दुनिया में 'हीट वेव' तो बढ़ ही रहे हैं, सवाल यह है कि इन्हें जानलेवा बनने से कैसे बचाएं?

दो कारणों से हीट-वेव की समस्या बढ़ रही है। पहला कारण जलवायु बदलाव व ग्लोबल वार्मिंग का दौर जिससे विश्व स्तर पर तापमान अधिक हो रहा है व वर्षा समय पर न होने की संभावना बढ़ रही है। दूसरी वजह है स्थानीय कारण जैसे हरियाली का कम होना, कंक्रीट का बढ़ना, वायु प्रदूषण आदि।

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भारत डोगरा

वर्ष 2015 में भारत में एक बहुत विनाशक गर्मी की लहर आई। इसमें 2500 लोग मारे गए। आगे यह लहर पाकिस्तान की ओर बढ़ गई। वहां भी 1100 लोग मारे गए। इससे भी पहले यूरोप में वर्ष 2003 में गर्मी की एक लहर आई। इसमें 30,000 से अधिक लोग मारे गए। केवल फ्रांस में ही 14,000 लोग मारे गए। इससे पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि यूरोप में गर्मी के प्रकोप से हजारों मौतें हो सकती हैं।

जी हां दुनिया में हीट वेव का प्रकोप बढ़ रहा है। ‘हीट वेव’ का अर्थ है असामान्य रूप से गर्म मौसम का कुछ अधिक समय तक जारी रहना (दो-तीन दिनों से अधिक समय)। दो कारणों से हीट-वेव की समस्या बढ़ रही है। पहला कारण है जलवायु बदलाव व ग्लोबल वार्मिंग का दौर जिससे विश्व स्तर पर तापमान अधिक हो रहा है व वर्षा समय पर न होने की संभावना बढ़ रही है। दूसरी वजह है स्थानीय कारण जैसे हरियाली का कम होना, कंक्रीट का बढ़ना, वायु प्रदूषण आदि।

हालांकि जलवायु बदलाव व ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में तापमान बढ़ने की प्रवृत्ति की आम जानकारी है, पर अभी व्यापक स्तर पर यह नहीं पता है कि स्थिति कितनी तेजी से बाहर निकलती जा रही है। सामान्य मान्यता यह है कि तापमान-वृद्धि को 1.50 सेल्सियस की सीमा का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। इसके लिए टापूनुमा देशों का विशेष आग्रह है क्योंकि तापमान वृद्धि, ग्लेशियर पिघलने व समुद्र के जल-स्तर में वृद्धि का सबसे बड़ा खतरा उन्हीं को है।

दूसरी ओर कुछ अन्य विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि अब तक ग्रीन हाऊस गैसों का जितना उत्सर्जन बढ़ चुका है, उसे देखते हुए तापमान वृद्धि को 1.50 से. तक समेट पाना शायद संभव नहीं होगा। अतः इनके द्वारा लक्ष्य तापमान वृद्धि को 20 से. तक समेटने पर रखा गया है। यह लक्ष्य इसलिए रखा गया है क्योंकि इसके आगे तो ‘टिपिंग प्वाईंट’ ही क्रॉस हो जाएगा जिससे धरती की जीवनदायिनी क्षमता इतने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाएगी कि फिर शायद उसे संभाल पाना संभव न हो।

लैंसट मेडिकल जर्नल द्वारा स्थापित ‘जलवायु बदलाव व स्वास्थ्य पर आयोग’ ने हाल ही में बताया है कि ग्रीनहाऊस गैसों का उत्सर्जन जिस तेजी से बढ़ता रहा है वह अगले वर्ष में धरती के तापमान वृद्धि को 20 से. के लक्ष्य तक सीमित रखने से मेल नहीं रखता है, अपितु उससे तो अगले 85 वर्षों में 40 से. वृद्धि की संभावना बनती है। उसके बाद भी उसमें स्थिरता बनती नहीं नजर आ रही है व वह 0.70 प्रति दशक की दर से और बढ़ सकती है। केवल आर्कटिक क्षेत्र को देखें तो वहां इस दौर में तापमान 110 से. तक बढ़ सकता है।

इस स्थिति में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि हरियाली को बढ़ा कर, वायु प्रदूषण को कम कर, पेयजल की व्यवस्था में बहुत सुधार कर व जरूरतमंदों को राहत पहुंचाकर गर्मी के प्रकोप को कम करने की पर्याप्त तैयारी की जाए। यूरोप की वर्ष 2003 की हीट वेव के आकलन में एक महत्त्वपूर्ण तथ्य यह देखा गया कि इन मौतों का महत्त्वपूर्ण सामाजिक पक्ष भी था। सबसे अधिक मौतें वृद्ध लोगों की हुईं। फ्रांस में जहां ऐसी मौतें सबसे अधिक हुईं वहां यह आंतरिक आलोचना का मुद्दा बना कि वृद्ध व्यक्तियों को परिवार में उचित स्थान नहीं मिल रहा है व वे बड़ी संख्या में अकेले रहने को मजबूर हैं। अगस्त में वैसे भी युवा लोग छुट्टी मनाने समुद्र किनारे के क्षेत्रों में चले जाते हैं। इस स्थिति में वृद्ध लोगों की देखरेख में और भी कमी आई व वे बड़ी संख्या में मर गए। यहां तक कि उनमें से अनेक की लाशों को लेने वाला भी उनकी मृत्यु के समय कोई नहीं था क्योंकि परिवार के युवा सदस्य छुट्टी मनाने गए हुए थे। इन लाशों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि उन्हें एक रेफ्रीजरेशन वाले गोदाम में रखना पड़ा।

इस त्रासदी के समय यह स्पष्ट हुआ कि प्रतिकूल मौसम के दिनों में कमजोर, वृद्ध नागरिकों की देखरेख की सामाजिक व्यवस्था बहुत महत्त्वपूर्ण है। यदि यह सामाजिक व्यवस्था व संबंध कमजोर हैं तो धनी देशों व समाजों में भी अधिक क्षति हो सकती हैं। यदि फ्रांस में सामाजिक व्यवस्था बेहतर होती तो छुट्टी गए हुए अनेक युवा या मध्य आयु के व्यक्ति बहुत शीघ्र वापस आकर जिम्मेदारी संभाल लेते, पर उनमें से अनेक सामान्य समय में ही वापस आए जब बहुत देर हो चुकी थी। यहां तक कि फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्री भी छुट्टी मनाने गए हुए थे। कुछ समय बाद उन्हें अपना पद खोना पड़ा।

इस हीट वेव का एक दूसरा महत्त्वपूर्ण पक्ष था कि जिन लोगों को बहुत गर्मी सहने की आदत नहीं है व इसके अनुकूल उन्होंने तैयारी नहीं की है, वे अचानक गर्मी बढ़ने पर जल्दी सावधानियों को नहीं अपना पाते हैं व उनकी मौत शीघ्र हो सकती है। दुनिया में बढ़ती हीट वेव एक हकीकत है उन्हें जानलेवा बनने से रोका जा सकता है। इसके लिए पहले से सही योजना बनाकर तैयारी करनी होगी और विशेषकर निर्धन लोगों, मेहनतकश लोगों, वृद्ध व कमजोर स्वास्थ्य के लोगों पर अधिक ध्यान देना होगा।

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