यूपीः अवैध शराब के कारोबार में चीनी मिलों के भी शामिल होने का शक, सैकड़ों लोग हो चुके हैं शिकार

पुलिस के एक सूत्र के अनुसार अवैध शराब के कारोबारियों की भट्ठियों और रासायनिक कारखानों के साथ मिलीभगत है, जहां से शराब की तस्करी कर उसे काफी सस्ती कीमत पर बेचा जाता है। बाद में इसे ड्रम में भरकर अवैध शराब बनाने वालों के ठिकानों पर पहुंचा दिया जाता है।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल में जहरीली अवैध शराब पीकर एक सौ से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस मामले में गठित पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच के घेरे में राज्य की कुछ चीनी मिलें और शराब की भट्ठियां आई हैं। अवैध शराब बनाने के कारोबार में लिप्त शराब तस्करों और गिरोहों को सस्ती शराब पहुंचाने वाले मौत के इन सौदागरों के गठजोड़ का भांडाफोड़ करने में दिनरात जुटे एसटीएफ ने पिछले एक महीने में प्रदेश में छापेमारी कर 10,000 लीटर से ज्यादा रेक्टिफायड स्प्रिट (औद्योगिक शराब) बरामद किया है।

अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली औद्योगिक शराब आसवित इथेनॉल है और आमतौर पर इसका इस्तेमाल पेंट, इत्र, प्रिंटिंग की स्याही और लेप बनाने में किया जाता है। यह सस्ती होती है। इसलिए आसवित इथेनॉल बनाने वाली मिलें अवैध शराब कारोबारियों को इसकी तस्करी करते हैं।

एसटीएफ ने जून में लखनऊ और कानपुर में सक्रिय एक बड़े आपराधिक गिरोह के पास से 5,750 लीटर रेक्टीफायड स्प्रिट बरामद किया। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना सूरज लाल यादव के साथ गिरोह के छह अन्य सदस्यों को भी दबोचा है। पूछताछ के दौरान पता चला कि यादव की हरियाणा की शराब भट्ठियों से सांठगांठ है। हरियाणा से भारी मात्रा में औद्योगिक शराब की तस्करी कर उसे उत्तर प्रदेश स्थित अवैध शराब बनाने वालों को मुहैया कराया जाता है।

जहरीली अवैध शराब पीने के कारण लगातार हो रही मौतों से नींद से जागे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध शराब बनाने वाले गिरोह पर राज्यव्यापी कार्रवाई शुरू की। दो महीने पहले बाराबंकी में हुई दुखद घटना में अवैध शराब पीने से 21 लोगों की मौत के बाद हरकत में आए योगी ने यह कार्रवाई शुरू की।

एसटीएफ ने दिल्ली और हरियाणा से उत्तर प्रदेश में आने वाले सैकड़ों टैंकर और निजी वाहनों को रोककर जांच शुरू की। एसटीएफ के महानिरीक्षक अमिताभ यश ने बताया, "रेक्टिफायड स्प्रिट की तस्करी में लिप्त गिरोह ने अपना जाल प्रदेश में फैला रखा है। तस्करी को लेकर पैदा होने वाले विवाद में हत्याएं भी हुई हैं। लेकिन छापेमारी में जुटे हमारे दस्ते इन गिरोहों का भांडाफोड़ करने को लेकर दृढ़संकल्पित हैं। पिछले डेढ़ साल में हमने अनगिनत मामले दर्ज किए हैं। हमारा लक्ष्य अवैध शराब के कारोबार में लिप्त गिरोहों पर शिकंजा कसना है।"

अमिताभ यश अंडरवर्ल्ड ऑपरेशन सिंडिकेट क्राइम से निपटने के अपने कौशल के लिए जाने जाते हैं। उनसे जब पूछ गया कि क्या रेक्टिफायड स्प्रिट की तस्करी में आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी और कुछ शराब भट्ठियों के शामिल होने की संभावना है तो आईजी ने कहा कि इस संबंध में सरकार को एक रिपोर्ट भेजी गई है।

एक तरफ उत्पाद शुल्क ज्यादा होने से शराब महंगी हो जाती है, तो दूसरी तरफ अवैध शराब 20 रुपये प्रति बोतल से भी कम दाम पर मिल रही है। कुछ जगहों पद यह 10 रुपये प्रति लीटर मिलती है। इसी साल फरवरी में सहारनपुर में अवैध शराब के कारण 50 लोगों की मौत की दुखद घटना के संबंध में एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि शराब में रेक्टिफायड स्प्रिट की मात्रा इतनी अधिक थी कि वह जहरीली हो गई थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रेक्टिफायड शराब की तस्करी करने वाले अपराधियों के गिरोहों की स्थानीय अधिकारियों के साथ सांठगांठ थी। पुलिस के एक सूत्र ने बताया, "गिरोहों की शराब की भट्ठियों और रासायनिक कारखानों के साथ मिलीभगत है, जहां से शराब की तस्करी कर उसे काफी सस्ती कीमत पर बेचा जाता है। बाद में इसे ड्रम में भरकर अवैध शराब बनाने वालों के ठिकानों पर पहुंचा दिया जाता है।"

उत्तर प्रदेश में अवैध शराब की भारी बिक्री इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की बीजेपी सरकार इससे होने वाली मौतों को लेकर कितनी गंभीर है। पिछले एक साल के दौरान अवैध शराब से हुई मौतों के बाद शुरू हुई एसटीएफ की जांच की रफ्तार भी हालांकि कई सवाल खड़े करती है।

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