अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर किसानों को सर्मथन देने दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचीं महिलाएं, लगा रहीं ‘इंकलाबी मेहंदी’

किसान लगातार दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान केंद्र की मोदी सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी यह भी मांग है कि सरकार एमएसपी पर लीगल गारंटी दे।

फोटो: विपिन
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नवजीवन डेस्क

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं। किसानों के आंदोलन को 100 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है। किसानों को देश के हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने दिल्ली बॉर्डर का रुख किया है। गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचकर महिलाओं ने किसानों का समर्थन किया। यहां पहुंची महिलाएं एक दूसरे को मेहंदी लगाकर आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता दिखा रही हैं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने इस मेहंदी को इंकलाबी मेहंदी नाम दिया है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कृषि कानूनों के खिलाफ टीकरी बॉर्डर पर भी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं हैं।

किसान लगातार दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान केंद्र की मोदी सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही उनकी यह भी मांग है कि सरकार एमएसपी पर लीगल गारंटी दे, लेकिन किसानों की मांगों को सरकार सुनने के लिए तैयार नहीं है। सरकार का कहना है कि वह तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। उधर, किसानों का कहना है कि जब तक यह तीन कृषि कानून वाप स नहीं होते और एमएसपी पर लीगल गारंटी उन्हें नहीं मिलती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। लगातार किसान आंदोलन को राकेश टिकैत धार देने में जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान पंचातें आयोजित की जा रही हैं और कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान के बार में बताया जा रहा है।

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Published: 08 Mar 2021, 11:34 AM
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