यूपी पुलिस गजब है! जिस मामले को बताया ऑनर किलिंग वो निकला फर्जी, सजा काट रहे हैं बेगुनाह, अब थानेदार निलंबित 

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। अमरोहा और बुलंदशहर की शर्मनाक घटनाओं से पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। अमरोहा पुलिस ने जिस लड़की की ऑनर किलिंग में उसके बाप और भाई को जेल भेज दिया था वो जिंदा मिली है और खुद के जिंदा होने का सुबूत देने पुलिस के पास पहुंच गई।

फोटो: आस मोहम्मद कैफ
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आस मोहम्मद कैफ

उत्तर प्रदेश की यह दोनों कहानियां एक ही सप्ताह की है। कहानी फिल्मी जैसी लगती है मगर बिल्कुल हकीकत है। अमरोहा पुलिस ने जिस लड़की की ऑनर किलिंग में उसके बाप और भाई को जेल भेज दिया था वो जिंदा मिली है और खुद के जिंदा होने का सुबूत देने पुलिस के पास पहुंच गई।

इसके अलावा बुलंदशहर में जिस बहू की दहेज हत्या के आरोप में बाप-बेटा जेल में बंद है उसे भी ससुराल के लोगों ने खोज लिया है और वो भी जिंदा मिली है। इस घटना के बाद सूबे की पुलिस भारी किरकिरी हुई है और अब यूपी पुलिस रायता समेटने में लगी है।

दोनों घटनाएं पुलिस की भयंकर लापरवाही का प्रमाण देती है। सवाल यह है कि अगर ये दोनों लड़कियां न मिलती तो दोनों पक्षों के निर्दोष बाप-बेटों की जिंदगी बर्बाद होने का जिम्मेदार कौन होता। अमरोहा वाला मामला डेढ़ साल पहले का है। इसमें लड़की अपने प्रेमी के साथ चली गई थी अब वापस आई है। 6 फरवरी 2019 इस लड़की की गुमशुदगी अमरोहा के आदमपुर थाने में लिखी गई थी। 18 फरवरी 2019 को अपनी पीठ खुद थपथपाते हुए अमरोहा पुलिस ने इस घटना का खुलासा किया था और कमाल करते हुए हत्या में उपयोग किए गए तमंचा कारतूस और खून में सने हुए कपड़े भी बरामद दिखाएं थे। ये लोग अब तक जेल में बंद है और बेबसी और बेगुनाही की सजा काट रहे हैं।

अमरोहा जनपद के मलकपुर गांव के रहने वाले पीड़ित परिवार के राहुल ने बातचीत में बताया है कि पुलिस ने लड़की के पिता सुरेश, उसके भाई रूप किशोर और पड़ोस के गांव के रहने वाले देवेंद्र सहित तीन लोगों को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। हम जानते थे कि लड़की जिंदा है पुलिस ने मारपीट कर इकबालिया बयान दिलवाया था। हम तब से ही लड़की को तलाशने के प्रयास में जुटे थे। अब हमने उसे पोरोरा गांव के राकेश के घर तलाश लिया है। अब वह लड़की एक बच्चे की मां भी है।इससे अधिक पीड़ादायक अब क्या हो सकता है।

दूसरा मामला बुलंदशहर का है, जिसके तार गाजियाबाद से जुड़े है। 27 जुलाई को हिंडन इलाके से एक अटैची में एक महिला का शव बरामद हुआ। पहचान हुई शव बुलंदशहर में 1 जून को दुल्हन बन गई वरीशा का था। उसका आमिर से निकाह हुआ था। 23 जुलाई को वो गायब हो गई थी। उसके पति आमिर बुलंदशहर कोतवाली में गुमसुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। 27 जुलाई को शव मिलने के बाद महिला के भाई और मां ने इस शव को वरीशा का बताया। बुलंदशहर पुलिस ने वरीशा के शौहर, सास-ससुर को बिना जांच पड़ताल किए जेल भेज दिया। अब वरीशा को अलीगढ़ से बरामद किया गया है। बताया जा रहा है कि वरीशा खुद ही थाने पहुंच गई थी और उसने बताया कि ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की थी। अटैची में जिसका शव मिला उसकी शिनाख्त गलत की गई।

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है और अमरोहा और बुलंदशहर की शर्मनाक घटनाओं से पुलिस की छवि धूमिल हो रही है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव मनीष कहते हैं, “उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था अब तक कि सबसे खराब कानून व्यवस्था है, पुलिस पीटकर गुनाह कबूल करवाकर बेगुनाहों को जेल भेज रही है। अमरोहा और बुलंदशहर की घटना का सच सामने आ गया है ऐसी बहुत सी घटनाओं की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं सरकार आंकड़ों से खेल कर रही है कागज भरने के चक्कर में यह सब हो रहा है।”

अमरोहा और बुलंदशहर दोनों मामलों में जांच अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। अक्सर जनहित के मामलों में मुखर रहने वाले आईजी अमिताभ ठाकुर के अनुसार जांच अधिकारी की गलती स्पष्ट दिखाई देती है। एक बेगुनाह के जेल में होने की पीड़ा को बयां नही किया जा सकता है। हत्या जैसे मामलों में किसी की पूरी जिंदगी दांव पर लग जाती है।

बुलंदशहर पुलिस इस गलती का पल्ला गाजियाबाद में मिले शव की पहचान वरीशा के रूप में करने पर उसके परिजनों को मुख्य दोषी मान रही है और उनके विरुद्ध मुकदमा लिखकर कार्रवाई भी कर रही है। बुलंदशहर पुलिस कप्तान संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, वरीशा के परिजनों में उसके भाई और मां ने गाजियाबाद में मिले शव की पहचान की थी। पुलिस ने उनकी बात पर भरोसा किया था। अमूमन पुलिस ऐसा ही करती है।

आपराधिक मामलों के जानकार अधिवक्ता ठाकुर देवेंद्र सिंह कहते हैं कि सिर्फ यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती वो डीएनए जांच करा सकते थे और फोरेंसिक की मदद ले सकते थे मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया और मामले की लीपापोती की गई।

अमरोहा वाले मामले में तो पुलिस ने जमकर खेल किया है। यहां पिछले दो साल से एक ही पुलिस कप्तान जमे हुए हैं। इस मामले में लड़की कमलेश के भाई ने कुछ लोगों पर 6 फरवरी 2019 को अपनी बहन को अगवा करने का आरोप लगाया था। इसमें होराम और हरफूल को जेल भेज दिया गया। 28 दिसंबर 2019 को इसी जनपद की आदमपुर पुलिस ने एक खुलासा किया। आदमपुर थानेदार अशोक कुमार शर्मा अपनी कहानी बनाकर एसपी ऑफिस पहुंचे और बताया कि इस लड़की की ऑनर किलिंग में हत्या कर दी है। अब अमरोहा के पुलिस कप्तान विपिन टाडा के अनुसार उन्होंने इस मामले में थाना प्रभारी अशोक कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया है।

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