अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर दो धड़ों में बंटी बीजेपी! उमा भारती बोलीं- शंकराचार्य का सबूत मांगकर प्रशासन ने किया मर्यादाओं का उल्लंघन

उमा भारती ने प्रशासन के द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का सबूत मांगने की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि यह कदम प्रशासन के अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन है, और ऐसा अधिकार केवल शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को होता है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ BJP नेता उमा भारती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे यह साफ है कि अब BJP के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं। उमा भारती ने प्रशासन के द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का सबूत मांगने की कड़ी आलोचना की। उनका कहना था कि यह कदम प्रशासन के अधिकारों और मर्यादाओं का उल्लंघन है, और ऐसा अधिकार केवल शंकराचार्यों और विद्वत परिषद को होता है।

जहां एक ओर BJP नेता खुद प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी इस मुद्दे पर BJP को घेरा है। दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में BJP अब धर्म का अपमान कर रही है और शंकराचार्य से सबूत मांगना अस्वीकार्य है। उन्होंने तो BJP से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से माफी मांगने की भी मांग की।

इस विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट कर दिया कि उनका धरना तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें ससम्मान संगम स्नान करने का अधिकार नहीं मिलता। पिछले 10 दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा शिविर प्रवेश तभी होगा, जब हमारा ससम्मान संगम स्नान होगा।

बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए।

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