UP: शाहजहांपुर में बुलडोजर से टूटी काकोरी कांड के वीरों की प्रतिमाएं, अखिलेश बोले- अंग्रेजों की मुखबिरी करने वाले...

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में काकोरी शहीदों की प्रतिमाएं हटाने के दौरान लापरवाही से टूट गईं, जिस पर बवाल मच गया और महापौर की नाराजगी के साथ अखिलेश यादव ने भी घटना की निंदा की।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में काकोरी केस के अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं टूटने का मामला सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है। नगर निगम कार्यालय परिसर में स्थापित इन प्रतिमाओं को हटाने के दौरान निर्माण एजेंसी की लापरवाही से नुकसान पहुंचा, जिससे शहर में आक्रोश फैल गया है और मामला राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है।

लापरवाही में टूटीं शहीदों की प्रतिमाएं

जानकारी के मुताबिक, नगर निगम परिसर के पास स्मार्ट रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी के तहत अमर बलिदानियों की पुरानी प्रतिमाओं को हटाकर नई प्रतिमाएं लगाने की योजना थी। इसके लिए करीब 40 लाख रुपये की निविदा पर एक एजेंसी को ठेका दिया गया था। नई प्रतिमाओं को पीछे स्थापित किया जाना था, लेकिन संबंधित ठेकेदार ने नगर निगम अधिकारियों को बिना सूचित किए रविवार रात बुलडोजर से प्रतिमाएं हटाने की कोशिश की। इसी दौरान प्रतिमाएं खंडित हो गईं।


शहर में आक्रोश, जांच की मांग

घटना की जानकारी सामने आते ही शहर के लोगों में रोष फैल गया। सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अनीत कुमार त्रिवेदी ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जिन वीरों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया, उनकी प्रतिमाओं के साथ इस तरह की लापरवाही जनभावनाओं को आहत करती है।

महापौर की नाराजगी, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद महापौर अर्चना वर्मा मौके पर पहुंचीं और नगर निगम अधिकारियों को तलब कर नाराजगी जताई। वायरल वीडियो में प्रतिमाओं को डंपिंग ग्राउंड में पड़ा हुआ दिखाया जा रहा है, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।


अखिलेश यादव ने साधा निशाना

काकोरी केस के शहीदों की प्रतिमाएं तोड़े जाने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि सौंदर्यीकरण कभी भी शहीदों के सम्मान से बड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने इसे एक मानसिकता का प्रतीक बताते हुए टिप्पणी की कि जो लोग अंग्रेजों की मुखबिरी करते रहे, वे शहादत का मोल नहीं समझ सकते।  

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