विष्णु नागर का व्यंग्यः गरीबों का मसीहा सब कोई, अमीरों का मसीहा कोई नहीं, चक्रवर्ती सम्राट कुछ कृपा दृष्टि करो!

जहां तक भक्तों का सवाल है, आप गरीबों के मसीहा बनो या अमीरों के, वे हमेशा साथ रहेंगे। उतर पड़ो मैदान में। बाकी गोदी मीडिया संभाल लेगा। जो बचेगा, वह आईटी निबटा देगा। इसलिए प्लीज गरीबों का मसीहा बनने का प्लान तत्काल कैंसिल करो, अमीरों की सोचो!

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मुझे तकलीफ केवल इस बात की है कि 74 साल हो गए आजादी मिले, 75वां साल अमृत काल ठहराया जा चुका है, फिर भी आज तक हम अमीरों का एक मसीहा तक पैदा नहीं कर पाए! अब तो चक्रवर्ती सम्राट ने भी अपने 71वें जन्मदिन पर अमीरों से अपना दामन झाड़ लिया है, गरीबों के मसीहा का ताज पहन लिया है। उन जैसा मन, वचन, कर्म से अमीरों के लिए प्रतिबद्ध ऐसा करे तो आप खुद सोचिए कि अमीरों को इससे कितनी सच्ची वेदना हुई होगी। मेरे अलावा आज तक किसी ने इस पर सोचा तक नहीं! आज अमीरों की तरफ आंख उठाकर देखने वाला तक कोई नहीं रहा। जी तो करता है रो पड़ूं, मगर यह काम भी चक्रवर्ती जी ने हथिया रखा है। सभी कुछ वे कर लेते हैं। ये तो गलत बात है न!

मां कसम, मेरी तो बड़ी इच्छा थी कि जिन अमीरों का आज कोई नहीं, उनका मसीहा बनकर मैं दिखा दूं! दुनिया को बता दूं कि जिनका कोई नहीं होता, उनका भी कोई होता है। आओ अमीरों, हताश मत होओ। एक है अभी इस भारत में, जो तुम्हें गले से लगाने को तैयार है। मैं तुम्हारी आंखों में आंसू देख नहीं सकता। यह मत सोचना कि इस दुनिया से दया-धरम उठ गया है। अभी हैं मेरे जैसे चंद लोग!

मैंने इस तरह के तमाम डायलॉग और एक्शन सीन सोच लिए थे। रिहर्सल भी कर ली थी। तभी ख्याल आया कि अगर ऐसी कोई घोषणा मैंने की तो अमीर तो मेरा भुर्ता बाद में बनाएंगे, सबसे पहले संघ-बीजेपी वाले मुझे सरेराह धुन देंगे। कहेंगे- साला, दो कौड़ी का लेखक, अमीरों का चक्रवर्ती सम्राट बनना चाहता है? शकल देखी है अपनी कभी आईने में! चक्रवर्ती सम्राट की बराबरी करेगा, हरामखोर!


पुलिस जब तक पहुंचेगी, तब तक मेरे पूरे शरीर पर प्लास्टर चढ़ चुका होगा और अंतिम सांसें जैसा कुछ चल रहा होगा। बाकी की तो साध अधूरी रह जाएगी। जूते मारने की इच्छा से भरे हुए लोग मन मसोस कर रह जाएंगे। पुलिस की इच्छा भी अधूरी रह जाएगी। वामपंथी लेखक संगठनों की ओर से जब तक मेरी भर्त्सना करते हुए वक्तव्य जारी होगा, तब तक मेरे मरणासन्न होने की खबर आ चुकी होगी। मानवीयता से गले-गले तक भरे लोग कहेंगे, पहले ही बंदा मरा पड़ा-सा है। कब संसार से उठ जाए, पता नहीं और ये ऊपर से उस पर सवारी गांठ रहे हैं! ये तो उसे केवल शब्दों से पीटते, उन्होंने तो इसे सशरीर पीट दिया है। और क्या चाहिए इन्हें? इन्हें तो उसे प्लास्टर बंधवाने वालों की निंदा करना चाहिए थी और ये उस गरीब की निंदा कर रहे हैं!

तो हाथ जोड़कर निवेदन है चक्रवर्ती सम्राट जी आपसे कि आप गरीबों के मसीहाई का खयाल छोड़, अमीरों का मसीहा बनो। कब तक कांग्रेसी लकीर पीटते रहोगे, अपनी खींच कर दिखाओ!भगवान की सों, बहुत विश्वसनीय लगोगे। अपनी इमेज के इस पक्ष पर अब ध्यान दो। अमीर बेचारे चुप रहते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप उनका शोषण करते रहो। आपमें यह बदलाव अगर आया तो भारत के सारे अमीर आप पर धन की वर्षा कर देंगे। आपकी इंटरनेशनल प्रेस्टीज को जो धक्का लगा है, उसकी मरम्मत कर देंगे!

जहां तक भक्तों का सवाल है, आप गरीबों के मसीहा बनो या अमीरों के, वे हमेशा साथ रहेंगे। मेरे सुझाव में थोड़ा सा खतरा जरूर है पर आप तो ठहरे खतरों के खिलाड़ी! उतर पड़ो मैदान में। बाकी गोदी मीडिया संभाल लेगा। जो बचेगा, वह काम आईटी निबटा देगा। इसलिए प्लीज गरीबों का मसीहा बनने का प्लान तत्काल कैंसिल करो। जन्मदिन पर गरीबों को खिचड़ी-विचड़ी बंटवा दो!

एक शुभचिंतक की सलाह मानने में ही आपका भला है। आप तो ओस की बूंदों में नमक जैसे 'कुछ' को इकट्ठा कर नहाने-कपड़े धोने जैसे विलक्षण चमत्कार बचपन में ही दिखा चुके हो तो अब अमीरों का मसीहा बनने जैसे चमत्कार से क्या घबराना! उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतना है या नहीं आपको, जीतना हो तो कूद पड़ो। अमीर आपकी प्रतीक्षा में हैं। बाकी तो आप जानते हो कि अपन किसी पर दबाव डालते नहीं। बीवी-बच्चों पर दबाव नहीं डाला तो आप तो सम्राट हो और वह भी चक्रवर्ती! अपना तो सरनेम तक में चक्रवर्ती नहीं! अपन आप पर दबाव कैसे डाल सकते हैं!

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