विष्णु नागर का व्यंग्यः मत चूको चौहान, बस झोला उठाकर निकल पड़ो, इमेज चांद तक पहुंच जाएगी!

मोदी जी के झोला उठाकर चल देने के खबर से इस मायूसी के माहौल में पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ जाएगी। अस्पतालों में वेंटिलेटर के सहारे जी रहे लोग सबकुछ फेंक-फांककर खुशी से नाच उठेंगे। जिनके शव अभी अंतिम संस्कार के लिए लाइन में लगे हैं, वे भी उठ खड़े होंगे!

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

मोदी जी चाहते हैं, भागवत जी चाहते हैं और जब संबित पात्रा जी भी चाहते हैं तो फिर हम क्यों न चाहें कि मोदी की अनलिमिटेड पॉजिटिव इमेज बने। मगर अब इसका एक ही रामबाण उपाय बचा है कि मोदी जी, झोला लेकर चल दें। अगर ठीक अभी वे चल दें तो उनकी इमेज सीधे चांद पर पहुंच जाएगी, मंगल की ओर रवाना होने की कोशिश में लग जाएगी और बुध ग्रह के बारे में सोचने लग जाएगी। इतना ही नहीं, देवता उन पर पुष्प वर्षा करने लगेंगे। मतलब 70 साल में जो नहीं हुआ, वह हो जाएगा। मोदी- मोदी, झोला-झोला हो जाएगा!

मान लो उनके पास झोला न हो तो वे खादी ग्रामोद्योग से गिफ्ट में मंगवा सकते हैं। सच तो यह है कि झोला लेकर जाने का उन पर पक्का विश्वास हो जाए तो लोग उनके लिए झोले का इंतजाम खुद कर देंगे। एक का नहीं, हजारों-लाखों झोलों का और एक से एक कलात्मक झोलों का। उन्हें झोला देने के लिए कम से कम दस लाख लोग इस देश में तैयार हो जाएंगे और चालीस लाख लोग विदेशों में। वैसे भारत में रहने वाले भारतीयों की क्षमता पर भी मुझे कम विश्वास नहीं है!

उनके जाने की बात से भक्तों समेत देशवासियों में इतना अधिक उत्साह आ जाएगा कि वे एक करोड़ क्या दस करोड़ झोले भी उन्हें दे देंगे। अगले कई जन्मों के लिए झोलों का इंतजाम कर देंगे, ताकि बार-बार प्रधानमंत्री बनने और फिर झोला उठाने का कष्ट न उठाना पड़े। सीधे झोला उठाएं और चल दें। एक बात और। कांग्रेस, वामपंथी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक यानी उत्तर और दक्षिण की लगभग सभी पार्टियां, तन-मन और धन से राजनीति को एकदम परे हटा कर इस अभियान में जुट जाएंगी!

यह राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय अभियान बन जाएगा। देश में राष्ट्रीय झोला आंदोलन चल जाएगा। मास्क बनाने वाले मास्क बनाना छोड़ झोले बनाने लगेंगे। यहां तक कि जो फैशन डिजाइनर मोदी जी के लिए रोज छह डिजाइनर कपड़े सिलते हैं, वे भी यह काम छोड़कर डिजाइनर झोले बनाने लगेंगे। अडाणी-अंबानी को मोदी जी के लिए झोला बनाते हुए दिल से दुख भले हो, मगर वे भी झोले की पुकार सुनेंगे। वे किसी सरकारी बैंक से लोन लेंगे (जिसे लौटाने की जरूरत न होगी) और इस धंधे में कूद पड़ेंगे, क्योंकि धंधा करने वाले का धर्म न हिन्दू होता है, न जैन, न पारसी। उसका धर्म वही होता है, जो धंधा दिलवाता है और मोदी जी जाते-जाते भी यह पुण्य कार्य कर जाएं, तो क्यों न वे भी इस अभियान से जुड़ कर देश का झंडा विश्व में फहराने से चूकें!


क्या पता यह राष्ट्रीय झोला अभियान, नमक सत्याग्रह या भारत छोड़ो आंदोलन से भी बड़ा सिद्ध हो जाए! वैसे भी यह एक तरह का भारत छोड़ो आंदोलन ही है, जिससे जन जन की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इससे मोदी जी की कुख्याति, ख्याति में बदल जाएगी, इमेज अनलिमिटेड पॉजिटिव बन जाएगी। मोदी जी को भी इससे खुशी होगी और भागवत जी को भी। पता नहीं संबित पात्रा को क्या होगी, मगर होगी कुछ न कुछ जरूर!

इस खबर से मायूसी के इस माहौल में पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ जाएगी। अस्पतालों में वेंटिलेटर के सहारे जी रहे लोग सबकुछ फेंक-फांककर खुशी से नाच उठेंगे कि हमारा कोरोना अब ठीक हो गया और ठीक हो भी जाएगा! जिनके शव अभी अंतिम संस्कार के लिए लाइन में लगे हैं, उन तक खबर पहुंचने की देर है कि वे भी उठ खड़े होंगे। यही हाल गंगा में बहते और उसके किनारे दबे शवों का होगा। यह दृश्य देख कोरोना क्या उसका बाप भी हमेशा-हमेशा के लिए भाग न जाए तो फिर कहना!

सब फिर से सामान्य हो जाएगा। सब तरफ चकाचक हो जाएगा। मोदी जी अगर हिमालय भी पहुंंच गए तो वहां भी लोग उन्हें झोला चढ़ाने पहुंच जाएंगे। शतायु होने के बाद वे जब भी स्वर्ग अथवा... में वास करना चाहें तो बाद में वह झोला पीर के नाम से मशहूर हो जाएंगे। इससे अधिक एक जीवन में किसी को भी क्या मिल सकता है!

मेरा यह सुझाव रचनात्मक भी है और पॉजिटिव अनलिमिटेड भी। मैं उनकी जगह होता तो मत चूको चौहान की शैली में तुरंत इसे लपक लेता, मगर क्या ऐसा हो सकता है कि मोदी जी मेरे बताए आदर्श पर चलें। आज वैसे भी शुभ दिन है। प्रधानमंत्री पद की दुबारा शपथ लेने का पवित्र दिन। अगर आज वे यह काम संपन्न कर दें तो थोड़ा सा मेरा नाम भी हो जाएगा।

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