उत्तर प्रदेशः धान खरीद में भ्रष्टाचार से किसान रो रहे, पर योगी सरकार बम-बम

गोरखपुर हो, कुशीनगर, पीलीभीत हो या शाहजहांपुर- धान खरीद को लेकर कारगुजारियां सामने आ रहीं हैं। किसानों का कहना है कि धान खरीद केंद्रों पर कहीं बोरे नहीं थे, तो कहीं धान में नमी की बात कहकर लौटा दिया जाता रहा और अफसरों की मिलीभगत से कहीं गोदाम भर दिया गया।

फोटोः सोशल मीडिया
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उनके मंत्री इन दिनों जहां भी जा रहे हैं, रिकाॅर्ड धान खरीद को लेकर अपनी पीठ जमकर थपथपा रहे हैं। दावा है कि योगी सरकार ने 28 फरवरी तक 50 मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य रखा था, जबकि जनवरी में ही 58 मीट्रिक टन धान की खरीद हो गई। लेकिन यह तस्वीर जितनी सुनहरी दिख रही है, उतनी है नहीं। बेखौफ अफसरों की मिलीभगत से कहीं हजारों टन धान की खरीद हो गई, तो कहीं बिहार के धान से गोदामों को भर दिया गया।

गोरखपुर हो या कुशीनगर, पीलीभीत हो या शाहजहांपुर- धान खरीद को लेकर कारगुजारियां सामने आ रहीं हैं। गोरखपुर के गोला तहसील के मजुरी गांव के किसान विपिन राय कहते हैं कि खरीद केंद्र पर कभी बोरे नहीं थे, तो कभी धान में नमी की बात कहकर लौटा दिया जाता रहा। 120 क्विंटल धान दरवाजे पर पड़ा हुआ है।

राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रकाश शाही के गृह जनपद देवरिया में धान खरीद में गोलमाल उजागर हुआ है। देवरिया जिले में हुई जांच में खुलासा हुआ कि पांच राइस मिलरों ने बिहार के धान की बिक्री दिखा कर करोड़ों का वारा न्यारा कर लिया। जिलाधिकारी के निर्देश में हुई जांच में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। जांच करने वाले एडीएम वित्त एवं राजस्व उमेश कुमार मंगला दो टूक जवाब देते हैं कि जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

शाहजहांपुर जिले के तिलहर में एक ही नाम से कई बैंकों में खाते खोलकर समर्थन मूल्य हड़पने के मामले भी उजागर हुए हैं। दस बीघा जमीन वाले किसानों के खाते में 100 क्विंटल से अधिक खरीद की रकम भेज दी गई। शाहजहांपुर के जिला खाद्य विपणन अधिकारी अभिलाष चंद्र सागरवाल ने पांच खरीद केंद्रों के चार सेंटर इंचार्ज के खिलाफ अलग-अलग थानों में गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई हैं।

तिलहर मंडी के क्रय केंद्र पर 350 किसानों से 30867.40 क्विंटल धान की खरीद दिखाई गई है। इनमें से 12 लोगों के खाते कई बैंकों में हैं। इनके खाते में लाखों की रकम भेजी गई है। माफियाओं ने जनधन खाता वाले गरीबों को मोहरा बना कर लाखों का वारा न्यारा किया है। चंद रुपये का लालच देकर इनके खाते का गलत इस्तेमाल किया गया। दिलचस्प यह है कि शाहजहांपुर में सीएए के विरोध में प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर दिया था। इसके बाद भी धान खरीद हुई।

दरअसल, इंटरनेट बंद होने के कारण माफिया उत्तराखंड चले गए और वहां से उन्होंने दोनों सेंटरों पर ऑनलाइन खरीद दर्ज कराकर घोटाला कर लिया। पीलीभीत जिले में तो दिसंबर महीने में ही लक्ष्य से अधिक धान खरीद का रिकार्ड बना लिया गया। जिले के 147 धान सेंटरों के माध्यम से लक्ष्य 3.08 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 3.67 लाख मीट्रिक टन खरीद की गई।

बिहार के धान से फुल हो रहे बार्डर के गोदाम

गाजीपुर, बलिया, कुशीनगर से लेकर देवरिया जिले के बाॅर्डर बिहार से जुड़ते हैं। इन जिलों में बड़ी मात्रा में बिहार से मंगाए गए धान की खरीद हुई है। बिहार में भी यूपी के बराबर ही धान की कीमत दी जा रही है, लेकिन धान में नमी से लेकर अन्य पेंच के चलते किसान बिचैलियों को 1,300 से 1,400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपज बेच दे रहे हैं। बाॅर्डर के सभी जिलों ने जनवरी के पहले सप्ताह में ही धान खरीद का लक्ष्य पूरा कर लिया। इसके बाद खरीद केंद्रों पर ताला लटका हुआ है।

गाजीपुर जिले में वेबसाइट बंद होने से खरीद प्रभावित होने की खबरों के उलट प्रशासन बंपर खरीद में कामयाब हुआ है। गाजीपुर के दिलदारनगर विधानसभा क्षेत्र के पचैखा गांव में आठ गुणे आठ वर्गफीट के कमरे में बने धान खरीद केंद्र पर हजारों क्विंटल धान खरीदी गई। एक किसान ने 450 क्विंटल धान बिचैलियों को 1,600 रुपये के रेट से बेचा। इस किसान का कहना है कि केंद्र पर नमी के नाम पर 10 फीसदी की कटौती हो रही है। केंद्र तक धान ढुलाई का खर्च 50 से 75 रुपये लग रहा है। ऐसे में बिचैलिये को 1,600 रुपये में धान बेचना फायदे का सौदा नजर आया। इसी गांव के वजाहत का कहना है कि हजारों रुपये खर्च कर धान क्रय केंद्र तक लाया। दो बार सर्वर डाउन होने के चलते उपज लेकर लौटना पड़ा। धान मजबूरी में बिचैलिये को बेचना पड़ा।

साल भर पहले भी गोलमाल

पिछले साल भी धान खरीद में करोड़ों का गोलमाल उजागर हुआ था। लेकिन सरकार ने पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) से भुगतान का दावा करते हुए व्यवस्था को फुलप्रूफ बताया। इसमें एनआईसी से संस्तुति के बाद ही भुगतान हो रहा है। पीएफएमएस से भुगतान करने वाला यूपी देश का पहला राज्य तो बन गया लेकिन बिचैलियों और अफसरों के गठजोड़ से गोलमाल पर अंकुश नहीं लगा। 3799 खरीद केंद्रों से 50 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को लेकर शुरू हुई खरीद में पहली बार बटाईदारों को भी सरकारी खरीद में शामिल किया गया। धान खरीद के लिए 9,32,635 किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन सर्वर की दिक्कतों को देखते हुए पंजीकरण को लेकर किसानों को छूट दे दी गई। इससे ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों से जोड़ कर धान खरीद में पारदर्शिता का दावा हवा में उड़ गया।

पिछले गोलमाल में भी मुकदमे

पिछले दिनों कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही के कुशीनगर पहुंचने पर किसानों ने पिछले वर्ष का भुगतान नहीं होने का मामला उठाया। जिलाधिकारी ने जांच कराई तो करोड़ों का गोलमाल सामने आया। जांच में खुलासा हुआ कि जिन केंद्रों को किसान के खाते में भुगतान करना था, उसने दो राइस मिलरों को करीब 4 करोड़ का भुगतान कर दिया। जांच के बाद दो राइस मिलर, केंद्र प्रभारी समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया, लेकिन 500 से अधिक किसानों का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। जिम्मेदारों ने पांच ऐसे लोगों के खाते में लाखों रुपये का भुगतान कर दिया जिनका पता विभाग के पास नहीं है। कांग्रेस नेता प्रदीप पांडेय कहते हैं कि कांग्रेस के अभियान के तहत गांव में किसानों से मांग पत्र भरवाया जा रहा है। बमुश्किल 20 फीसदी लोग ऐसे मिल रहे हैं जिन्होंने सीधे कई कटौती के बाद धान केंद्रों को बेचा है।

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