'छात्रों की गूंज’: राहुल गांधी बोले, 'युवाओं के साथ 4 तरीके का अन्याय, 10 साल में 152 पेपर लीक, सजा एक को भी नहीं'

राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक की घटना घटी है, लेकिन एक को भी सजा नहीं मिली है। पेपर लीक में पूरा सिस्टम शामिल है।

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए। राहुल गांधी ने भारी बारिश के बाद देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर छात्रों से संवाद करते हुए कहा, ‘‘हमारे शैक्षणिक संस्थान स्वतंत्र होने चाहिए। संस्थानों पर किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए। कुलपति किसी एक संगठन के नहीं होने चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के प्रभारी भी किसी एक राजनीतिक संगठन के नहीं होने चाहिए।’’

राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक की घटना घटी है, लेकिन एक को भी सजा नहीं मिली है। पेपर लीक में पूरा सिस्टम शामिल है।

परीक्षा व्यवस्था में लचीलापन होना चाहिए: राहुल गांधी

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की कोई भी परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल और प्रश्नपत्रों का यादृच्छिकीकरण (रैंडमाइजेशन) करके परीक्षाएं एक दिन के बजाय कई दिनों में कराई जा सकती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में लचीलापन होना चाहिए और तकनीक एवं यादृच्छिकीकरण के जरिये प्रश्नपत्र लीक की समस्या को दूर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा आयोजित करना सरकार का काम है। यह काम निजी कंपनियों को नहीं दिया जा सकता क्योंकि उनका उद्देश्य पैसा कमाना होता है।’’ उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने पर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत दोषी ठहराकर सजा दी जानी चाहिए।


पेपर लीक पीड़ितों पर राहुल गांधी का वार

राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिन माता-पिता के बच्चों ने प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या की, सरकार ने उन्हें एक संदेश या चिट्ठी तक नहीं भेजी और न ही खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की स्थिति में छात्रों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए, दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए और छात्रों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘ये हमारे सुझाव हैं, जिन्हें आसानी से लागू किया जा सकता है। हम चाहते हैं कि इन्हें देश में जल्द से जल्द लागू किया जाए, ताकि हमारी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था निष्पक्ष बन सके।’

युवाओं के साथ 4 तरीके का अन्याय हो रहा है

राहुल गांधी ने देश के युवाओं की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का नौजवान चार गंभीर अन्यायों से जूझ रहा है। उन्होंने शिक्षा के बढ़ते खर्च, रोजगार की कमी, कठिन परीक्षाओं और पेपर लीक की घटनाओं को युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ बताया।

युवाओं के साथ 4 तरीके का अन्याय हो रहा है।

1. शिक्षा की कीमत 9 लाख रुपए

2. पांच में से चार दरवाजे बंद

3. 150 में सिर्फ 1 छात्र को सफलता

4. पेपर लीक का अन्याय


पेपर लीक से लाखों युवाओं का विश्वास टूटा

राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है, इससे लाखों युवाओं का विश्वास टूट रहा है। आरोप लगाया कि पेपर लीक में पूरा सिस्टम शामिल है, ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि कोचिंग माफिया, परीक्षा एजेंसियां और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कई छात्रों ने मंच से अपनी आपबीती साझा

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कई छात्रों ने मंच से अपनी आपबीती साझा की। एक छात्रा ने बताया कि परीक्षा के बाद पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो गया, जिससे उसकी महीनों की मेहनत बेकार हो गई। वहीं, एक अन्य छात्रा ने भर्ती परीक्षा दोबारा देने की मजबूरी बताई। छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग की।


मंच पर फफक-फफक कर रो पड़े मृतका रिया थापा के पिता

कार्यक्रम के दौरान मंच पर पेपर लीक मामले से जुड़ी मृतका रिया थापा के पिता भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी दिन-रात मेहनत से पढ़ाई करती थी, लेकिन पेपर लीक से निराश होकर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। अपनी बेटी को याद करते हुए वह मंच पर भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। उनकी बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद कई लोग भी भावुक हो गए।

अगर ऐसा है तो शिक्षा मंत्री की जरूरत ही क्या है?

छात्रों की गूंज' में आए अभिनय सर ने कहा कि NTA जैसी एजेंसियां अपनी गलती के लिए आपसे पैसे वसूलती है। हिंदुस्तान में 'पेपर लीक उद्योग' चल रहा है। NEET पेपर लीक होता है तो BJP के लोग दलील देते हैं कि इसमें शिक्षा मंत्री की गलती नहीं, उन्होंने पेपर लीक नहीं किया- ये तो सिस्टम की कमी है। अगर ऐसा है तो शिक्षा मंत्री की जरूरत ही क्या है?

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