उत्तर प्रदेश: अमेठी के मुसाफिरखाना तहसील में वकील-लेखपाल भिड़ंत, धक्का-मुक्की के बाद हालात तनावपूर्ण, PAC तैनात

सूचना मिलते ही मुसाफिरखाना कोतवाली पुलिस तत्काल तहसील पहुंची और दोनों पक्षों को अलग-अलग कर स्थिति को संभालने की कोशिश की। भीड़ ज्यादा होने और तनाव की आशंका को देखते हुए एहतियातन तहसील परिसर में पीएसी भी तैनात कर दी गई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील सोमवार को अचानक तनाव के केंद्र में आ गई, जब एसडीएम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे वकीलों और उनके समर्थन में उतरे लेखपाल आमने-सामने आ गए। पहले तीखी नोकझोंक हुई और देखते-ही-देखते बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।

क्या है पूरा विवाद

तहसील परिसर में पिछले कई दिनों से अधिवक्ता एसडीएम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि एसडीएम ने उनके साथी अधिवक्ता अभिनव कनॉजिया के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें अपमानित किया। इसी मुद्दे को लेकर तीन दिन पहले भी तहसील में जमकर नारेबाजी हुई थी।

सोमवार सुबह स्थिति तब और बिगड़ गई, जब लेखपाल संघ एसडीएम के समर्थन में खुलकर सामने आ गया। इसके बाद वकील संघ और लेखपालों के बीच माहौल गरमा गया। नारेबाजी के दौरान दोनों पक्षों के कुछ लोगों के बीच धक्का-मुक्की हो गई, जिससे तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई।


पुलिस और PAC की तैनाती

सूचना मिलते ही मुसाफिरखाना कोतवाली पुलिस तत्काल तहसील पहुंची और दोनों पक्षों को अलग-अलग कर स्थिति को संभालने की कोशिश की। भीड़ ज्यादा होने और तनाव की आशंका को देखते हुए एहतियातन तहसील परिसर में पीएसी भी तैनात कर दी गई है। फिलहाल पुलिस बल मौके पर मौजूद है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वकीलों का आरोप क्या है?

वकीलों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार लगातार अपमानजनक रहा है। उनका आरोप है कि सिर्फ अधिवक्ताओं के साथ ही नहीं, बल्कि बार अध्यक्ष के साथ भी इसी तरह का बर्ताव किया गया। अधिवक्ता संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक एसडीएम का स्थानांतरण नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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