दुनिया की खबरें: रूस की ड्रोन कार्रवाई पर भड़के रोमानिया के राष्ट्रपति और ईरान पर ट्रंप की आर्थिक नीति से चीन नाराज
रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने ड्रोन कार्रवाई पर रूस की कड़ी आलोचना की। साथ ही स्पष्ट किया कि हम हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। हम नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर सतर्क हैं।

रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन ने गुरुवार को 'नेपच्यून डीप' प्लेटफॉर्म के पास ड्रोन कार्रवाई पर रूस की कड़ी आलोचना की। साथ ही स्पष्ट किया कि हम हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। हम नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर सतर्क हैं।
निकुसोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में रोमानियाई सशस्त्र बलों और दो रोमानियाई एफ-16 लड़ाकू विमानों के पायलटों को काला सागर में 'नेपच्यून डीप' प्लेटफॉर्म के पास मौजूद समुद्री ड्रोन को नष्ट करने के सफल मिशन के लिए बधाई दी।
उन्होंने कहा, ''मैं कोस्ट गार्ड को भी बधाई देता हूं, जिन्होंने इलाके में ड्रोन की मौजूदगी की सूचना तुरंत दी। इस कार्रवाई में सबसे पहली प्राथमिकता प्लेटफॉर्म पर काम कर रहे लोगों की जान की सुरक्षा करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को किसी भी संभावित खतरे से बचाना था।''
उन्होंने कहा, ''मैं रूसी संघ की ओर से इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना घटनाओं में बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करता हूं। हम अपने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर सतर्क बने हुए हैं, ताकि अपनी सुरक्षा कर सकें और इस तरह की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।''
वहीं, यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस कार्रवाई को 'हाइब्रिड युद्ध' का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि उभरते खतरों से निपटने के लिए यूरोप को रक्षा क्षमताएं मजबूत करने की जरूरत है।
प्रेसिडेंट उर्सुला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''गुरुवार को रोमानिया ने काला सागर में अपने 'नेपच्यून डीप' प्लेटफॉर्म के पास विस्फोटकों से लदे एक नौसैनिक ड्रोन को नष्ट कर दिया। धमकियों का अभियान चल रहा है, जो हमारे नागरिकों के बीच चिंता पैदा कर रहा है और हमारे संघ (यूरोपीय यूनियन) को बांटने की कोशिश कर रहा है। यह एक तरह का हाइब्रिड युद्ध है।''
उन्होंने कहा कि हमारे संघ का मूल उद्देश्य शांति बनाए रखना है। आज शांति बनाने का मतलब यह भी है कि हमारे पास उकसावे और आक्रामक कार्रवाइयों को रोकने की क्षमता हो। हमारा 'रेडीनेस 2030 एजेंडा' इसके लिए 800 अरब यूरो तक की राशि जुटा रहा है। यूरोपियन ड्रोन डिफेंस इनिशिएटिव और ईस्टर्न फ्लैंक वॉच के जरिए हम यूरोप में उत्पादन बढ़ा रहे हैं, ताकि सदस्य देशों को उनकी जरूरत की रक्षा क्षमताएं उपलब्ध कराई जा सकें, ताकि हम उभरते खतरों का तेजी, एकजुटता और दृढ़ संकल्प के साथ मुकाबला कर सकें।
ईरान के खिलाफ ट्रंप की 'आर्थिक हमले' वाली बात चीन को नहीं आई रास
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कैंपेन की आलोचना की है जिसके तहत वो ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। बीजिंग के मुताबिक ऐसी पाबंदियां स्थिति को और उलझा सकती हैं। "इकोनॉमिक डी-डे" कैंपेन की आलोचना करते हुए कहा कि और ज्यादा प्रतिबंध लगाने से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद नहीं मिलेगी।
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, "प्रतिबंध लगाने और दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं होता है।"
इसमें आगे कहा गया, "चीन संबंधित पक्षों से जिम्मेदार कदम उठाने और कूटनीतिक व राजनीतिक तरीकों से मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करता है।"
दरअसल, इन कदमों से चीन पर खास तौर पर असर पड़ेगा, क्योंकि एनालिटिक्स फर्म केप्लर के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वह ईरान से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों, बैंकों या शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, तो इसका सीधा असर अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है। यही ट्रंप की नई आर्थिक रणनीति का सबसे संवेदनशील मोर्चा हो सकता है।
अमेरिका पहले भी ईरानी तेल की खरीद और उसके परिवहन से जुड़े चीन स्थित रिफाइनरी तथा शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अब ट्रंप की ताजा चेतावनी से संकेत मिल रहा है कि वाशिंगटन ऐसे प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा सकता है।
गुरुवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर 'इकोनॉमिक डी-डे' का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वो ईरान के साझेदारों और मददगारों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कदम उठाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में सफल नहीं रहे।'
यूरोप में बढ़ेगा जंगल की आग का खतरा, सदी के अंत तक 39 फीसदी अधिक क्षेत्र जलने का अनुमान
यूरोप के कई देश जंगल की आग में झुलस रहे हैं। आने वाले दशकों में यूरोप के जंगलों में आग का खतरा और गंभीर हो सकता है और इसकी आशंका गुरुवार को प्रकाशित एक स्टडी में की गई है। जिसके मुताबिक वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के बेहतर परिदृश्य में भी सदी के अंत तक यूरोप में जंगल की आग से जलने वाला क्षेत्र करीब 39 फीसदी बढ़ सकता है।
ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, अगर वैश्विक तापमान वृद्धि को करीब 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर लिया जाता है, तब भी गर्म और शुष्क मौसम की बढ़ती अवधि जंगलों को आग के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएगी। तापमान बढ़ने के साथ मिट्टी और वनस्पतियों में नमी कम होगी, जबकि तेज हवाएं आग को तेजी से फैलाने में मदद करेंगी।
सबसे खराब स्थिति में तस्वीर और भयावह हो सकती है। यदि सदी के अंत तक वैश्विक तापमान वृद्धि 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती है, तो यूरोप में जंगल की आग से जलने वाला क्षेत्र मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग तीन गुना हो सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा जलवायु नीतियों के आधार पर दुनिया करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की राह पर है। ऐसे में जंगल की आग का बढ़ता खतरा यूरोप के लिए भविष्य की नहीं, बल्कि तत्काल ध्यान देने वाली चुनौती बन गया है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के शोधकर्ता माइक बिलिंग ने कहा कि बेहतर वन प्रबंधन और प्रभावी अग्निशमन व्यवस्था से आग से होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊंचे कार्बन उत्सर्जन के बीच केवल आग बुझाने की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि दशकों तक जंगलों में आग को पूरी तरह दबाने की नीतियों के कारण सूखी वनस्पति और अन्य ज्वलनशील सामग्री जमा होती गई है। इससे अब कम संख्या में लगने वाली आग भी बड़े और बेहद विनाशकारी ‘मेगा-फायर’ का रूप ले सकती है।
इमरान खान मामले में पाक सरकार को झटका, पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने लौटाई
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को गुरुवार को जोर का झटका दिया। जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर सुनाए फैसले के विरोध में सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे शीर्ष अदालत ने लौटा दिया।
मामला इमरान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित करने का था। कोर्ट ने अपने 18 अगस्त के आदेश में सरकार को इसकी व्यवस्था करने को कहा था।
प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने अधूरे दस्तावेज और पेपर बुक होने का हवाला देते हुए याचिका वापस की। हालांकि, एक सूत्र के मुताबिक सरकार आवश्यक संशोधनों के साथ याचिका दोबारा दाखिल कर सकती है। इसके साथ ही रजिस्ट्रार की आपत्तियों के खिलाफ अपील भी की जा सकती है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई के महासचिव सलमान अकम रजा ने दावा किया कि अदालत की आपत्तियों के बाद सरकार ने अपनी पुनर्विचार याचिका वापस ले ली है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा, " सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश का पालन न करने का कोई बहाना नहीं है और इमरान खान को तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल स्थानांतरित किया जाना चाहिए।"
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए, जहां बहु-विषयक चिकित्सा बोर्ड उनकी जांच और उपचार करे।
तीन सदस्यीय पीठ ने यह अंतरिम आदेश जारी किया था। अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में इमरान को अस्पताल में भर्ती कराने, उनके निजी चिकित्सकों और परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनके चिकित्सा रिकॉर्ड परिवार को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
अदालत ने इमरान के निजी चिकित्सक और उनकी बहन को उनके इलाज से जुड़े रहने की अनुमति भी दी थी। साथ ही अधिकारियों को परिवार के साथ नियमित संपर्क सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए इस आदेश की समीक्षा और इसे वापस लेने की मांग की थी। सरकार ने तर्क दिया था कि आदेश जेल नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है तथा इमरान खान के मामले में भेदभावपूर्ण है।
कोलंबिया भूकंप: प्रभावित इलाकों में 30 दिनों के लिए इमरजेंसी घोषित
कोलंबिया के राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रीला ने 10 अगस्त को आए भूकंप से प्रभावित देश के कुछ हिस्सों में 30 दिनों के लिए आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आपातकाल घोषित करने वाले एक आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह आदेश बुधवार (स्थानीय समयानुसार) बोगोटा में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जारी किया गया। इसमें वैले डेल काउका, रिसारल्डा और कैलडास समेत 15 प्रभावित विभागों (प्रांतों) को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम एक गंभीर सार्वजनिक आपदा से निपटने के लिए उठाया गया है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, एस्प्रीला ने कहा कि आपातकालीन उपायों का उद्देश्य सिर्फ क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि कारोबारों को फिर से खड़ा करना और स्कूलों, अस्पतालों जैसी जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं को बहाल करना भी है।
उन्होंने कहा कि कोलंबिया इस समय अपने गणराज्य के इतिहास की सबसे जटिल वित्तीय स्थिति का सामना कर रहा है, इसलिए असाधारण कदम उठाना जरूरी हो गया है।
राष्ट्रपति ने बताया कि उनकी सरकार मौजूदा राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पिछली सरकार के कुछ कम प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च में कटौती करेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सबसे कमजोर और जरूरतमंद लोगों पर इसका कोई नकारात्मक असर न पड़े।
कोलंबिया की नेशनल यूनिट फॉर डिज़ास्टर रिस्क मैनेजमेंट की ओर से बुधवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के भूकंप में 319 लोगों की मौत हो चुकी है, 4,469 लोग घायल हुए हैं और 260 लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 364 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।
एजेंसी ने बताया कि 15 विभागों के 476 नगरपालिकाएं इस आपदा से प्रभावित हुई हैं और करीब 2,72,830 लोग इसकी चपेट में आए हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव दल अब भी मलबे में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 358 लोगों को बचाया जा चुका है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची बोले, 'ट्रंप का इकोनॉमिक डी-डे अभियान, ध्यान भटकाने की कोशिश'
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 'इकोनॉमिक डी डे' प्रतिबंध उन पर ही भारी पड़ेगा। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ इकोनॉमिक डी डे का ऐलान किया था, जिसका खामियाजा कथित तौर पर ईरान के मददगारों या साझेदारों को भी भुगतना पड़ेगा।
ट्रंप के प्रतिबंध अभियान को सिरे खारिज करते हुए दावा किया कि तथाकथित 'इकोनॉमिक डी-डे' अमेरिका के घरेलू मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
अराघची ने एक्स पोस्ट में लिखा, "यह कदम वाशिंगटन के बेहिसाब कर्ज और बढ़ते ब्याज खर्च से ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है।" उन्होंने आगे लिखा, "विफल नीतियों पर अड़े रहने से केवल और हार ही मिलेगी।"
प्रतिबंध को आर्थिक आतंकवाद का नाम देते हुए कहा कि अमेरिका का "आर्थिक आतंकवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और दुनिया भर की संप्रभुता के लिए खतरा है।"
प्रेस के सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने ईरान के साथ कारोबार या वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। ट्रंप ने इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार देते हुए ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के अभियान का संकेत दिया।
28 फरवरी 2026 में शुरू हुई इजरायल-अमेरिका की ईरान पर संयुक्त कार्रवाई अपने छठे महीने की ओर बढ़ रही है। अवधि लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सैन्य कार्रवाई के बाद अब वाशिंगटन का जोर ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने पर केंद्रित है। अमेरिकी अभियान में तेल की तस्करी, वित्तीय लेनदेन और ईरान की आय के दूसरे स्रोतों को निशाना बनाने की तैयारी है।
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