CM बनने को बेताब देवेन्द्र फडणवीस को सलाह- भाई, अपने गिरेबां में तो झांक लो

बेहतर यह है कि फडणवीस को उद्धव ठाकरे पर निशाना साधने से रोका जाना चाहिए और उन्हें इस बात पर मंथन करना चाहिए कि फिनिशिंग लाइन से ठीक पहल उन्हें वास्तव में किसने लंगड़ी लगा दी। क्या वह वास्तव में उद्धव ठाकरे ही थे जिन्होंने भाजपा को कथित तौर पर धोखा दिया।

फोटोः सोशल मीडिया
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सुजाता आनंदन

शरद पवार बीमार हुए, तो नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने उनके तेजी से स्वास्थ्य लाभ करने-संबंधी ट्वीट किए। अभी हाल में जब डिंपल यादव और उनकी बेटी बीमार हुईं, तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव से उनके स्वास्थ्य के बारे में हालचाल पूछा। लेकिन देवेन्द्र फडणवीस की किताब में इन सब शिष्टाचारों की जगह नहीं है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का ऑपरेशन हुआ, उस वक्त फडणवीस उन्हें इस पद के अयोग्य घोषित करने में लग गए जबकि उद्धव अपने अफसरों और पत्रकारों से चैट पर संवाद कर रहे थे। जब कागजात पर वह हस्ताक्षर कर रहे हैं और सरकारी फाइलें आ-जा रही हैं, तब वर्क फ्रॉम होम काल में इसका कोई मतलब नहीं है कि वह ऐसा अपने घर से कर रहे हैं या ऑफिस से।

लेकिन फडणवीस उद्धव ठाकरे के पद त्यागने को लेकर इतने बेचैन क्यों हैं? अगर उद्धव किसी वजह से इस्तीफा दे भी दें, तो इस सरकार में कोई बदलाव तो होना नहीं है। दुर्भाग्य से, अगर उद्धव बीमार रहें, तब भी महा विकास आघाड़ी में कई वरिष्ठ नेता हैं जिन्हें इस कुर्सी पर बैठा दिया जाए और सरकार चलती रहेगी। भाजपा को अपनी सरकार बनाने के लिए बहुत कुछ करना होगा। भाजपा के अंदर और बाहर के कई सूत्रों ने मुझे बताया है कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व किसी तरह अपनी सरकार बनाने को लेकर इच्छुक नहीं है। और फडणवीस को इस हिचकिचाहट से भारी परेशानी है। फडणवीस भाजपा में अपने को नंबर 3 मान बैठे हैं। यह बात उनके माथे में बैठ गई है। लेकिन यह बात अभी भाजपा में त्रिदेव को नागवार गुजर रही है। ‘तीसरे देव’ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। लेकिन सरकार बनाने और फडणवीस को मुख्यमंत्री-पद पर बिठाने में अक्षमता की पहेली बुझाने की जगह मोदी-अमित शाह सीधे-सीधे फडणवीस को यह बात कह क्यों नहीं देते?


जानकार सूत्रों ने मुझे बताया कि ऐसा जज लोया की वजह से है। जज लोया की मृत्यु के पूरे रहस्यमय घटनाक्रम की जानकारी फडणवीस के पास है। दरअसल, उस वक्त फडणवीस मुख्यमंत्री थे और उनके पास इससे संबंधित कोई वीडियो भी होने की बात कही जाती है। भाजपा के बड़े नेताओं को अंदाजा नहीं है कि फडणवीस के पास किस तरह की चीजें हैं। इसलिए पार्टी नेतृत्व फडणवीस को बर्दाश्त करता जा रहा है लेकिन वह उन्हें शक्तिशाली भी नहीं बनाना चाहता। इससे एक ही पत्थर से दो शिकार हो रहे हैं- फडणवीस मजबूत तो नहीं ही बन रहे, अपने कार्यकलापों से वह राज्य में भी हास्यास्पद होते जा रहे हैं।

ऐसी हालत और नेतृत्व की कमी की वजह से महाराष्ट्र में भाजपा समर्थन खोती जा रही है। फडणवीस को उनकी पार्टी के ही कई लोग कह चुके हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय के इर्दगिर्द मंडराना छोड़ देना चाहिए और एक ज्यादा जिम्मेदार विपक्षी नेता की तरह व्यवहार करना शुरू करना चाहिए।


वैसे भी, बेहतर यह है कि फडणवीस को उद्धव ठाकरे पर निशाना साधने से रोका जाना चाहिए और उन्हें इस बात पर मंथन करना चाहिए कि फिनिशिंग लाइन से ठीक पहले उन्हें वास्तव में किसने लंगड़ी लगा दी। क्या वह वास्तव में उद्धव ठाकरे ही थे जिन्होंने भाजपा को कथित तौर पर धोखा दिया। भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व के दो प्रमुख जन अगर चाह लेते, तो उनके लिए ठाकरे को अपने साथ रखना असंभव नहीं था। या वह शरद पवार थे जिन्हें फडणवीस ने बेवजह चुनौती दे दी थी जबकि वह 50 साल से अनवरत सक्रिय राजनीति में हैं और उन्होंने राजनीति तब शुरू की थी जब फडणवीस का जन्म भी नहीं हुआ था। फडणवीस के मन में ऐसे व्यक्ति के प्रति आदर होना चाहिए था। इस मामले में, प्रधानमंत्री मोदी बेहतर हैं जिन्होंने पवार को भारतीय राजनीति का पितामह तक कहा। या यह फडणवीस का अतिआत्मविश्वास था? फडणवीस यह कहते नहीं थकते थे कि मी पुनहा यें, मतलब मैं फिर आऊंगा और इसने ही लोगों को ऐसा चिढ़ा दिया कि उन्होंने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। वोट का इस तरह का घाटा नहीं होता, तो एमवीए कभी सरकार नहीं बना पाती। यदि फडणनीवस इन मुद्दों पर विचार करें, तो उन्हें ही लाभ होगा।

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Published: 02 Jan 2022, 10:00 PM