यूपीः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आरोप लगाने वाला रामभद्राचार्य का शिष्य बनता है और फिर आकर हमारे लोगों पर ऐसे आरोप लगाता है। इसलिए, समझना चाहिए कि ये आरोप कहां से आ रहे हैं? रामभद्राचार्य जी से और यह भी जानना चाहिए कि रामभद्राचार्य की शक्ति कहां से आती है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी पुलिस थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ‘‘न्यायालय पर मुझे पूरा यकीन है और मैं न्यायलय के आदेश का सम्मान करता हूं।’’
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य द्वारा बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल आवेदन पर विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने पिछले सप्ताह साक्ष्यों को देखने और पीड़ित बटुकों का बयान दर्ज करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ता ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बीएनएस की धारा 69, 74, 75, 76, 79 और 109 के साथ ही पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/5/9 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए यह आवेदन दाखिल किया था। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए झूंसी के थाना प्रभारी को तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने और कानून के मुताबिक मामले की जांच करने का आदेश दिया। यह जांच पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए की जाएगी।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा, ‘‘न्यायपालिका ने बच्चों के साथ हुए गलत कृत्यों के मामले की सुनवाई करते हुए झूंसी थाने को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अब हमें न्याय मिलेगा।’’ उन्होंने कहा, “आज से हम यहां से विद्या मठ (वाराणसी) के लिए सनातन यात्रा निकाल कर रहे हैं। हम दिखाएंगे कि विद्या मठ के पंचम तल पर किस तरह से बच्चों का यौन शोषण किया जाता है। बच्चों के साथ दुष्कर्म के बहुत सारे साक्ष्य वहां मौजूद हैं।” ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्होंने सभी साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं और पुलिस को भी वह साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज के माघ मेला 2026 में मेला प्रशासन से टकराव को लेकर सुर्खियों में बने रहे। उन्होंने मेला प्रशासन और सीएम योगी पर मौनी अमावस्या का स्नान नहीं करने देने का आरोप लगाया था। न्यायालय द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में कहा, ‘‘जी हां, यह सही और उचित है। क्योंकि मामला दर्ज होने पर ही आगे की जांच पूरी हो सकती है। तभी हमारे खिलाफ दर्ज झूठे मामले की सच्चाई सामने आएगी और इस कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।’’
उन्होंने कहा कि झूठा मामला अंततः झूठा ही साबित होगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘‘देखिए, सनातन धर्म पर आरोप कौन लगा रहा है। ये आरोप किसी विधर्मी ने नहीं लगाए हैं। आरोप लगाने वाला व्यक्ति खुद एक हिस्ट्रीशीटर है। उसका पूरा इतिहास शामली जिले के कांधला पुलिस थाने की दीवार पर लिखा है।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लोगों ने हमें बताया है कि उसका काम अनगिनत लोगों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराना और उनसे पैसे वसूलना है।’’
प्रख्यात धर्मगुरु रामभद्राचार्य पर हमला करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘‘यह व्यक्ति (आरोप लगाने वाला) रामभद्राचार्य का शिष्य बनता है, और उनका शिष्य बनने के बाद आकर हमारे लोगों पर ऐसे आरोप लगाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यह समझना चाहिए कि ये आरोप किसी विधर्मी द्वारा नहीं लगाए जा रहे हैं। ये आरोप कहां से आ रहे हैं? रामभद्राचार्य जी से और आपको यह भी जानना चाहिए कि रामभद्राचार्य की शक्ति कहां से आती है।’’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वह ‘गौ माता’ के समर्थन में जो आवाज उठा रहे हैं, उसे दबाने के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं और यह उन्हीं प्रयासों में से एक है। एक सवाल के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्रकारों से कहा, ‘‘उन्होंने झूठा मामला बनाया है। और कल हमारे वकील ने आपको बताया कि उन्होंने दो हलफनामे दाखिल किए हैं। दोनों में दो-दो बातें लिखी हैं। बात यहीं खत्म हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति हलफनामे में दो बातें लिखता है, तो इसका मतलब है कि उसकी एक बात झूठी है?’’
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