UP: सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद ध्वस्तीकरण को लेकर मचा बवाल, सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार से पूछे सवाल
कार्रवाई का विरोध कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोक दिया गया।

सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने छह बुलडोजर का इस्तेमाल करके गिरा दिया है। यह ध्वस्तीकरण कार्रवाई जिला अदालत के उस फैसले के बाद की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर बनी इस इमारत को अवैध घोषित करने वाले बेदखली के आदेश को सही ठहराया गया था। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ की तैनाती रही। वहीं, इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रशासन की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। मौके पर पुलिस के अलावा पीएसी और आरआरएफ के जवानों को तैनात किया गया। किसी भी व्यक्ति को मस्जिद के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इकरा हसन को पुलिस ने दिया नजरबंद
बता दें कि कैराना की सांसद इकरा हसन को पुलिस ने नजरबंद कर दिया था। सांसद इकरा हसन कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने इस कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्रवाई का विरोध कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोक दिया गया। सांसद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सवाल उठाया कि क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारियों से मिलने से भी रोका जा सकता है।
SP सांसद इकरा का पुलिस से तीखी बहस
पुलिस से बातचीत करते हुए इकरा हसन का वीडियो सामने आया है। पुलिसकर्मी उनसे यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं, जिस पर इकरा हसन ने पूछा कि हमको किस वजह से रोका जा रहा है। इस दौरान इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बातचीत भी हुई। इकरा हसन ने कहा कि उनका सवाल सरकार और प्रशासन से है कि क्या एक निर्वाचित सांसद को अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े किसी विषय पर अधिकारियों से मिलना भी अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता।
इस दौरान इकरा हसन की मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन भी उनके आवास पर मौजूद रहीं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका परिवार किसी दबाव से डरने वाला नहीं है और वे लोगों की सेवा के लिए राजनीति में हैं। सहारनपुर जाने से रोके जाने के बाद इकरा हसन ने भी स्पष्ट किया कि वह जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से बात करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने कहा कि एक सांसद को इस तरह रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत में मस्जिद परिसर में बने कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। प्रशासन का दावा है कि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर पाया गया।
इसके बाद 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई के लिए याचिका दाखिल की गई। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया। साथ ही कब्जेदारों से 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए गए और उन्हें 30 दिन का समय दिया गया। मस्जिद पक्ष ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को जिला अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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