आखिरकार सच साबित हुई विनेश फोगाट की आशंका, कुश्ती महासंघ ने खेलने पर 26 जून तक लगाई रोक, नोटिस भी जारी किया
विनेश ने ने डब्ल्यूएफआई पर आरोप लगाया था कि उसे गोंडा में टूर्नामेंट में भाग लेने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले छह खिलाड़ियों में से वह एक थीं, इसीलिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है।

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने विनेश फोगाट पर अनुशासनहीनता और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए शनिवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया और यूडब्ल्यूडब्ल्यू के डोपिंग रोधी नियमों के तहत संन्यास से वापसी के लिये छह महीने का अनिवार्य नोटिस नहीं देने के कारण 26 जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंटों में उनके भाग लेने पर रोक लगा दी ।
डब्ल्यूएफआई के इस आदेश के मायने हैं कि दो बार विश्व चैम्पियनशिप की पदक विजेता रही विनेश को वापसी के लिये लंबा इंतजार करना होगा। वह गोंडा में रविवार से शुरू हो रही राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग चैम्पियनशिप के जरिये वापसी करना चाहती थी। पेरिस ओलंपिक 2024 में प्रतिस्पर्धा से अयोग्य करार दिये जाने के बाद उन्होंने कुश्ती को अलविदा कह दिया था।
विनेश ने हाल में ऐसी कार्रवाई की आशंका जताई थी। विनेश फोगाट ने डब्ल्यूएफआई पर आरोप लगाया था कि उसे गोंडा में टूर्नामेंट में भाग लेने से रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि डब्ल्यूएफआई के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले छह खिलाड़ियों में से वह एक थीं, इसीलिए उनके साथ जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है।
वहीं, पंद्रह पन्ने के नोटिस में डब्ल्यूएफआई ने आरोप लगाया कि विनेश के आचरण से पेरिस में भारतीय कुश्ती की छवि धूमिल हुई है और डब्ल्यूएफआई संविधान के प्रावधानों, यूडब्ल्यूडब्ल्यू अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के नियमों और डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन हुआ है। डब्ल्यूएफआई ने कहा कि वाडा के नियमों का पालन करना अनिवार्य है और अब अपनी पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी विनेश की है।
महासंघ के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह ने कहा, ‘‘हमें देखना होगा कि वाडा के नियमों का पालन किया गया है या नहीं। यह साबित नहीं हुआ है कि उन्होंने संन्यास से वापसी के लिये अनिवार्य शर्तें पूरी की हैं। उन्हें दोबारा खेलने से पहले छह महीने का अनिवार्य नोटिस पूरा करना होगा।’’
महासंघ ने उनसे चार प्रमुख आरोपों पर सफाई मांगी है जिसमें 2024 पेरिस ओलंपिक से अयोग्य करार दिये जाने, डोपिंग रोधी नियमों के तहत ठौर ठिकाना बताने में कथित तौर पर नाकाम रहने और आईओए द्वारा नियुक्त तत्कालीन तदर्थ समिति द्वारा मार्च 2024 में कराये गए ट्रायल में दो भार वर्गों में भाग लेना शामिल है।
महासंघ ने साफ तौर पर कहा है कि वह इस साल 26 जून तक किसी घरेलू टूर्नामेंट में भाग नहीं ले सकती जिसमें गोंडा में 10 से 12 मई तक होने वाला राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट भी शामिल है। नोटिस में कहा गया, ‘‘महासंघ को इस बात से संतुष्ट होना होगा कि आपने डोपिंग रोधी नियमों का कोई ऐसा उल्लंघन नहीं किया है, जिसके कारण आप भविष्य में होने वाली किसी भी प्रतियोगिता में महासंघ का प्रतिनिधित्व करने के अयोग्य हो जायें।’’
नोटिस में चार मई 2026 को अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (आईटीए) से मिले पत्र का भी जिक्र है जिसमें डोपिंग नियंत्रण के एक असफल प्रयास के तहत 18 दिसंबर 2025 को विनेश के नाम के आगे ‘टेस्ट छूटा’ लिखा गया था। यूडब्ल्यूडब्ल्यू के डोपिंग निरोधक नियमों की धारा 5.7 का हवाला देते हुए डब्ल्यूएफआई ने कहा कि विनेश 26 जून 2026 तक किसी प्रतिस्पर्धा में भाग नहीं ले सकती और घरेलू टूर्नामेंट भी नहीं खेल पायेगी।
महासंघ ने कहा कि यूडब्ल्यूडब्ल्यू के नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले हर खिलाड़ी को कम से कम छह महीने पहले विश्व ईकाई को सूचित करना होता है और इस दौरान टेस्ट के लिये भी उपलब्ध रहना जरूरी है और विनेश ने यह शर्त पूरी नहीं की है। महासंघ ने आरोप लगाया कि विनेश ने 14 दिसंबर 2024 को यूडब्ल्यूडब्ल्यू की डोपिंग रोधी ईकाई को ईमेल लिखकर कहा था कि वह अगस्त 2025 तक ब्रेक ले रही हैं और संकेत दिया था कि उसके बाद ही ठौर ठिकाने संबंधी दायित्वों का पालन कर सकेंगी।
महासंघ ने दावा किया कि 12 दिसंबर 2025 को भारतीय खेल प्राधिकरण, डब्ल्यूएफआई और टॉप्स साइ को लिखे पत्र में उन्होंने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 को लक्ष्य करके अभ्यास बहाल करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने यूडब्ल्यूडब्ल्यू के डोपिंग रोधी नियमों के तहत छह महीने का अनिवार्य नोटिस नहीं दिया। महासंघ ने कहा कि इस पत्र के छह दिन बाद ही डोपिंग नियंत्रण अधिकारी 18 दिसंबर 2025 को टेस्ट के लिये उन्हें तलाश नहीं पाये और उनके नाम के आगे ‘टेस्ट छूटा’ दर्ज किया गया है।
महासंघ ने नाडा द्वारा 25 सितंबर, 2024 को जारी किए गए ‘ठिकाना बताने में विफलता’ के पिछले नोटिस का भी जिक्र किया। यह नोटिस तब जारी किया गया था जब कथित तौर पर एक डोप नियंत्रण अधिकारी उस महीने की शुरुआत में सोनीपत स्थित उनके घोषित आवास पर उन्हें 'प्रतिस्पर्धा से इतर' टेस्ट के लिए ढूंढने में नाकाम रहा था।
पेरिस ओलंपिक में विनेश ने पहले दौर में जापान की धुरंधर युइ सुसाकी को हराया था। इसके बाद वह स्वर्ण पदक के मुकाबले से पहले सौ ग्राम वजन अधिक पाये जाने के कारण अयोग्य करार दी गई थी। महासंघ का कहना है कि इससे भारत ने न सिर्फ एक ओलंपिक पदक गंवाया बल्कि बदनामी भी हुई।
