सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग ढही, अबतक 10 लोगों की मौत, कई अभी भी फंसे होने की संभावना, बचाव अभियान जारी
नामची पुलिस ने एक बयान में कहा, मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे तक 10 शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में से छह की पहचान हो गई है, जबकि तीन अज्ञात शवों को जिला अस्पताल सिंगतम और सर थुटोब नामग्याल मेमोरियल (एसटीएनएम) अस्पताल ले जाया गया।

सिक्किम के नामची जिले में एक दिन पहले निर्माणाधीन सुरंग ढहने से 10 मजदूरों की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। नामची के जिलाधिकारी ने कहा कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने कहा कि झोलुंगे के समरडुंग में एनएचपीसी (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन) तीस्ता चरण-छह जल विद्युत परियोजना के तहत निर्माणाधीन सुरंग भूस्खलन के कारण ढह गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोमवार को एडीआईटी-तीन सुरंग के अचानक ढह गई और घटना के वक्त परियोजना अधिकारी और श्रमिकों समेत कुल 25 लोग एडीआईटी-तीन सुरंग के अंदर फंसे हुए थे।
अबतक 10 शव बरामद
नामची पुलिस ने एक बयान में कहा, मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे तक 10 शव बरामद किए गए हैं। मृतकों में से छह की पहचान हो गई है, जबकि तीन अज्ञात शवों को जिला अस्पताल सिंगतम और सर थुटोब नामग्याल मेमोरियल (एसटीएनएम) अस्पताल ले जाया गया। बयान में कहा गया है कि जिन सात मृतकों की पहचान हुई है उनमें से चार पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से थे, एक-एक व्यक्ति असम, पंजाब और उत्तराखंड के देहरादून से था तथा एक व्यक्ति नामची का रहने वाला था।
नामची जिला प्रशासन, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए), सिक्किम पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं और पाकयोंग व सिलीगुड़ी से आए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम के साथ अन्य एजेंसियां सुरंग के अंदर फंसे शेष श्रमिकों के शव निकालने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार दोपहर भूस्खलन के कारण सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया और गैस रिसाव की आशंका के बीच लगभग 27 मजदूर अंदर फंस गए थे। उन्होंने बताया कि सुरंग के अंदर गैस होने के कारण बचाव अभियान जटिल हो गया है और फंसे श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश के दौरान कई बचावकर्मियों को चक्कर आए और कुछ बेहोश भी हो गए। अधिकारियों के अनुसार, माना जा रहा है कि गैस का रिसाव भूमिगत परतों या भूस्खलन प्रभावित चट्टानी संरचनाओं से प्राकृतिक रूप से हो रहा है।
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