'सरकार चाहे चार इंजन की हो, तीन इंजन की...', दिल्ली में वायु प्रदूषण पर फूटा लोगों का गुस्सा
स्थानीय नागरिक ने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार चाहे चार इंजन की हो, तीन इंजन की या डबल इंजन की, आम जनता को किसी से भी फायदा नहीं मिल रहा है।

राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-2 लागू किया गया है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को साफ हवा में सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
केंद्र और राज्य सरकार पर भड़के लोग
एक स्थानीय नागरिक ने प्रदूषण को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पिछले 15 से 20 दिनों से वह घर से बाहर नहीं निकले हैं। उन्होंने बताया कि वह रोजाना सुबह करीब एक घंटे टहलने जाते थे, लेकिन प्रदूषण के कारण अब यह संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों को स्वच्छ हवा और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो आम नागरिकों का जीवन कैसे चलेगा?
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार चाहे चार इंजन की हो, तीन इंजन की या डबल इंजन की, आम जनता को किसी से भी फायदा नहीं मिल रहा है। सरकार लोगों को हवा और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं तक उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है।
सरकार की मंशा और इच्छाशक्ति पर सवाल
स्थानीय निवासी देवेंद्र गोयल ने भी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए सरकार की मंशा और इच्छाशक्ति सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन कोई भी सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती नजर नहीं आ रही है।
गोयल ने कहा कि उनकी उम्र करीब 60 वर्ष हो चुकी है, लेकिन अब सड़क पर निकलते ही ऐसा महसूस होता है, जैसे दम घुट रहा हो। हवा इतनी जहरीली हो गई है कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि बीएस-6 वाहनों को लागू करने और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान जैसी पाबंदियां लगाने के बावजूद प्रदूषण में कोई खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
देवेंद्र गोयल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की निगरानी के बावजूद बिल्डरों द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कथित तौर पर पैसे लेकर निर्माण कार्यों को जारी रहने दिया जाता है। ऐसे में आम जनता प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि केवल वाहनों पर पाबंदियां लगाने से प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए निर्माण कार्यों, प्रशासनिक लापरवाही और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी सख्त कार्रवाई जरूरी है।
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