विष्णु नागर का व्यंग्य: मोदी-शाह का बस चले तो सबको निकाल दें, फिर कोई नहीं हरा पाएगा उन्हें चुनाव में !

किसान आत्महत्या करके देश का नाम बदनाम पहले से ही कर रहे हैं। कांग्रेसी, समाजवादी, बसपाई, तृणमूली आदि भी अब देशभक्त कहां रहे, उन्हें भी बाहर कर दें। लेखक-कलाकार आपकी तरह महान देशभक्त बनने की कोशिश करें तो भी नहीं बन सकते, उन्हें भी आऊट कर दें।

फोटो: सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

ऐसा है भई नरेंद्र मोदी जी और क्या नाम है उनका, अरे जी उनका, वो जो आजकल बीजेपी के अध्यक्ष होते हैं, अरे वोई जो गोलमोल से हैं और बड़ी ठसक से हिलते-डुलते चलते हैं, चलते क्या हैं बल्कि लहराते हैं। अरे अच्छा सा या बुरा सा कुछ नाम है न उनका, अरे हां ठीक बताया आपने, अमित शाह (और जी भी)। आप ऐसा करें महाशयद्वय कि सबको देश से बाहर निकाल दें और खुद ही रहें और कुएं में अपनी छाया देखकर, उसे अपना प्रतिद्वंद्वी समझकर उससे लड़ते रहें और छायायुद्ध करके खुश रहें।

वैसे आपकी चली और सुप्रीम कोर्ट की नहीं चली तो 40 लाख कथित या अकथित  बांग्लादेशियों को तो आप निकाल कर ही रहेंगे - मिशन चुनाव 2019 के अंतर्गत। निकाल के कहां ले जाएंगे, यह आप जानें। इनमें कुछ हिंदू हैं और कुछ पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के रिश्तेदार भी, मगर क्या फर्क पड़ता है इससे, आपमें हिम्मत बहुत है बल्कि फिलहाल अतिरेक है उसका। बेटे को रख लें और मां को निकाल दें। बीवी को रख लें, उसके पति को निकाल दें। सारे परिवार को रख लें, कमानेवाले एक आदमी को निकाल दें। जो पुलिस में हो, सेना में रहा हो, जिसे बाहरी नागरिकों की पहचान की जिम्मेदारी दी गई है, उसे भी बाहरी घोषित करके निकाल दें, ये सब आपके लिए मामूली बातें हैं, नित्यकर्म है।

रोहिंग्या भी आपके लिए शरणार्थी नहीं हैं, गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त लोग हैं, उन्हें भी निकाल दें। सभी मुसलमान और सभी कम्युनिस्ट संघ की थ्योरी के हिसाब से तो ‘देशभक्त’ कभी नहीं थे, न होंगे, तो एक बार में इन सभी को निकाल दें। और ठहरें तो, दलित भी आजकल मार खाने, गाली सुनने  से इनकार करने लगे हैं, आदिवासी तो खैर ‘नक्सली’ ही होते हैं, विकास की राह की सबसे बड़ी बाधा  होते हैं, फिर मूलनिवासी भी तो हैं, उन्हें भी लगे हाथ निकाल दें, अमेरिका से बराबरी करके दिखा दें। मजदूर थे कभी देशभक्त? फिर भी रख लेना सौ-पचास-हजार-दस हजार,आखिर आपकी सेवाटहल करने के लिए भी तो कोई चाहिए न।

किसान आत्महत्या करके देश का नाम बदनाम पहले से ही कर रहे हैं। कांग्रेसी, समाजवादी, बसपाई, तृणमूली आदि भी अब देशभक्त कहां रहे, उन्हें भी बाहर कर दें। लेखक-कलाकार आपकी तरह महान देशभक्त बनने की कोशिश करें तो भी नहीं बन सकते, उन्हें भी आऊट कर दें।बुद्धिजीवी और बुद्धिजीवी टाइपों से भी आपको सख्त नफरत है, उन्हें भी बाहर कर दें। रह जाएंगे आप दोनों भैया, मर्जी हो तो संघप्रमुख को भी रहने दें। अभी तक बेचारे काम के ही थे। अंबानी-अडानी तो खैर रहेंगे ही और भी दस-पचास आप जैसे सच्चे ‘देशभक्त’ कहीं गलती से मिल जाएं तो रख लें। फिर खूब राज करें, खूब भाषण दें, खूब हिंदू-मुस्लिम करें, खूब गोरक्षा करें, खूब चुनाव लड़ें बल्कि हर दिन, सुबह-शाम चुनाव लड़ते रहें, हमेशा ही जीतें। हजार-दो हजार देशभक्तों को, गायों-भैंसों-बकरियों-चिड़ियों, कबूतरों आदि को संबोधित करते रहकर, खूब देशप्रेमी बने रहें, जो चाहे करें मगर करें जरूर, बस चुप कभी मत बैठें वरना सेहत चौपट हो जाएगी, आपका राज बैठे-बिठाये  चला जाएगा। भले न रहें लोग, देश तो लंबा-चौड़ा है, दिन में पच्चीस बार इसे हवाई जहाज से रौंदते रहें, मातृभूमि की सेवा करते रहें। कोई नेहा, आपको काले झंडे नहीं दिखाएगी। कोई किसान आत्महत्या नहीं करेगा, कोई मजदूर हड़ताल नहीं करेगा। कोई दलित सिर नहीं उठाएगा, कोई औरत चूं नहींं करेगी।

एक ही दिक्कत रहेगी कि तब आपके ‘देशभक्त’ वे दलित कहां से लाएंगे, जिन्हें  भक्त लोग पीटा करते हैं, किस मुसलमान से नफरत करेंगे, किस रोहिंग्या, किस बांग्लादेशी को यहां से निकालेंगे? किससे कहेंगे, मेरे सवा सौ करोड़ देशवाासियों। ऐसी छोटी-मोटी दिक्कतें-परेशानियां आएंगी। जीना मुश्किल करेंगी, मगर योग करके सब ठीक हो जाएगा।अमित जी वक्त आ गया है, आप भी अब साहेब से योग सीख लें, बहुत काम आएगा। दीर्घजीवी भव:।

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