों से समर्थन की अपील पर उदित राज ने कहा कि यह तो मूर्ख बनाने वाली बात है। अगर सभी पार्टियों का सहयोग लेना होता तो ऑल पार्टी मीटिंग बुलानी चाहिए थी। एक तरफ सभी पार्टियों और जनता को भ्रमित किया जा रहा है, दूसरी तरफ काम अपनी मर्जी से किया जा रहा है। इसमें विरोधाभास है।
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