नीतीश की नाकामियां छिपाने को पटना में मधुबनी पेन्टिंग्स से सजावट, लेकिन कलाकारों के मेहनताने पर दिखाया ठेंगा

कहीं छठ, तो कहीं किसी अन्य लोकप्रथा के जरिये बिहार और उसकी खासियत को दिखाने वाली पेंटिंग्स को आप पटना एयरपोर्ट और पटना जंक्शन से बाहर निकलने पर शहर की दीवारों पर देख सकते हैं। किसी भी तरफ से राजधानी में आने पर ये पेंटिंग्स बरबस आकर्षित करती हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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शिशिर

पीएम मोदी की महात्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी की बात कम-से-कम बिहार में तो हवा-हवाई ही है। ऐसे में साफ है कि बीजेपी-जेडीयू इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देने का हरसंभव कोशिश करेंगे।

यह हाल तब है जबकि बिहार में सिर्फ भागलपुर को ही स्मार्ट सिटी योजना के लिए चुना गया था। इस पर बड़ा बवाल भी मचा था। अंततः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दबाव में केंद्र सरकार उनके पसंदीदा बिहारशरीफ को भी इस सूची में डालने को विवश हो गई थी। इसके बाद भागलपुर और बिहारशरीफ के अलावा प्रदेश की राजधानी पटना और बिहार के दूसरे बड़े शहर मुजफ्फरपुर को स्मार्ट सिटी की योजनाएं तो मिल गईं, लेकिन किसी एक शहर में अब तक कोई एक काम नहीं हुआ है।

कुछ नए किस्से भी रोज सामने आ रहे हैं। स्मार्ट सिटी पटना में लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता-जागरूकता के बहाने सरकार ने शहर की सजावट का काम शुरू कराया था। इसके तहत पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालय के कलाकारों से शहर की सड़कों से लगी दीवारों पर मधुबनी पेन्टिंग्स बनवाई गई थी। कहीं छठ, तो कहीं किसी अन्य लोकप्रथा के जरिये बिहार और उसकी खासियत को दिखाने वाली इन पेंटिंग्स को आप पटना एयरपोर्ट से निकलने पर भी देख सकते हैं और पटना जंक्शन से बाहर आने पर भी। किसी भी तरफ से राजधानी में दाखिल होंगे तो यह पेंटिंग्स बरबस आकर्षित करती हैं। एहसास कराती हैं कि आप एक खास शहर में हैं।

यह काम पटना नगर निगम के बजट से कराया गया। इस काम के लिए ठेकेदार ने तो भुगतान हासिल कर लिया, लेकिन वह कलाकारों के नौ लाख रुपये लेकर फरार है। पुलिस के लिए तो वह फरार है, लेकिन वह बाकायदा इन कलाकारों को धमका रहा है। इस संबंध में राजधानी के जक्कनपुर थाने में प्राथमिकी के एक महीना गुजर जाने के बाद भी ठेकेदार भुगतान करने की जगह समझौता कर लेने की धमकी ही दे रहा है। ठेकेदार गौरव, रवि और जुल्फिकार की गिरफ्तारी के लिए पटना के एसएसपी का निर्देश भी बेकार है।

वहीं, पटना नगर निगम का अपना पक्ष है कि उसने जिस ठेकेदार को टेंडर दिया था, उसका पूरा भुगतान हो चुका है। इसलिए वह इसमें कुछ नहीं कर सकता। दूसरी तरफ पुलिस आरोपियों के फरार होने की बात कह कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है। कलाकारों की पेटिंग्स की बड़ाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक कर चुके हैं, लेकिन भुगतान के लिए दौड़ाए जाने को लेकर जगह-जगह की जा रही फरियाद पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है।


सुविधा नहीं, बस दिखावा

एक हजार करोड़ से पटना, 1580 करोड़ से मुजफ्फरपुर, 1325 करोड़ से भागलपुर और 900 करोड़ रुपए से बिहारशरीफ को स्मार्ट सिटी बनाने की योजनाएं आए हुए कई साल हो गए। भागलपुर का चयन तो 2016 में ही हो गया था। इसके दो साल के अंदर अन्य तीनों शहरों को भी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र और बिहार सरकार से राशि आवंटन प्राप्त हो गए। लेकिन बिहार में सुशासन का इकबाल इस हद तक कायम है कि एक-एक निविदा के लिए बार-बार टेंडर के बावजूद ठेकेदार काम के लिए सामने नहीं आ रहे।

राज्य में सक्रिय ठेकेदार कहते हैं कि विभिन्न स्तर पर भुगतान फंसाए जाने के अलावा कार्यस्थल पर रंगदारी की वारदातों के कारण भी पटना छोड़कर किसी अन्य शहर में काम करना मुश्किल है। पटना में काम करना संभव भी है तो यहां के प्रोजेक्ट अंदरूनी उठापटक और नेताओं की अपनी पसंद-नापसंद में फंस जाते रहे हैं।

नीतीश सरकार में साझेदार बीजेपी से जुड़ी भारतीय जनता युवा मोर्चा के रोहन आनंद कहते भी हैं कि केवल मुख्यमंत्री को दिखाने वाले ही काम स्मार्ट सिटी में भी किए जा रहे हैं, आम लोगों की सुविधा वाले नहीं। चुनाव के पहले जमीन पर काम किया गया होता तो पूरे बिहार में बीजेपी-जेडीयू के लिए यह बताना आसान होता कि उसके कारण यह सारी सुविधाएं मिली हैं। फिलहाल तो इसकी चर्चा खराब ही परिणाम देगी।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा कहते हैं कि अब तक किसी शहर में जन-सुविधा केंद्र- जैसे काम तक नहीं हो सके हैं। हालांकि, सजावट के नाम पर पटना के साथ भागलपुर में लाइटिंग आदि का काम जरूर एक नजर में दिख जाता है। सारे प्रोजेक्ट को मिलाकर देखेंगे तो तीन-चार साल गुजरने पर भी एक-दो प्रतिशत काम भी नहीं हुआ है।

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