मनी लॉन्ड्रिंग केस में वाटिका ग्रुप के CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार, 260 करोड़ की डील की जांच

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने वाटिका ग्रुप के अनिल भल्ला और गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है। जांच में प्लॉट और करोड़ों रुपये के लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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  • ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वाटिका ग्रुप के CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है।

  • जांच के मुताबिक, सात खरीदार कंपनियों ने प्लॉट के लिए करीब 260 करोड़ रुपये दिए, लेकिन कई प्लॉट अब तक नहीं मिले।

  • ईडी के अनुसार, खरीदारों से मिली रकम दूसरी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में ट्रांसफर की गई।

  • गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत ने दोनों आरोपियों को 3 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

गुरुग्राम में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाटिका लिमिटेड यानी वाटिका ग्रुप के चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है। ईडी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत की। दोनों को 29 सितंबर को गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी ने वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ पीएमएलए के तहत ECIR दर्ज की थी। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ओर से दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई, जिनमें धोखाधड़ी, रिहायशी प्लॉट नहीं देने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप हैं।

ईडी की जांच के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच सात खरीदार कंपनियों ने गुरुग्राम के वाटिका इंडिया नेक्स्ट, सेक्टर 84/85 और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2, सेक्टर 88ए में रिहायशी प्लॉट खरीदने के लिए करीब 260 करोड़ रुपये एडवांस में वाटिका लिमिटेड को दिए थे। इसके बाद 2014 और 2015 में प्लॉट के हिसाब से एग्रीमेंट भी किए गए। जांच में आरोप है कि बाद में प्रोजेक्ट का लेआउट बदल दिया गया और पहले आवंटित प्लॉटों के नंबर बदलकर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया।

140.73 करोड़ रुपये के प्लॉट अब भी अधूरे

ईडी के मुताबिक, प्रोजेक्ट की जमीन बाद में भी दूसरे खरीदारों को आवंटित और बेची जाती रही। वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में करीब 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए लगभग 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी प्लॉट 14 साल बाद भी डिलीवर नहीं किया गया। वहीं वाटिका इंडिया नेक्स्ट में भी केवल आंशिक डिलीवरी हुई। जांच के मुताबिक, इस तरह करीब 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट अभी भी अधूरे हैं।

जांच में अनिल भल्ला पर इन लेन-देन से जुड़े अहम फैसलों की निगरानी करने और गौतम भल्ला पर ग्रुप के प्रमुख प्रमोटर के तौर पर महत्वपूर्ण एग्रीमेंट साइन करने तथा जमीन वाली कंपनियों के निदेशक और नियंत्रक के रूप में भूमिका निभाने की बात सामने आई है। ईडी के अनुसार, जांच में मिले सबूतों से संकेत मिलता है कि बड़े फैसले दोनों ने मिलकर लिए थे।


22 ग्रुप कंपनियों के जरिए जमीन रखने का आरोप

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि प्रोजेक्ट की जमीन करीब 22 ग्रुप कंपनियों के जरिए रखी गई थी। एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों में कोई कर्मचारी नहीं था और उनका कोई अलग कारोबार भी नहीं था। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉर्पोरेट गारंटी देने और लैंड बैंक को मैनेज करने के लिए किया जाता था, जिसमें जमीन को वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखना भी शामिल था।

वाटिका लिमिटेड के बैंक खातों की जांच में ईडी को पता चला कि खरीदारों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स में नहीं किया गया, जिनके लिए पैसा लिया गया था। एजेंसी के मुताबिक, रकम दूसरी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में ट्रांसफर की गई, जो इन प्रोजेक्ट्स का हिस्सा नहीं थीं।

एक अन्य मामले में ईडी के अनुसार, 2024 में स्केलर वेंचर्स ने एग्रीमेंट टू सेल और बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इनपुट के मुताबिक, इसमें से 165 में से केवल 15 प्लॉट ही वापस खरीदे गए। इसके बाद बचे हुए 150 में से 14 प्लॉट स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ रुपये में बेच दिए गए। ईडी ने इस मामले में अब तक अपराध से हुई कमाई करीब 154.36 करोड़ रुपये आंकी है।

तलाशी में गहने और बैंक खाते फ्रीज

इससे पहले ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत सात ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, एक आरोपी के घर से मर्सिडीज-बेंज GLC 300, 1.3 किलो से ज्यादा सोने और हीरे के गहने बरामद किए गए, जिनकी कीमत करीब 1.55 करोड़ रुपये बताई गई। इसके अलावा करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और एफडीआर भी फ्रीज किए गए थे।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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