आखिर योगी सरकार ने राम मंदिर के दान में घोटाले की बात मानी! जांच के लिए तीन सदस्यों की SIT बनाई
अखिलेश यादव ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और खुलासे की मांग उठाते हुए कहा था कि यह सामने आना चाहिए कि देश की सनातनी आस्था से खिलवाड़ करने वालों के पीछे कौन लोग हैं और चढ़ावे में कथित चोरी का पाप करने वालों को कौन बचा रहा है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्रों से धनराशि चोरी के मामले में शासन ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव, वित्त नील रतन को रखा गया है। एसआईटी सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
दरअसल, दान पात्रों से धनराशि चोरी के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही चर्चाओं और राजनीतिक बयानों के दबाव के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (एसआईटीई) से जांच कराने की मांग की थी। एक प्रवक्ता के अनुसार, ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से मांग की थी कि मामले को लेकर भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए एसआईटी गठित की जानी चाहिए, ताकि तथ्य जनता के सामने आ सकें और अफवाहों पर विराम लगे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया था और जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि 'चढ़ावा चोरी कांड’ को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं और मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ट्रस्टी क्या कहना चाहते हैं, यह किसी को समझ नहीं आ रहा है। हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें अखबारों, टीवी चैनलों, मीडिया पोर्टलों और यूट्यूब चैनलों के माध्यम से प्रसारित की जा रही हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पुलिस इस संबंध में कुछ नहीं कहती, लेकिन बाद में किसी दबाव में आकर खंडन जारी करती है। उन्होंने दावा किया कि जनता के आक्रोश को देखकर बीजेपी के नेता असहज हो गए हैं। सपा प्रमुख ने कहा बीजेपी के संगी-साथी इस मामले से दूरी बनाने के लिए हमेशा की तरह भूमिगत हो गए हैं। लखनऊ की सरकार ने अपने मुंह पर ताला लगा लिया है और दिल्ली की सरकार का ड्रोन और दूरबीन पता नहीं कहां हैं।
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अखिलेश यादव ने कहा कि इन अस्पष्ट परिस्थितियों के कारण देश और विदेश में सनातन धर्मावलंबियों के बीच आशंकाएं और बढ़ गई हैं। इस मामले की निष्पक्ष जांच और खुलासे की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यह सामने आना चाहिए कि देश की सनातनी आस्था से खिलवाड़ करने वालों के पीछे कौन लोग हैं और चढ़ावे में कथित चोरी का पाप करने वालों को कौन बचा रहा है।
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