आरोपों में इन्फोसिस के टॉप अधिकारी, अधिक लाभ दिखाने के लिए आंकड़ों से हेरफेर का आरोप

देश की प्रतिष्ठित कंपनी इन्फोसिस के कुछ अज्ञात कर्मचारियों के एक समूह ने एक पत्र लिखकर कंपनी के टॉप रणनीतिकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपों के अनुसार कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने अधिक मुनाफे के लिए आंकड़ों में हेरफेर का सहारा लिया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उथलपुथल के लंबे दौर से गुजरने के बाद किसी तरह संभलता नजर आ रहा इन्फोसिस एक बार फिर विवादों में है। इन्फोसिस के वर्तमान सीईओ और सीएफओ पर कारोबार में अनैतिक आचरण के गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी के ही कुछ कर्मचारियों के एक अज्ञात समूह ने इन्फोसिस के बोर्ड को एख पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि इन दोनों अधिकारियों ने कंपनी का मुनाफा अधिक दिखाने के लिए अकाउंट्स में गंभीर छेड़छाड़ किया है।

'एथिकल एम्प्लॉइज' नाम के इन्फोसिस के अज्ञात कर्मचारियों के समूह ने बोर्ड के साथ ही अमेरिका के सिक्यूरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन को 22 सितंबर को भेजे एक पत्र में आरोप लगाया है कि अधिक लाभ और राजस्व हासिल करने के लिए कंपनी ने 'अनैतिक' आचरण किया है। अधिकारियों ने अपने इस कृत्य में ऑडिटर को भी अंधेरे में रखा। समूह ने दावा किया है कि उसके पास सबूत के तौर पर इनके ई-मेल और वायस रिकॉर्ड‍िंग भी हैं। अपने पत्र में कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने प्रमाण की कॉपियां मेल के साथ अटैच की हैं और वे इस मामले की तत्काल जांच चाहते हैं।

कर्मचारियों के पत्र में आरोप है कि इन्फोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कई बड़ी डील की समीक्षा रिपोर्ट को नजरअंदाज किया और जानबूझकर ऑडिटर और बोर्ड की सूचनाओं को छिपाया। कर्मचारियों के अनुसार पारेख ने उनसे मार्जिन दिखाने के लिए गलत अनुमान पेश करने के लिए कहा और बोर्ड में कई बड़ी डील के प्रजेंटेशन से रोका। पत्र में कंपनी के सीएफओ नीलांजन रॉय पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी के बोर्ड और ऑडिटरों की आवश्यक मंजूरी हासिल किए बिना 'निवेश नीति और एकाउंटिंग' में बदलाव किया, जिससे अल्पावधि में कंपनी का लाभ ज्यादा दिखे।

पत्र में कर्मचारियों ने इन अधिकारियों पर उन्हें चार्ज नहीं लेने देने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने कहा है कि उन्होंने अपने पत्र में कंपनी के कई बड़े सौदों में पेश राजस्व के आंकड़ों में अनियमितता के प्रमाण दिए हैं। इन प्रमाणों में कंपनी के सीएफओ निलांजन रॉय की वाइस रिकॉर्ड‍िंग भी है, जिसमें वह ये सब जानकारी कंपनी के ऑडिटर और बोर्ड से साझा नहीं करने की बात कर रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि सक्ष्य के तौर पर दिए वायस रिकॉर्डिंग और ईमेल से स्पष्ट होता है कि कैसे सीईओ और सीएफओ ने ऑडिटर की अनदेखी की और यहां तक कि ऑडिटर को बदलने की भी धमकी दी।

इस बीच इस विस्फोटक खुलासे के बाद सकते में आए इन्फोसिस ने इसको लेकर एक बयान जारी किया है। कंपनी ने कहा है कि कंपनी की परंपरा के अनुसार व्हिसिलब्लोअर से मिली शिकायत को कंपनी की ऑडिट कमिटी के समक्ष रख दिया गया है और इसपर कंपनी की नीति के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

Published: 21 Oct 2019, 6:01 PM
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