अमेरिका-ईरान शांति वार्ता इस्लामाबाद में कल, होर्मुज़ में बारूदी सुरंगों की खबरों से वार्ता पर संदेह के बादल

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे इस वार्ता को लेकर संदेह और अविश्वास गहराता जा रहा है।इस बीच पाकिस्तान ने दो दिन की छुट्टी घोषित करते हुए सेरेना होटल को अपने अधिकार में ले लिया है।

एआई निर्मित सांकेतिक तस्वीर
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ए जे प्रबल

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता को लेकर संदेह और अविश्वास गहराता जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोकद्दम ने गुरुवार रात सबसे पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने की योजना के बारे में ट्वीट पर जानकारी दी थी, लेकिन कुछ ही घंटे बाद उन्होंने इस पोस्ट को हटा दिया। फिर भी मीडिया संस्थानों से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच के बीच संशय के बावजूद यह वार्ता संपन्न होगी।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता यूं तो पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद हुए दो सप्ताह के सीजफायर के बाद कई न्यूज चैनलों ने वार्ता के भविष्य पर संदेह जताते हुए इसके अभी भी तय समय पर ही होने की सूचना दी है। खबरों के मुताबिक अमेरिका तरफ से उपराष्ट्रपति जे डी वांस और ईरान की तरफ से वहां की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ इस वार्ता की अगुवाई करेंगे। वार्ता के दौरान पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में होगा। वार्ता के लिए ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को सामने रखा जाएगा। इस प्रस्ताव में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान और ओमान के नियंत्रण को मान्यता देना और अमेरिका-इजरायल के हमलों से ईरान में हुए नुकसान के हर्जाने के बदले होर्मुज़ ट्रांज़िट टैक्स को स्वीकार करना शामिल है। यही कुछ अहम शर्तें हैं जो चर्चा के लिए मेज़ पर रखी गई हैं और संभवतः यही चर्चा का आधार बनेंगी।

लेकिन, ईरान ने सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद वार्ता में अपनी भागीदारी को लेबनान पर इज़राइली हमलों को तुरंत रोकने से जोड़ दिया है, जिससे कूटनीति आगे बढ़ेगी या नहीं, इस मामले में बेरूत एक निर्णायक कारक बन गया है। अगले कुछ घंटे यह तय कर सकते हैं कि इस्लामाबाद बातचीत का एक वास्तविक मंच बन पाएगा या शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाएगा। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ "खुला" है, लेकिन इस बात की पुष्टि भी की कि वहां बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं; इसलिए, जब तक इन सुरंगों को हटा नहीं दिया जाता, तब तक सभी जहाज़ों को उन मार्गों का उपयोग करना होगा जो ईरान के नियंत्रण में हैं।


उधर गुरुवार देर शाम तक इज़रायल की तरफ़ से किसी भी तरह की नरमी के कोई संकेत नहीं दिखे। ऐसा लग रहा था कि वह लेबनान पर हवाई हमले और ज़मीनी आक्रमण, दोनों जारी रखते हुए अपने 'ग्रेटर इज़रायल' प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है। बेरूत से युद्ध संवाददाता स्टीव स्वीनी ने पुष्टि की कि बेरूत में इज़रायली हमलों में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और कई और लोग मलबे के नीचे दबे हैं और लापता हैं। बेशुमार बच्चे अनाथ हो गए हैं। इज़रायल ने एक अंतिम संस्कार और एक कैफ़े पर भी बमबारी की, जिसमें कई लोग मारे गए। उन्होंने बताया कि आपातकालीन कर्मचारियों और एम्बुलेंस को भी निशाना बनाया गया, और आम नागरिकों की इमारतें इज़रायल ने ज़मींदोज़ कर दी हैं; ये सभी हरकतें आतंकवाद के दायरे में आती हैं।

हालाँकि, इज़राइल ने लेबनान पर अपने हमलों को आतंकवादियों को निशाना बनाने वाले एक सैन्य अभियान के तौर पर पेश किया। आईडीएफ (इज़राइल डिफेंस फोर्स) ने दक्षिणी लेबनान पर बमबारी जारी रखी और 9 अप्रैल, गुरुवार दोपहर को कई पोस्ट के ज़रिए बताया कि उसने "बेरूत में हिज़्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम के निजी सचिव अली यूसुफ़ हरशी; अल जज़ीरा के पत्रकार की आड़ में काम कर रहे हमास के आतंकवादी मुहम्मद समीर मुहम्मद वाशाह; 'इस्लामिक जिहाद आतंकवादी संगठन के एक आतंकवादी' के तौर चिह्नित अब्द अल-रहमान अम्मार हसन खुदारी; दक्षिणी लेबनान के शेबा इलाके में लेबनानी रजिस्टेंस ब्रिगेड के कमांडर माहेर कासिम हमदान और अन्य लोगों को 'खत्म' कर दिया है।"


इस बीच, ईरानी नेताओं पर लेबनान और हिज़्बुल्लाह का समर्थन बंद करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। उधर तेहरान में लोगों ने बड़े-बड़े प्रदर्शन किए, जिनमें उन्होंने अपने सहयोगियों के समर्थन में नारे लगाए और कहा कि हिज़्बुल्लाह के साथ विश्वासघात करना इस्लामी मूल्यों के साथ विश्वासघात करने जैसा होगा। ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने घोषणा की कि, "ज़ायोनी शासन द्वारा लेबनान के ख़िलाफ़ फिर से की गई आक्रामकता शुरुआती संघर्ष-विराम का खुला उल्लंघन है।"

एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा, "इस तरह के कदम धोखे और नियमों का पालन न करने का संकेत देते हैं, जिससे बातचीत बेमानी हो जाती है। हमारी उंगलियाँ ट्रिगर पर ही रहेंगी। ईरान अपने लेबनानी भाइयों और बहनों को कभी नहीं छोड़ेगा।" एक और ट्वीट में उन्होंने घोषणा की, "लेबनान में इज़राइल का फिर से घुसपैठ करना, शुरुआती संघर्ष-विराम समझौते का खुला उल्लंघन है। यह धोखे और संभावित समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता की कमी का एक खतरनाक संकेत है। इन कदमों का जारी रहना बातचीत को बेमानी बना देगा। हमारी उंगलियाँ ट्रिगर पर ही रहेंगी। ईरान अपनी लेबनानी बहनों और भाइयों को कभी नहीं छोड़ेगा।"

ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने आईटीवी को बताया कि ईरान का प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में तभी शामिल होगा, जब लेबनान पर इज़राइल हमला करना बंद कर दे। उन्होंने इस बात को दोहराया कि लेबनान संघर्ष-विराम का हिस्सा था, जबकि इज़राइल और अमेरिका ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि हिज़्बुल्लाह के खिलाफ़ की जा रही कार्रवाई इस संघर्ष-विराम का हिस्सा नहीं थी।

ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा, "आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम होंगे।" उन्होंने आगे कहा, "ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाएगा, लेकिन अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धता के आधार पर लेबनान पर इज़राइल के हमलों को रोकना होगा। इस क्षेत्र में किसी भी शांति प्रक्रिया में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए। कल रात, ईरान संघर्ष-विराम के उल्लंघन का जवाब देने ही वाला था। हालांकि, पाकिस्तान ने हस्तक्षेप किया और इज़राइल पर अमेरिका के नियंत्रण के संबंध में संदेश पहुँचाए।"


उधर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ के रणनीतिक सलाहकार महदी मोहम्मदी ने भी लेबनान प इजरायली हमलों को लेकर एक साफ़ चेतावनी जारी की। उन्होंने फ़ारसी में पोस्ट किया, "लेबनान में अमेरिका के कुत्तों पर पूरी तरह से लगाम लगाए बिना, न तो कोई युद्धविराम होगा और न ही कोई बातचीत; और मिसाइलें उड़ने के लिए तैयार हैं।" मोहम्मदी ने आगे कहा कि जिसे उन्होंने एक नई क्षेत्रीय व्यवस्था कहा, उसके हिस्से के तौर पर "प्रतिरोध की धुरी (एक्सिस ऑफ रजिस्टेंस) के घटकों के बीच साझा नियति का समीकरण" मज़बूत होना ही चाहिए — "अगर संभव हो, तो बातचीत से; वरना, युद्ध से।"

इस सबके दौरान ईरान ने जवाबी हमला नहीं किया और ऐलान किया कि वह कूटनीति को 'आखिरी मौका' दे रहा है। यूएई, जिसने बुधवार को ईरानी रिफाइनरियों पर हमले किए थे और तेहरान के 'आतंकवाद' को खत्म करने की मांग की थी, वह भी शांत नज़र आया और उसने आधिकारिक तौर पर कहा कि गुरुवार को उसने किसी भी ड्रोन या मिसाइल को नहीं रोका।