RSS के 'गलत कामों' पर मूकदर्शक बनी बैठी ED! एक साल बाद भी ठंडे बस्ते में है संघ के खिलाफ दर्ज ये शिकायत

आरएसएस मामलों के जानकार कहते हैं कि “देश के कई हिस्सों में बैंक खातों के साथ समाज अधिनियम के तहत हजारों RSS के सहयोगी पंजीकृत हैं। वे संगठनों, लोगों और NRIs से धन-दान प्राप्त करते हैं और इस फंड का इस्तेमाल संघ की विचारधारा के विस्तार के लिए किया जाता है।

फोटो: सोशल मीडिया
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विश्वदीपक

वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए साल 1950 के दशक में कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित किए गए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को बिना देरी किए तलब कर दिया और बयान दर्ज करवाने के लिए उन्हें ED दफ्तर बुला लिया। राहुल गांधी से तीन अलग-अलग दिनों में करीब 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद भी चौथे दिन आज फिर एजेंसी द्वारा उन्हें बुलाया गया है।

लेकिन जब इसी एजेंसी (ED) को बीजेपी के मूल संगठन RSS से संबंधित गलत कामों की शिकायत और वित्तीय अनियमित्ताओं की जांच की मांग की जाती है तो उस दौरान ईडी मूकदर्शक की तरह काम करती, ये आरोप नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता मोहनीश जबलपुरे ने लगाया है। जबलपुरे (जो भारत की आत्मा पर "RSS के हमले" के खिलाफ लड़ने का दावा करते हैं) ने एक साल पहले सितंबर 2021 में ईडी के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें 2020 में कोरोना वायरस महामारी के दौरान आरएसएस द्वारा की गई "सेवा" की जांच की मांग की गई थी।


दरअसल, आरएसएस ने दक्षिणपंथी संगठन द्वारा कोरोना वायरस महामारी के दौरान लोगों की मदद करने के लिए किए गए कार्यों को "सेवा" करार दिया था। इसी "सेवा" की मोहनीश जबलपुरे ने शिकायत की थी और जांच की मांग की थी। आरएसएस का दावा है कि उसने 27 लाख प्रवासी कामगारों की मदद के साथ एक करोड़ राशन किट, 7 करोड़ खाने के पैकेट बांटे थे।

आरएसएस का दावा है कि उसने 27 लाख प्रवासी कामगारों की मदद के साथ एक करोड़ राशन किट, 7 करोड़ खाने के पैकेट बांटे थे।
आरएसएस का दावा है कि उसने 27 लाख प्रवासी कामगारों की मदद के साथ एक करोड़ राशन किट, 7 करोड़ खाने के पैकेट बांटे थे।

आरएसएस द्वारा की गई इसी "सेवा" पर सवाल उठाते हुए मोहनीश जबलपुरे ने अपने शिकायत पत्र में दावा किया कि इतने बड़े पैमाने पर "सेवा" करने के लिए लगभग हजारों करोड़ की आवश्यकता होगी। मोहनीश जबलपुरे ने पूछा कि सवाल यह है कि अगर आरएसएस ने वास्तव में ऐसा किया है, तो पैसा कहां से आया? जबलपुरे ने बताया कि उन्होंने शिकायत में एजेंसी से धन-प्रवाह की जांच करने के लिए कहा है, लेकिन एजेंसी ने अब तक कुछ नहीं किया है।


आरएसएस को संविधान विरोधी संगठन बताते हुए जबलपुरे ने कहा कि "सामाजिक कार्य करना महत्वपूर्ण है लेकिन सामाजिक कार्य की आड़ में घोटाला करने की जांच होनी चाहिए।" दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है जिसका नाम किसी भी बैंक खाते में नहीं है। तो, ऐसे में सवाल यह है कि आरएसएस अपने वित्त का प्रबंधन कैसे करता है और सेवा करने में मदद कैसे लेता है? ये सवाल जब आरएसएस मामलों के जानकार से किया गया तो उन्होंने नेशनल हेराल्ड को बताया कि संघ को बैक सपोर्ट मिलता है और उसी बैक चैनलों के जरिए पैसा मिलता है।

उन्होंने आगे बताया कि “देश के कई हिस्सों में बैंक खातों के साथ समाज अधिनियम के तहत हजारों आरएसएस के सहयोगी पंजीकृत हैं। वे संगठनों, लोगों और NRIs से धन और दान प्राप्त करते हैं और एक लंबे राउंड ट्रिप के बाद इस फंड का उपयोग आरएसएस की विचारधारा के विस्तार के लिए किया जाता है। उसने आगे बताया कि उन्हें पकड़ना मुश्किल है, लेकिन ईडी के लिए जांच के लिए यह एक आदर्श मामला है।

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