राजेश एक्सपोर्ट्स के 15 लाख करोड़ रुपये के घोटाले की जिम्मेदारी कौन लेगा, ईडी कब नींद से जागेगीः पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार को इस बारे में नहीं पता था कि इतना बड़ा घोटाला हो रहा है, अगर पता था तो किसे बचाया जा रहा था? इस घोटाले की, निवेशकों को हुए नुकसान की और एलआईसी के साथ हुए धोखे की जिम्मेदारी कौन लेगा।

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण क्षेत्र की कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) से जुड़े मामले को लेकर शुक्रवार को सवाल किया कि 15 लाख करोड़ रुपये के घोटाले की जिम्मेदारी सरकार में कौन लेगा और प्रवर्तन निदेशालय कुंभकर्ण की नींद से कब जागेगा?
पवन खेड़ा ने कहा कि अब अगर हम किसी से विपक्ष की हैसियत से भी अगर पूछ लेते हैं कि क्या आपके खाते में 15 लाख आए या नहीं आए बड़े खिसिया जाते हैं लोग। इधर नरेंद्र मोदी जी के दोस्त राजेश भाई ने 15 लाख करोड़ का घोटाला कर लिया। मेहुल भाई, विजय भाई, नीरव भाई, ललित भाई, राजेश भाई- किसके दोस्त? नरेंद्र भाई के। यह भाईचारा जो है ना इस देश में, यह भाईचारा बड़ा महंगा पड़ रहा है इस देश को।
पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार और पूंजी बाजार नियामक सेबी इस मामले पर महीनों तक कुंडली मारकर बैठे रहे, जबकि यह एलआईसी के करोड़ों निवेशकों और छोटे शेयरधारकों के हित से जुड़ा मामला था। खेड़ा ने कहा, ‘‘3 जून, 2026 को सेबी का आदेश आया कि राजेश मेहता और उनकी कंपनी को ट्रेडिंग करने से रोक दिया गया है। मगर सवाल यह है कि सेबी को इस मामले में करना क्या चाहिए था?’’
खेड़ा ने कहा कि सेबी में राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर्स पर बहुत बड़े पैमाने की वित्तीय धोखाधड़ी और पैसे के गबन का आरोप लगा। सेबी में जांच शुरू हुई। सेबी में जांच शुरू होने में भी 7 महीने का विलंब हुआ। 2024 में जब माधवी पुरी बुच सेबी की चेयरपर्सन थीं, शिकायत आई, उस शिकायत पर सेबी 7 महीने तक बैठा रहा, यह आपको नोट करना चाहिए। अब जब सेबी जागा, सेबी ने एक आदेश पारित किया जिससे राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर्स की खरीद-फरोख्त बंद हो गई।
पवन खेड़ा ने कहा कि ये जो पूरा प्रकरण है, इसमें जो महत्वपूर्ण बात है- एलआईसी, जिसमें हमारे-आपके पैसे लगे होते हैं। एलआईसी ने मार्च 2016 में 2% से थोड़ा कम निवेश राजेश एक्सपोर्ट्स में किया था, लेकिन 31 मार्च, 2026 तक एलआईसी ने 10.8 लगभग 11% निवेश राजेश एक्सपोर्ट में कर दिया। यह तो सिर्फ एलआईसी की बात है। इसके अलावा छोटे निवेशकों ने भरपूर तरीके से इसमें निवेश किया। आप हैरान होंगे कि जो मार्केट कैपिटलाइजेशन राजेश एक्सपोर्ट्स की फरवरी 2023 में थी, वो 28,000 करोड़ की थी। आज वह 5 जून को गिरकर 3000 करोड़ की है। 25,000 करोड़ इस देश के निवेशकों का इस घोटाले में डूबा।
पवन खेड़ा ने कहा कि 2015 में राजेश एक्सपोर्ट ने 400 मिलियन डॉलर की इन्वेस्टमेंट करके 'वैलकैम्बी', एक सबसे बड़ी स्विट्जरलैंड की गोल्ड रिफाइनरी खरीदी। इतना बड़ा पैसा कोई हिंदुस्तान की कंपनी लगा रही है- 400 मिलियन डॉलर स्विट्जरलैंड की एक गोल्ड रिफाइनरी खरीदने में- सेबी ने क्या इसको स्क्रूटिनाइज करना उचित नहीं समझा कि साहब, यह पैसा कहां से आया है, कौन हैं इसके प्रमोटर्स? 400 मिलियन 2015 में, आज क्या कीमत होगी उसकी? आज डॉलर के हिसाब से आप देख लीजिए।
खेड़ा ने कहा कि यह कंपनी राजेश एक्सपोर्ट क्या है? गोल्ड और जेम्स प्रोसेसिंग करती है, रिफाइनरी करती है, जो भी रिफाइन करती है। इसका एनर्जी स्टोरेज सेक्टर से, बैटरीज से कोई लेना-देना नहीं। लेकिन मार्च 23, 2022 को राजेश एक्सपोर्ट्स को 5 गीगावाट की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का काम मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज से मिला- 18,100 करोड़। ये क्या रिश्ता है राजेश एक्सपोर्ट का, राजेश भाई का नरेंद्र भाई की सरकार से कि इतना भारी काम। इनके खिलाफ सात प्रतिद्वंदी थे। वो सातों प्रतिद्वंदी, सातों बिडर्स एनर्जी स्टोरेज सेक्टर के थे। उनको नजरअंदाज कर दिया, उनको साइड में बैठा दिया, राजेश भाई को ये काम दे दिया। जिनका काम सोने, हीरे, जवाहरात का काम है, उनको आपने बैटरी एनर्जी स्टोरेज का काम दे दिया। क्यों? क्या रिश्ता है ये?
उन्होंने कहा कि भारत में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए जो नियम बने हैं, उन नियमों का हवाला देते हुए सेबी को राजेश एक्सपोर्ट्स से जानकारियां मांगनी चाहिए थीं। खेड़ा ने कहा, ‘‘सेबी को राजेश एक्सपोर्ट्स से उसके कैश फ्लो के बारे में पूछना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस मामले में फोरेंसिक ऑडिट जैसा कदम उठाया जाना चाहिए था, लेकिन सेबी शिकायत पर सात महीने तक कुंडली मारकर बैठी रही।’’
खेड़ा ने सवाल किया, ‘‘राजेश एक्सपोर्ट्स ने पांच साल में 15.15 लाख करोड़ रुपये का राजस्व दिखा दिया, लेकिन उसके रिकॉर्ड बिना सत्यापन के स्वीकार कर लिए गए, आखिर ऐसा किसके कहने पर किया गया?’’ उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई, सेबी और एसएफआईओ जैसी एजेंसियां क्या कर रही थीं?
कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी किया, ‘‘क्या मोदी सरकार को इस बारे में नहीं पता था कि इतना बड़ा घोटाला हो रहा है, अगर पता था तो किसे बचाया जा रहा था? इस घोटाले की, निवेशकों को हुए नुकसान की और एलआईसी के साथ हुए धोखे की जिम्मेदारी कौन लेगा.. नरेन्द्र मोदी लेंगे या निर्मला सीतारमण?’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘हम जानना चाहते हैं कि कुंभकर्ण की नींद सोने वाली ईडी कब जागेगी?’’
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का एकीकृत राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। सेबी ने आरईएल के प्रवर्तक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में लेनदेन से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
इसके साथ ही कंपनी को वित्तीय विवरण और संबंधित पक्षों के लेनदेन का सही और पारदर्शी खुलासा करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय अनियमितता के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसके राजस्व के आंकड़े सही हैं और सेबी के साथ जानकारी साझा करने या समझ में अंतर के कारण यह स्थिति बनी हो सकती है। वहीं, इस पूरे मामले पर सरकारी की ओर से कोई बयान नहीं आया है।
