बीजेपी राज में बढ़ते जा रहे हैं अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरती भाषण, चिंता पैदा करती है अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट
अमेरिका के सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट की इंडिया हेट लैब रिपोर्ट के अनुसार भारत में हरेक दिन औसतन 4 ऐसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष तौर पर मुस्लिमों के विरुद्ध जहर उगला जाता है।

बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से मुस्लिमों के विरुद्ध नफरती भाषण और वक्तव्य सत्ता और मीडिया की मुख्यधारा की भाषा बन चुके हैं, नेताओं की यह राष्ट्रभाषा है और उनका राजनैतिक अस्तित्व इसी पर टिका है। पुलिस और क़ानून इसमें नफरत फैलाने वालों का खूब साथ दे रहे है। यही प्रधानमंत्री के विकसित भारत का विज़न है। धर्म विशेष या अल्पसंख्यकों को मानव से कमतर घोषित करने की परंपरा शुरू हो गयी है। हमारे देश में भी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध दीमक, परजीवी और पागल कुत्ते जैसे शब्दों का भी खूब इस्तेमाल किया जाने लगा है।
सत्ता के शीर्ष पर बैठे नेता अपने राजनैतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए अल्पसंख्यकों के लिए ऐसे हिंसक और नफरती भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे प्रभावित होकर एक आम आदमी भी हिंसा में लिप्त होने से परहेज नहीं करता है। हम आज उस दौर में खड़े हैं, जहां आदमी की ह्त्या सामान्य है, पर मारे गए व्यक्ति का धर्म विशेष है– हम ह्त्या का मातम नहीं मनाते, बल्कि उसके धर्म के आधार पर ह्त्या को ह्त्या या सजा बताते हैं और हत्या पर जश्न भी मनाते है।
हाल में ही अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में स्थित अनुसंधान संस्थान, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गनाइज्ड हेट ने इंडिया हेट लैब प्रोजेक्ट के तहत, वर्ष 2025 में भारत में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हेट स्पीच पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसके अनुसार भारत में हरेक दिन औसतन 4 ऐसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष तौर पर मुस्लिमों के विरुद्ध जहर उगला जाता है। ऐसे मामले साल-दर-साल तेजी से बढ़ते जा रहे हैं क्योंकि कट्टरपंथी और हिंसक हिन्दू संगठनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन्हें सत्ता और कानून से पूरी छूट मिली होती है, पुलिस का संरक्षण प्राप्त रहता है। इन संगठनों का अस्तित्व ही नफरती सम्मेलनों, समारोहों और वक्तव्यों पर टिका है। इंडिया हेट लैब भारत में नफरती भाषणों का बारीकी से आकलन करता है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्ष 2025 में हेट स्पीच के मामले वर्ष 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक दर्ज किए गए, जबकि इनकी संख्या वर्ष 2023 की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में ऐसे 1318 आयोजन किये गए थे, जिनमें नफरती भाषण दिए गए– इसमें से लगभग 88 प्रतिशत आयोजन बीजेपी शासित राज्यों में किये गए, यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। दूसरी तरफ गैर-बीजेपी शासित राज्यों में हेट स्पीच की संख्या 34 प्रतिशत तक कम दर्ज की गई है। हमारे देश में आतंकी हमलों के लिए एक तरफ तो पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया जाता है पर बदला अपने ही देश के अल्पसंख्यक नागरिकों से लिया जाता है। ऐसे हमलों के बाद धार्मिक उन्माद और हिंसा को सत्ता और कानून का अघोषित संरक्षण मिल जाता है। वर्ष 2025 के 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में सैलानियों पर आतंकवादी हमले के बाद हेट स्पीच का सिलसिला उफान मारने लगा। 22 अप्रैल से 7 मई के बीच कुल 98 आयोजनों में हेट स्पीच की बारिश की गई। यह सब एक संगठित और समन्वित मुस्लिमों के विरुद्ध हिंसक विरोध था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हेटस्पीच या नफरती भाषणों की वास्तविक संख्या इससे बहुत अधिक है, पर केवल इतने आयोजनों की खबरें ही मीडिया में आईं थीं। ऐतिहासिक तौर पर यह साबित हो चुका है कि नफरती भाषणों और वक्तव्यों से समाज में अस्थिरता आती है, एक दूसरे के प्रति दुर्भावना बढ़ती है और यह नरसंहार का भी कारण बनती है। इसलिए भारत में आज जो हो रहा है, सत्ता जिसे बढ़ावा दे रही है, यह स्थिति वर्तमान ही नहीं बल्कि भविष्य के लिए भयानक है। यहां वर्ष 2014 के बाद से मुस्लिमों समेत सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नफरती भाषणों और वक्तव्यों को कानूनी मान्यता मिल गयी है। तमाम तथाकथित साधू, साध्वियां, धार्मिक गुरु, संघ की छत्रछाया में पनप रहे संगठन, पत्रकार और सत्ता में बैठे नेता ऐसे वक्तव्य लगातार दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ तमाम मुस्लिम बुद्धिजीवियों को इसी आरोप में जेल में डाल दिया जाता है, और न्यायालय भी खामोश रहता है।
ऐसे समारोहों को आयोजित करने में 266 आयोजनों के साथ पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश, 193 आयोजनों के साथ दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र, 172 आयोजनों के साथ मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर, चौथे स्थान पर 155 आयोजनों के साथ उत्तराखंड और 76 आयोजनों के साथ दिल्ली पांचवें स्थान पर है। इसमें से 20 प्रतिशत का आयोजन अकेले विश्व हिन्दू परिषद् और बजरंग दल ने किया था, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े 160 से अधिक कट्टर दक्षिणपंथी संगठनों ने भी ऐसे आयोजन किए थे। ऐसे 145 आयोजनों का संचालन स्वयं तथाकथित धर्मगुरुओं ने किया था।
नफरती भाषणों में अधिकतर ऐसे हैं जिनमें केवल मुस्लिमों को बदनाम करने के लिए आधारहीन आरोप हैं। इन आरोपों में तमाम बीजेपी शासित राज्यों की सत्ता द्वारा आगे बढाया जाने वाला “लव जिहाद” प्रमुख है, इसके बाद लैंड जिहाद, पापुलेशन जिहाद, वोट जिहाद और हलाल जिहाद शामिल है। कुल 270 आयोजनों में मुस्लिम पूजा स्थलों और प्रार्थना स्थलों पर हमले के लिए भड़काया गया था। कुल 25 प्रतिशत में तो सीधे मुस्लिमों पर हिंसा का आह्वान किया गया था, इनमें से 170 आयोजनों में अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध हथियार उठाने का सीधा आह्वान किया गया था।
अमेरिका सरकार की वर्ष 2023 की एक रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों और एक धर्म विशेष के विरुद्ध बुलडोज़र के हथियार के तरीके से इस्तेमाल की चर्चा भी की गयी है। इसके अनुसार कानूनी प्रक्रिया के बिना ही अल्पसंख्यकों के घरों को अवैध निर्माण का नाम देकर उनके घरों को बुलडोज़र से ढहा दिया जाता है। ऐसे अधिकतर मामले एक धर्मविशेष के लोगों से जुड़े हैं, जिन्होंने सरकार की नीतियों का विरोध किया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मुस्लिम, क्रिस्चियन, सिख, दलितों और जन-जातीय समूहों को निशाना बनाकर लगातार हमले किये जाते हैं। अमेरिकी गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार भारत सरकार से आग्रह है कि ऐसे हमलों को बढ़ावा देने के बदले उन्हें रोकने का प्रयास करें। भारत में धार्मिक आजादी को अमानवीय तरीके से कुचला जा रहा है, यहां पर एक धर्म विशेष के लोगों के नरसंहार के लिए खुलेआम कैमरे के सामने आह्वान किया जाता है। अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जाता है, उनकी प्रार्थना सभाओं को रोका जाता है, अल्पसंख्यकों के घरों पर बुलडोज़र चलाये जाते हैं और अल्पसंख्यकों को धमकाने वाले या इन पर हिंसा करने वालों पर कोई कानूनी या पुलिस कार्यवाही नहीं की जाती है। जाहिर है ऐसे हिंसक और हत्यारों को सत्ता का पूरा समर्थन मिलता है।
एमनेस्टी इन्टरनेशनल ने भारत में विशेष तौर पर बीजेपी शासित राज्यों में बुलडोजर की मदद से मकानों को धराशायी कर सत्ता और मीडिया द्वारा प्रचारित तथाकथित न्याय पर दो रिपोर्ट प्रकाशित की है। पहली रिपोर्ट अप्रैल 2022 से जून 2022 के बीच भारत के पांच राज्यों में किये गए कुल 128 बुलडोज़र कार्यवाही में से 62 का विस्तृत ब्यौरा है, जिसमें पीड़ितों से साक्षात्कार भी शामिल हैं। ये पांच राज्य हैं– मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, असम और उत्तर प्रदेश– हरेक राज्य में क़ानून-व्यवस्था बीजेपी सरकारों की है। इन कार्यवाहियों से कम से कम 617 परिवार स्पष्ट तौर पर प्रभावित हुए हैं। दूसरी रिपोर्ट के अनुसार ऐसे अधिकतर मामलो में जेसेबी के बुलडोज़र का स्पष्ट तौर पर उपयोग किया गया और ऐसी अवैध कार्यवाहियों के साथ जेसीबी का नाम जुड़ रहा है, इसलिए जेसीबी कंपनी को इन मामलों का संज्ञान लेकर मानवाधिकार की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
भारत जैसे देशों में धार्मिक आधार पर भले ही लिखित क़ानून न बनाए जाते हों, पर सत्ता द्वारा धार्मिक कट्टरता का प्रचार धार्मिक कानूनों वाले देशों से भी कई गुना अधिक किया जाता है। दरअसल धर्म के आधार पर सत्ता का आधार एक विभाजित समाज ही होता है। आप इसमें किसी धर्म की रक्षा नहीं करते या फिर उसे आगे नहीं बढाते बल्कि केवल दूसरे धर्मों के विरुद्ध नफरत फैलाते हैं। हमारे देश में सत्ता प्रचारित यह धारणा जनता तक पहुंचा दी गयी है कि भारत केवल हिंदुओं का देश है और हिंदुओं को इस्लाम और दूसरे धर्मों से खतरा है। हमारे देश में सत्ता में बैठे लोगों की खुशनसीबी है कि मीडिया जैसी कोई चीज इस देश में बची ही नहीं है। मीडिया के नाम पर जो आप न्यूज़ चैनल देखते है, या समाचारपत्र पढ़ते हैं वह तो महज सरकार का प्रचार तंत्र है जो बीजेपी के आईटी सेल के तरह झूठ और नफरत फैलाने का माध्यम है।
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