यूपी: योगी कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, किसका बढ़ा कद और किसकी घटी ताकत? पढ़िए

योगी कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा हो गया है। मनोज पांडे और भूपेंद्र चौधरी को नई जिम्मेदारियां मिली हैं, जबकि कई मंत्रियों के विभाग कम किए गए हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में 10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार रविवार को नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया गया। इसके साथ ही उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया, जिनमें कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बड़े विभाग लेकर नए मंत्रियों को दिए जा सकते हैं। विभागों के बंटवारे ने साफ कर दिया कि सरकार के भीतर शक्ति संतुलन किस दिशा में जा रहा है और किन नेताओं का राजनीतिक कद बढ़ा है।

सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए मनोज पांडे को मिले विभागों को लेकर रही। माना जा रहा था कि भूपेंद्र चौधरी को लोक निर्माण विभाग जैसा बड़ा मंत्रालय मिल सकता है, लेकिन उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग सौंपा गया। वहीं, मनोज पांडे को खाद्य एवं रसद और नागरिक आपूर्ति जैसा बड़ा और सीधे जनता से जुड़ा विभाग मिला है।

किस मंत्री से कौन सा विभाग गया?

एमएसएमई विभाग पहले राकेश सचान के पास था। उनके जिम्मे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग और हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्रालय भी थे। अब एमएसएमई विभाग भूपेंद्र चौधरी को दिए जाने के बाद राकेश सचान के पास केवल खादी एवं रेशम उद्योग विभाग ही बचा है। इसे मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उनके घटते राजनीतिक कद के तौर पर देखा जा रहा है।

इसी तरह खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग पहले दयाशंकर मिश्र के पास था, लेकिन अब यह विभाग उनसे लेकर मनोज पांडे को दे दिया गया है। दयाशंकर मिश्र के पास अब सिर्फ आयुष विभाग रह गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे भी बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


ब्राह्मण और जाट समीकरण पर खास नजर

मनोज पांडे को कैबिनेट में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जगह मिली है। ऐसे में उन्हें खाद्य एवं रसद जैसा अहम विभाग देकर बीजेपी ने ब्राह्मण वर्ग को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि इससे सरकार में उनका राजनीतिक कद और मजबूत होगा।

वहीं, भूपेंद्र चौधरी जाट बिरादरी से आते हैं और बीजेपी के बड़े जाट चेहरों में गिने जाते हैं। हालांकि, बीजेपी गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल भी शामिल है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे को जाट राजनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

एमएसएमई विभाग को भले पारंपरिक तौर पर भारी मंत्रालय नहीं माना जाता हो, लेकिन इससे जुड़ी मुख्यमंत्री रोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना, यूपी स्मॉल इंडस्ट्री कॉरपोरेशन और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना जैसी कई बड़ी योजनाएं सीधे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की निगरानी में रहती हैं। यही वजह है कि इस विभाग को भी सरकार के अहम मंत्रालयों में गिना जाता है।

योगी ने दिखाया फैसला उन्हीं का चलता है

मंत्रिमंडल विस्तार में दो कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार मंत्री और चार राज्य मंत्रियों ने 10 मई को शपथ ली थी, जबकि विभागों का बंटवारा 17 मई को हुआ। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकातों को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहीं। माना जा रहा था कि विभागों का फैसला दिल्ली से तय होगा, लेकिन अंतिम बंटवारे ने संकेत दे दिया कि फैसला पूरी तरह मुख्यमंत्री के स्तर पर हुआ।

विभागों के बंटवारे में कई और नेताओं की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। स्वतंत्र प्रभार मंत्री बने सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग मिला है। इससे पहले राज्य मंत्री रहते उनके पास ऊर्जा जैसा अहम विभाग था। वहीं, कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास, कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, सुरेंद्र दिलेर को राजस्व और हंसराज विश्वकर्मा को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में जिम्मेदारी दी गई है।

कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद यह साफ हो गया है कि योगी सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ-साथ सत्ता के भीतर अपना नियंत्रण भी मजबूती से बनाए रखा है।

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