UPI पर ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर चार्ज, दिल्ली के कारोबारी बोले- बढ़ेगा कारोबार का बोझ, फैसला वापस ले सरकार
दिल्ली के बाजारों में 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क की चर्चा से व्यापारियों की चिंता बढ़ी है और संगठनों ने इसका विरोध किया है।

2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा ने दिल्ली के प्रमुख बाजारों के कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। सदर बाजार से लेकर चांदनी चौक, सरोजनी नगर और लाजपत नगर तक व्यापारिक संगठनों का कहना है कि डिजिटल भुगतान अब कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में बड़े UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो दुकानदारों की लागत बढ़ सकती है और इसका असर छोटे से लेकर बड़े कारोबार तक पड़ने की आशंका है।
सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि UPI करोड़ों व्यापारियों और ग्राहकों के लिए आसान, तेज और सुविधाजनक भुगतान माध्यम बन चुका है। उनके मुताबिक, छोटे और मध्यम कारोबारियों का मुनाफा पहले ही सीमित रहता है। ऐसे में हर बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से उनकी बचत और कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। पम्मा ने कहा कि सदर बाजार जैसे बड़े थोक बाजारों में रोजाना हजारों लेनदेन 2,000 रुपये से ऊपर के होते हैं। इसलिए हर भुगतान पर लगने वाला छोटा शुल्क भी महीने और साल के हिसाब से बड़ा खर्च बन सकता है।
'डिजिटल भुगतान से लागत घटती है, चार्ज बढ़ा तो बोझ बढ़ेगा'
पम्मा के मुताबिक, व्यापारी लगातार डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं। UPI से ग्राहकों को भुगतान में आसानी होती है और दुकानदारों को नकदी संभालने की परेशानी भी कम होती है। उनका कहना है कि व्यापारियों से डिजिटल भुगतान अपनाने की अपील के साथ उसी व्यवस्था में अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जाता है तो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य पर भी सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने सरकार से छोटे, मध्यम और थोक व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने और UPI को कम लागत वाला भुगतान माध्यम बनाए रखने का आग्रह किया।
दिल्ली हिंदुस्तान मर्केंटाइल एसोसिएशन, चांदनी चौक के महामंत्री और कपड़ा व्यापारी भगवान बंसल ने कहा कि लोग लंबे समय से नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं। पेटीएम और UPI जैसे माध्यमों ने इस बदलाव को गति दी और यह सरकार के कैशलेस अर्थव्यवस्था के विजन के अनुरूप भी आगे बढ़ा। उन्होंने कहा कि छोटे भुगतान से लेकर बड़ी खरीदारी तक डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने से कारोबार का खर्च बढ़ेगा। बंसल के मुताबिक दिनभर में बड़ी संख्या में भुगतान होने पर रोजाना 300-400 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च बन सकता है और महीने का कुल बोझ काफी बढ़ जाएगा।
सरोजनी नगर और लाजपत नगर के कारोबारियों ने भी जताई आपत्ति
बंसल ने कहा कि व्यापारियों की खरीदारी सुबह दूध और ब्रेड जैसी जरूरतों से शुरू होकर दिनभर अलग-अलग सामान की खरीद तक चलती है। उन्होंने कहा कि सोना खरीदते समय ग्राहक को पहले कीमत, फिर GST और इनकम टैक्स जैसी देनदारियां चुकानी पड़ती हैं। ऐसे में यदि इसके ऊपर UPI सरचार्ज भी जुड़ता है तो यह व्यापारियों के लिए अतिरिक्त बोझ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों से राय लिए बिना फैसले किए जाते हैं। बंसल के मुताबिक GST में अब तक 1000 से अधिक संशोधन हो चुके हैं, लेकिन व्यापारियों की कई समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि सरकार व्यापारियों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनने के लिए तैयार नहीं होती, जबकि व्यापारी सरकार की नीतियों को सबसे ज्यादा समर्थन देने वाले वर्गों में हैं।
सरोजनी नगर मिनी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अशोक रंधावा ने भी UPI भुगतान पर 0.4 फीसदी चार्ज को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में मर्चेंट को ही शुल्क देना होगा और ग्राहक पर यह शुल्क नहीं लगाया जाएगा। उनके मुताबिक इसका सीधा असर दुकानदार की जेब और कमाई पर पड़ेगा। रंधावा ने कहा कि कारोबार करना पहले ही मुश्किल हो गया है और व्यापारियों को UPI भुगतान के साथ GST के कागजात, टैक्स और दूसरे जरूरी काम भी संभालने पड़ते हैं। उन्होंने महंगाई बढ़ने और लोगों की खरीदारी क्षमता घटने का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक बाजार में ग्राहक पहले ही जरूरत के सामान पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, ऐसे में UPI भुगतान पर सरचार्ज का फैसला कारोबारियों का बोझ बढ़ाने जैसा है। इसी संदर्भ में उन्होंने तंज भरे लहजे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का जिक्र करते हुए कहा कि दुकानदारों को UPI भुगतान पर 0.4 फीसदी टैक्स का तोहफा मिला है।
फेडरेशन ऑफ लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप कुमार ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर प्रस्तावित सरचार्ज को लेकर व्यापारिक संगठनों में चिंता है। उनके मुताबिक इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है और इसका अप्रत्यक्ष बोझ आगे चलकर ग्राहकों तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि UPI ने थोक और खुदरा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ नकद लेनदेन कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। व्यापारियों को आशंका है कि अतिरिक्त शुल्क से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और लेनदेन फिर से नकद की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से UPI लेनदेन को व्यापारियों के लिए शुल्क-मुक्त रखने की मांग की है।
परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि सरकार को किसी भी अंतिम निर्णय से पहले व्यापारियों की वास्तविक समस्याओं और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। उनका कहना है कि व्यापारियों की मेहनत से अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, इसलिए ऐसी व्यवस्था से बचना चाहिए जिससे कारोबार की लागत बढ़े।
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