देश के करोड़ों वृद्ध नागरिक सरकार की उपेक्षा के शिकार, वृद्धावस्था पेंशन योजना में जल्द सुधार की जरूरत

वृद्ध नागरिकों को कई बार अपने प्रियजनों से उपेक्षा की शिकायत होती है, पर क्या सरकार भी उनसे रूठ गई है? केंद्र सरकार ने कई साल से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि नहीं बढ़ाई है।

फोटोः भारत डोगरा
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भारत डोगरा

औपचारिक या संगठित क्षेत्र में कार्य कर वहां से उचित पेंशन पाने वाले वृद्ध नागरिक भारत में मात्र 7 से 8 प्रतिशत हैं। शेष लगभग 93 प्रतिशत वृद्ध नागरिकों के लिए केंद्र सरकार के पास बस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सहायता कार्यक्रम ही है। और यह कार्यक्रम भी मात्र एक तिहाई या उससे भी कम वृद्ध नागरिकों तक पहुंचता है। इसके लिए जो बजट तय किया गया है, वह लंबे समय से बढ़ाया नहीं गया है। महंगाई बढ़ने से इस बजट का वास्तविक मूल्य तो पहले से कहीं कम हो गया है।

यह आश्चर्य और दुख की बात है कि 60 से 79 वर्ष की आयु के वृद्ध नागरिकों के लिए केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम के अन्तर्गत मात्र 200 रुपए प्रति माह की पेंशन तय की है, जिसका आज की कीमतों में वास्तविक मूल्य अब मात्र 93 रूपए के आसपास रह गया है। 80 वर्ष से ऊपर के वृद्ध नागरिकों के लिए केंद्र सरकार 500 रुपए प्रतिमाह की पेंशन देती है।

देश के करोड़ों वृद्ध नागरिक सरकार की उपेक्षा के शिकार, वृद्धावस्था पेंशन योजना में जल्द सुधार की जरूरत

केंद्र सरकार की इस पेंशन राशि में अधिकांश राज्य सरकारें अपनी ओर से धनराशि जोड़ती हैं। जहां वे अधिक धनराशि जोड़ती हैं, वहां वृद्ध नागरिकों को अपेक्षाकृत अधिक पेंशन मिल जाती है। जैसे- गोवा, दिल्ली, केरल और हरियाणा में 2000 रुपए के आसपास पेंशन मिल जाती है। दूसरी ओर कुछ राज्य ऐसे हैं जहां सरकारें अपनी ओर से बहुत कम धनराशि जोड़ती हैं और वहां के वृद्ध नागरिकों को इस कार्यक्रम के अन्तर्गत अभी तक 500 रुपए से भी कम की पेंशन मिलती है। ऐसे राज्य हैं- बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और मणिपुर।

पेंशन की राशि बहुत कम होने के अतिरिक्त एक अन्य समस्या यह है कि यह कार्यक्रम बहुत कम वृद्ध नागरिकों तक पहुंच रहा है। हेल्पेज इंडिया की ‘पेंशन की स्थिति-2018’ रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 8 करोड़ वृद्ध नागरिकों को इस कार्यक्रम के तहत पेंशन की जरूरत है, लेकिन आवंटित राशि बहुत सीमित होने के कारण गरीबी रेखा या आय सीमा के आधार पर 2.2 करोड़ वृद्ध नागरिकों को ही इस कार्यक्रम के अन्तर्गत पेंशन उपलब्ध करवाई जाती है। बहुत से जरूरतमंद वृद्ध नागरिक वर्षों तक इस कार्यक्रम के अन्तर्गत मिलने वाली पेंशन का इंतजार ही करते रह जाते हैं।

इतना ही नहीं, हाल के समय में पेंशन प्राप्त करने के लिए बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया जुड़ने से भी अनेक वृद्ध नागरिकों को उनकी पूरी तरह जायज और पहले से स्वीकृत पेंशन प्राप्त करने में बहुत कठिनाई हो रही है और इसकी शिकायत करने पर सुनवाई भी नहीं हो रही है।

93 प्रतिशत वृद्ध नागरिकों के साथ हो रहे इस अन्याय को दूर करने के लिए देश के लगभग 20 राज्यों में पेंशन परिषद का गठन किया गया है और वृद्ध नागरिकों की मांग उठाने वाले इस संगठन ने व्यापक विमर्श से न्यायपूर्ण पेंशन व्यवस्था का मांग-पत्र तैयार किया है। इन मांगों को कांग्रेस सहित अनेक प्रमुख राजनीतिक दलों, अनेक संगठनों और संस्थाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। इस मांग-पत्र में जो भी वृद्ध नागरिक औपचारिक क्षेत्र (जैसे सरकारी कर्मचारी, सैन्य दल) के दायरे से बाहर हैं, आयकर नहीं देते हैं और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के दायरे में आते हैं, उनके लिए न्यायसंगत पेंशन व्यवस्था स्थापित करने के लिए कहा गया है। इसके लिए न्यूनतम मजदूरी से लगभग आधी धनराशि की पेंशन की मांग पूरे देश के लिए की गई है जो 3000 रुपए प्रतिमाह है। इससे कोई वृद्ध नागरिक वंचित नहीं होना चाहिए। साथ में बायोमेट्रिक पहचान की व्यवस्था हटाने और असरदार शिकायत सुनवाई व्यवस्था स्थापित करने की मांग उठाई गई है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ पेंशन में स्वतः वृद्धि की व्यवस्था की भी मांग की गई है।

इस पेंशन राशि की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। इस समय केंद्र सरकार सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) का मात्र 0.04 प्रतिशत हिस्सा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अन्तर्गत दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन पर खर्च करती है। यदि इसे मात्र 1.8 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाए तो करोड़ों वृद्ध नागरिकों को बहुत राहत देने वाली इन मांगों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो जाएगी।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (वृद्धावस्था पेंशन) में जरूरी सुधार बहुत समय से विचाराधीन पड़े हैं। अब समय आ गया है कि इन सुधारों की घोषणा में और देर न हो और वर्षों से अपने गांवों और बस्तियों में पेंशन का इंतजार कर रहे वृद्ध नागरिकों की उम्मीद को पूरा किया जाए। जिस तरह प्रवासी मजदूरी की प्रवृत्ति बढ़ी है, उसके कारण दूर-दूर के गांवों में वृद्ध नागरिकों के लिए पेंशन की जरूरत पहले से और अधिक बढ़ गई है और अब इस सुधार-कार्य में और देर नहीं करनी चाहिए।

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