हरिद्वार 'हेट कॉन्क्लेव' के भड़काऊ वीडियो वायरल होने के बाद जागी उत्तराखंड पुलिस, तीन दिन बाद दर्ज की एफआईआर

हरिद्वार में धर्म संसद के नाम पर 'हेट कॉन्क्लेव' कर भड़काऊ भाषण देने और धर्म विशेष के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इसके तीन दिन बाद उत्तराखंड पुलिस जागी है और उसने धारा 153ए के तहत मामला दर्ज किया है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उत्तराखंड के हरिद्वारा में 17, 18 और 19 दिसंबर को हुए तीन दिन के धर्म संसद के नाम पर जो हेट कॉन्क्लेव हुआ, उसमें दिए गए विवादित भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में साधू-संतों का चोला पहने लोग धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम प्रधानमंत्री न बनने देने, मुस्लिम आबादी न बढ़ने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर विवादित भाषण देते हुए दिखाई दिए हैं। इनके बीच एक महिला साध्वी भी दिखी हैं जो कॉपी-किताब रखने और हथियार उठाने जैसी बातें कह रही हैं।

इन भाषणों के वीडियो तेजी से वायरल होने और देश विदेश में इसकी आलोचना-निंदा के बावजूद हरिद्वार पुलिस या प्रशासन या केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पर चुप्पी साधे रखी। पुलिस और सरकार की इस चुप्पी पर लगातार सवाल उठते रहे।

आखिर खबर आई कि देहरादून में इस मुद्दे पर उत्तराखंड पुलिस के बड़े अफसरों की बैठक हुई जिसमें हरिद्वार के एसएसपी योगेंद्र रावत भी शामिल रहे। बैठक के बाद उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने एसएसपी हरिद्वार को इस मामले में क़ानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया जिसके बाद आईपीसी की धारा 153ए के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

आखिर तीन दिन तक इस मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया और कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इस बारे में डीजीपी ने कहा कि, "दोपहर में मामला संज्ञान में आया और उसके बाद क़ानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।" डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि, "इस तरह के भड़काऊ बयान ग़लत हैं, इसलिए हमने इन वीडियोज को सोशल मीडिया पर ब्लॉक करने को भी कहा है।"


इस कथित 'धर्म संसद' में बीजेपी अश्विनी उपाध्याय भी थे। यह वही अश्विनी उपाध्याय हैं जिन पर दिल्ली के जंतर मंतर पर मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। इसके अलावा इस आयोजन के कर्ताधर्ता जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और ग़ाज़ियाबाद के साधु यति नरसिंहानंद सरस्वती थे। उन्होंने भी भड़काऊ भाषण देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अन्य साधुओं में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर और दक्षिणवादी संगठन हिंदू रक्षा सेना के स्वामी प्रबोधानंद, निरंजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर मां अन्नपूर्णा समेत धर्म संसद के आयोजक पंडित अधीर कौशिक समेत हज़ार से अधिक महामंडलेश्वर, महंत, साधु-संत शामिल थे।

रोचक बात यह है कि इस भड़काऊ मामले में पुलिस ने जो मामला दर्ज किया है उनमें पहला नाम वसीम रिजवी का है। वसीम रिजवी वहीं शख्स हैं जिन्होंने हाल ही में इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया है और उनका नया नाम जितेंद्र त्यागी है।

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