West Bengal Election Results 2026: भवानीपुर काउंटिंग सेंटर पर बवाल, बीजेपी-टीएमसी के एजेंट भिड़े

भवानीपुर सीट पर मतगणना से पहले तृणमूल और बीजेपी एजेंटों में झड़प हुई। इस सीट पर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुकाबला है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आएगें। वोटों की गिनती शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर विधानसभा सीट पर टिकी है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। काउंटिंग से पहले ही माहौल गर्म हो गया, जब काउंटिंग सेंटर पर टीएमसी और बीजेपी एजेंटों के बीच झड़प की खबर सामने आई।

मतगणना से पहले ही टकराव, दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप

भवानीपुर में सखावत मेमोरियल स्कूल को मतगणना केंद्र बनाया गया है, जहां वोटों की गिनती होगी। सुबह गिनती शुरू होने से पहले ही तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के काउंटिंग एजेंट आमने-सामने आ गए।

कहासुनी के दौरान टीएमसी कार्यकर्ता ने एएनआई से आरोप लगाया कि बीजेपी एजेंट उन्हें फाइलें और कलम अंदर ले जाने से रोक रहे हैं, जबकि अपने एजेंटों को अनुमति दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए और उनकी पहचान ममता बनर्जी के समर्थक के रूप में है।

वहीं, बीजेपी के एक एजेंट ने पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी एजेंटों के पास पहचान पत्र नहीं हैं और वे बेवजह हंगामा कर रहे हैं। साथ ही दावा किया कि बीजेपी भवानीपुर समेत पूरे पश्चिम बंगाल में बहुमत से जीत रही है।


भवानीपुर: तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़

भवानीपुर विधानसभा सीट को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत किला माना जाता है। 2011 से इस सीट पर पार्टी को हार का सामना नहीं करना पड़ा है। 2011 और 2016 में ममता बनर्जी ने यहां से जीत दर्ज की थी।

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव में करीब 58 हजार वोटों से जीत हासिल की। वहीं, 2021 के मुख्य चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट को 28 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से अपने नाम किया था।

जातीय समीकरण: किसके पक्ष में जाएगा गणित?

भवानीपुर का चुनावी गणित भी काफी दिलचस्प है। यहां करीब 42 फीसदी मतदाता बंगाली हिंदू हैं, जबकि 34 फीसदी गैर-बंगाली हिंदू और 24 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

समुदाय के स्तर पर देखें तो 10 फीसदी मारवाड़ी, 8 फीसदी ब्राह्मण और करीब 26 फीसदी कायस्थ वोटर हैं। इसके अलावा, 15 से 17 हजार गुजराती मतदाता भी इस सीट पर अहम भूमिका निभा सकते हैं। गैर-बंगाली मतदाताओं में बिहारी, मराठी, ओड़िया, मारवाड़ी और उत्तर भारतीय समुदाय शामिल हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

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