पंजाब में 'युद्ध नशियां विरुद्ध' : मनसा में झोटा की हत्या के खिलाफ बंद रहा पूरा पंजाब, मान सरकार पर गंभीर सवाल

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या और पंजाब में बढ़ते नशे के कारोबार के खिलाफ राज्य के विपक्षी दलों और अन्य संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को पंजाब पूरी तरह बंद रहा। इस घटना से मान सरकार चुनाव के मौके पर इस मुद्दे को लेकर परेशानी में आ गई है।

नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में गुरुवार को पंजाब के तमाम शहरों में बंद रहा (फोटो - पीटीआई)
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  • नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ बंद रहा पंजाब

  • नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ बढ़ा लोगों का गुस्सा

  • सांसत में आम आदमी पार्टी सरकार

मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में गुरुवार को पूरे पंजाब में व्यापक बंद रहा। इस दौरान राज्य भर में बाजार, दुकानें और कई निजी स्कूल बंद रहे। झोटा के परिवार और एक संयुक्त कार्य समिति द्वारा बुलाए गए इस बंद को कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी, अकाली दल 'वारिस पंजाब दे', संयुक्त किसान मोर्चा, अन्य किसान संगठनों और राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों का समर्थन हासिल था।

अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, होशियारपुर, फिरोजपुर, संगरूर, बरनाला, मोगा, पटियाला और मानसा में बाजार बिल्कुल सुनसान नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सड़कें जाम कीं, जिससे ट्रैफिक में बदलाव करने पड़े, वहीं कुछ टोल प्लाजा पर लोगों को बिना टोल दिए ही जाने दिया गया। आपातकालीन सेवाएं चालू रहीं। इस व्यापक विरोध से नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर बढ़ता गुस्सा और झोटा की हत्या के बाद जवाबदेही की मांग साफ झलक रही थी। विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने आम आदमी पार्टी  सरकार पर अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

कई रास्ते बंद थे और पुलिस को वैकल्पिक रास्तों से ट्रैफिक पास कराना पड़ा (फोटो - पीटीआई)
कई रास्ते बंद थे और पुलिस को वैकल्पिक रास्तों से ट्रैफिक पास कराना पड़ा (फोटो - पीटीआई)

मंगलवार को मानसा में एक केमिस्ट की दुकान पर, झोटा (45) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह दुकान के मालिक अश्वनी कुमार के साथ हुई बहस को लाइव-स्ट्रीम कर रहा था। आरोप है कि झोटा ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचने को लेकर दुकानदार को टोका था। इस गोलीबारी में झोटा के चार साथी भी घायल हो गए। बाद में अश्विनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया।

इस हत्या ने नशीली दवाओं की संदिग्ध अवैध बिक्री से निपटने के लिए जिम्मेदार तंत्र  की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 'द ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इस केमिस्ट की दुकान पर 10 बार छापेमारी की गई थी और तीन बार इसका लाइसेंस निलंबित किया गया था। इस मामले ने इस बात की गहन जांच की मांग को और तेज कर दिया है कि बार-बार की गई कार्रवाई के बावजूद, यह कथित अवैध कारोबार आखिर कैसे चलता रहा।

कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के लगाए अवरोध हटा दिए (फोटो - पीटीआई)
कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के लगाए अवरोध हटा दिए (फोटो - पीटीआई)

झोटा के पिता, भीम सिंह ने मान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राजनीति में आने से तो इनकार किया, लेकिन आम आदमी पार्टी से राजनीतिक स्तर पर लड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक मदद उन परिवारों की भरपाई नहीं कर सकती, जिन्होंने नशे की वजह से अपने बच्चों को खो दिया है। उन्होंने कहा, "कुछ परिवारों ने (नशे के कारण) अपने दो-दो बेटों को खो दिया है। इतनी बड़ी क्षति की भरपाई किसी भी आर्थिक मदद से नहीं हो सकती।" उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर लोगों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। परिवार ने पुलिस और सरकार से जवाबदेही की भी मांग की है।

बुधवार को उस समय मानसा की सड़कों पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, जब एक भीड़ ने अश्वनी कुमार की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की, उसे ढहा दिया और फिर उसमें आग लगा दी। यह सब भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ, जिससे अपराध स्थल को फिर से तैयार करने और सबूतों को सुरक्षित रखने के काम में मुश्किलें आ सकती हैं। स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के बजाय, जिला प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को ढहाने के लिए जेसीबी मंगवा ली, जिसका कारण 'अवैध निर्माण' बताया गया। भीड़ के पूरी तरह से नियंत्रण अपने हाथ में लेने से पहले, प्रशासन ने खुद भी दुकान के एक हिस्से को ढहा दिया था। इस घटना ने प्रशासन द्वारा लोगों के गुस्से को संभालने के तरीके और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकार ने यह भरोसा दिलाया कि इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और 'युद्ध नशियां विरुद्ध' (नशों के खिलाफ जंग) अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकने में पुलिस की कथित विफलता को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच, मानसा सिटी की थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर बेअंत कौर को प्रशासनिक आधार पर निलंबित कर दिया गया। हालांकि, सरकार के इन आश्वासनों से लोगों का गुस्सा कम नहीं हुआ है।

इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कांस्टेबल को 15 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया है। इस बरामदगी ने राज्य के नशा-विरोधी अभियान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, इससे यह भी शक पैदा होता है कि कहीं कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लोग ही इस धंधे में शामिल तो नहीं हैं, जिसे रोकने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।

मान सरकार के लिए चुनौती अब केवल झोटा के कथित हत्यारे को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है। उसे इस आम धारणा का भी जवाब देना होगा कि बार-बार चलाए गए अभियानों और सरकारी वादों के बावजूद पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या बनी हुई है। इस बंद ने इस सवाल को पूरे राज्य के लिए एक राजनीतिक और प्रशासनिक परीक्षा में बदल दिया है।

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