‘जी राम जी’ शिकायत निवारण नियम ‘एक और जुमला’: कांग्रेस

जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मंत्रालय द्वारा दो नवंबर 2026 को अधिसूचित अंतिम नियमों में मई 2026 में प्रकाशित मसौदा नियमों के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को काफी कमजोर कर दिया गया है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
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कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि इस सप्ताह अधिसूचित ‘ विकसित भारत-जी राम जी’ योजना से संबंधित शिकायत निवारण नियमों ने श्रमिकों को और अधिक ‘‘कमजोर’’ कर दिया है तथा उनके अधिकार को ‘‘एक और जुमला’’ बना दिया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि डिजिटल व्यवस्था के भ्रम का सहारा लेकर बनाए गए ये नियम स्पष्ट करते हैं कि श्रमिकों के अधिकार केवल कागजों तक सीमित रहेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत के सबसे महत्वपूर्ण अधिकार-आधारित कानूनों में से एक को महज प्रशासनिक योजना में बदलने की लगातार प्रक्रिया के तहत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने शिकायत निवारण संबंधी नियम अधिसूचित किए हैं। ये नियम श्रमिकों और लोगों को और अधिक कमजोर करते हैं।


जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि मंत्रालय द्वारा दो नवंबर 2026 को अधिसूचित अंतिम नियमों में मई 2026 में प्रकाशित मसौदा नियमों के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को काफी कमजोर कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि मसौदा नियमों में सात कार्य दिवस के भीतर शिकायत का निपटारा नहीं करने पर इसे अधिनियम का उल्लंघन माना जाना था और धारा 27 के तहत कार्रवाई का प्रावधान था। हालांकि, अंतिम नियमों से यह प्रावधान हटा दिया गया है।

रमेश ने आरोप लगाया कि निर्धारित समयसीमा तो बनी हुई है, लेकिन इसका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की अनिवार्यता हटाए जाने का भी मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, मसौदे में प्रारंभिक जांच या सामाजिक अंकेक्षण में वित्तीय अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने पर जिला कार्यक्रम समन्वयक को कानूनी सलाह लेकर प्राथमिकी दर्ज कराने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी थी। अंतिम नियमों से यह प्रावधान पूरी तरह हटा दिया गया है।


कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि तिमाही रिपोर्ट देने की अनिवार्यता भी हटा दी गई है। मसौदे में जिला कार्यक्रम समन्वयक को शिकायतों की संख्या, प्रकृति, निपटारे और लंबित मामलों का ब्योरा राज्य सरकार को देना था।

उन्होंने यह भी कहा कि 15 दिन में नहीं सुलझने वाली शिकायतों को डिजिटल मंच के जरिए स्वत: अगले उच्च अधिकारी के पास भेजने का प्रावधान भी कमजोर कर दिया गया है।

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